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लद्दाख आंदोलन पर वांगचुक का बयान: 'राज्य दर्जा और छठी अनुसूची की मांग जायज, बातचीत में पीछे नहीं हटेंगे'
जम्मू, पीटीआई
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Sun, 05 Apr 2026 08:38 PM IST
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सार
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लद्दाख में राज्य दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को जायज बताया। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वह केंद्र से बातचीत में शामिल होंगे और खुले मन से समाधान निकालने पर जोर दिया।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने रविवार को लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत संरक्षण की मांग वाले आंदोलन का बचाव किया। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता हुई तो वह केंद्र सरकार के साथ बातचीत में शामिल होने से पीछे नहीं हटेंगे। वांगचुक को 14 मार्च को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत करीब छह महीने की हिरासत के बाद रिहा किया गया था। उन्होंने खुले मन और ईमानदारी से बातचीत और बीच का रास्ता निकालने की बात कही।
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वांगचुक ने उम्मीद जताई कि जारी प्रदर्शन का सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण समाधान निकलेगा। उन्होंने कहा कि छठी अनुसूची के तहत संरक्षण और राज्य का दर्जा संविधान में निहित लोकतांत्रिक अधिकारों पर आधारित है। ये मांगें पूरी तरह जायज हैं। उन्होंने बताया कि पिछले पांच-छह वर्षों से सरकार के साथ इन मुद्दों पर बातचीत चल रही है। हालांकि, दूसरी ओर से कड़ा रुख अपनाने के कारण कोई समाधान नहीं निकला। वांगचुक ने जोर दिया कि बातचीत खुले दिमाग और पूरी ईमानदारी से होनी चाहिए। कोई भी पक्ष यह न माने कि सिर्फ वही जीतेगा और दूसरा हारेगा। जरूरत एक मध्य मार्ग और लाभकारी समाधान की है।
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वांगचुक ने कहा कि वे ऐसे दृष्टिकोण के लिए तैयार हैं, लेकिन यह एकतरफा नहीं होना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने इस सोच को देशभर के निष्पक्ष लोगों तक पहुंचाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आगामी वार्ता में उनकी चिंताओं को फिर नजरअंदाज किया गया। तो यह सवाल उठेगा कि लद्दाख के नेताओं के संतुलित रुख को क्यों नहीं अपनाया जा रहा। सरकार ने अभी तक अगली वार्ता की तारीख घोषित नहीं की है। लद्दाख के इस कार्यकर्ता ने उम्मीद जताई कि जारी विरोध प्रदर्शन सकारात्मक समाधान की ओर ले जाएगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत लगे आरोपों पर वांगचुक ने अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि उन जैसे व्यक्ति पर, जिसने हमेशा शिक्षा और पर्यावरण के लिए काम किया है, ऐसे आरोप लग सकते हैं। तो दूसरों के बारे में क्या कहा जा सकता है। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी से जुड़े एक वीडियो पर भी चिंता जताई। वांगचुक ने कहा कि यदि आरोप सही हैं तो उन्हें रिहा नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन यदि वे गलत हैं तो उन्हें स्पष्ट रूप से खारिज किया जाना चाहिए।
वांगचुक ने बताया कि लद्दाख, खासकर कारगिल, देश की सुरक्षा का मजबूत स्तंभ रहा है। 1999 के कारगिल युद्ध में यहां के लोगों ने सेना का साथ देते हुए बड़े बलिदान दिए हैं। ऐसे आरोप लोगों के बीच दूरी बढ़ा सकते हैं। केंद्र द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के आरोप हटाने का फैसला भरोसा बनाने और सार्थक संवाद के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने के उद्देश्य से उठाया गया है। आगे की रणनीति पर नेतृत्व विचार करेगा, लेकिन उम्मीद है कि आने वाला समय जश्न का होगा। गृह मंत्रालय के साथ बातचीत में शामिल होने की संभावना पर वांगचुक ने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह पीछे नहीं हटेंगे।