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Jammu News: ट्रीटमेंट प्लांट बनकर तैयार, नहीं हो रहा इस्तेमाल, नदी-नालों में बह रही गंदगी
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- शहर के सीवरेज से नहीं जुड़ सके भगवती नगर में बने तीन एसटीपी, संचालन ठप
जम्मू। शहर में सीवरेज समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। भगवती नगर में करोड़ों की लागत से बनाए तीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) कनेक्टिविटी के अभाव में निष्क्रिय हो चुके हैं। इस कारण बिना ट्रीटमेंट गंदा पानी नालों के जरिये सीधे तवी नदी में बह रहा है।
लोगों का कहना है कि योजना को धरातल पर उतारने से पहले बुनियादी कनेक्टिविटी पर ध्यान नहीं दिया गया। प्लांट तो तैयार हो गए, लेकिन लाइन अधूरी छोड़ दी गई। कई इलाकों का सीवरेज आज भी खुले नालों या तवी नदी में गिर रहा है जिससे नदी गंदी होने के साथ दुर्गंध, मच्छरों का प्रकोप और बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। प्लांट परिसर में टैंक, मशीनरी और इमारतें तैयार हैं, लेकिन पर्याप्त मात्रा में अपशिष्ट जल न पहुंचने के कारण संचालन संभव नहीं हो पा रहा। इसके बावजूद फाइलों में परियोजना को लगभग पूरा दिखाया जा रहा है, जिससे योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जब तक सीवरेज कनेक्टिविटी पूरी नहीं होती, तब तक करोड़ों की परियोजना कागजों तक सीमित रहेगी जिसका खामियाजा शहरवासी भुगतते रहेंगे।
मार्च तक पूरा होगा काम, नियमित चलेगा प्लांट
शहरी पर्यावरण अभियांत्रिकी विभाग (यूईईडी) के अभियंता अश्वनी खजूरिया का कहना है कि भगवती नगर में 30 एमएलडी, 27 एमएलडी और 10 एमएलडी क्षमता के तीन एसटीपी तकनीकी रूप से तैयार हैं। 26 अगस्त को बाढ़ के बाद कुछ सीवरेज लाइनों को अब तक प्लांट से नहीं जोड़ा जा सका। इंटरसेप्टर सीवर और पंपिंग नेटवर्क का काम चरणबद्ध तरीके से जारी है, जिसे मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य है। प्लांट में 12 कर्मचारी तैनात हैं, जो दिन-रात ड्यूटी दे रहे हैं। इसके बावजूद प्लांट नहीं चलने पर सवाल उठ रहे हैं।
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जम्मू। शहर में सीवरेज समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। भगवती नगर में करोड़ों की लागत से बनाए तीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) कनेक्टिविटी के अभाव में निष्क्रिय हो चुके हैं। इस कारण बिना ट्रीटमेंट गंदा पानी नालों के जरिये सीधे तवी नदी में बह रहा है।
लोगों का कहना है कि योजना को धरातल पर उतारने से पहले बुनियादी कनेक्टिविटी पर ध्यान नहीं दिया गया। प्लांट तो तैयार हो गए, लेकिन लाइन अधूरी छोड़ दी गई। कई इलाकों का सीवरेज आज भी खुले नालों या तवी नदी में गिर रहा है जिससे नदी गंदी होने के साथ दुर्गंध, मच्छरों का प्रकोप और बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। प्लांट परिसर में टैंक, मशीनरी और इमारतें तैयार हैं, लेकिन पर्याप्त मात्रा में अपशिष्ट जल न पहुंचने के कारण संचालन संभव नहीं हो पा रहा। इसके बावजूद फाइलों में परियोजना को लगभग पूरा दिखाया जा रहा है, जिससे योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जब तक सीवरेज कनेक्टिविटी पूरी नहीं होती, तब तक करोड़ों की परियोजना कागजों तक सीमित रहेगी जिसका खामियाजा शहरवासी भुगतते रहेंगे।
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शहरी पर्यावरण अभियांत्रिकी विभाग (यूईईडी) के अभियंता अश्वनी खजूरिया का कहना है कि भगवती नगर में 30 एमएलडी, 27 एमएलडी और 10 एमएलडी क्षमता के तीन एसटीपी तकनीकी रूप से तैयार हैं। 26 अगस्त को बाढ़ के बाद कुछ सीवरेज लाइनों को अब तक प्लांट से नहीं जोड़ा जा सका। इंटरसेप्टर सीवर और पंपिंग नेटवर्क का काम चरणबद्ध तरीके से जारी है, जिसे मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य है। प्लांट में 12 कर्मचारी तैनात हैं, जो दिन-रात ड्यूटी दे रहे हैं। इसके बावजूद प्लांट नहीं चलने पर सवाल उठ रहे हैं।