घबराने की जरूरत नहीं: प्रदेश में ईंधन की कोई कमी नहीं, 1.96 लाख सिलिंडर का स्टॉक; पेट्रोल-डीजल भरपूर
जम्मू-कश्मीर में एलपीजी सिलिंडर, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, जनता को किसी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
विस्तार
मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने वीरवार को प्रदेश में सिलिंडर और पेट्रोल-डीजल समेत अन्य पेट्रो पदार्थों की उपलब्धता संबंधी समीक्षा बैठक की। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में 196065 सिलिंडर और लाखों लीटर पेट्रोल-डीजल स्टॉक में है। कोई दिक्कत की बात नहीं है।
मुख्य सचिव ने दोनों मंडलों में वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों को 70 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के आयुक्त सचिव सौरभ भगत ने बताया कि सुचारू आपूर्ति के लिए पर्याप्त उपाय किए गए हैं। प्रवासी आबादी और श्रमिकों के लिए 5 किलो के एलपीजी सिलिंडर की उपलब्धता और केंद्र सरकार के निर्देशानुसार वाणिज्यिक और औद्योगिक प्रतिष्ठानों को 70 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित करने के आदेश जारी करना शामिल है।
जम्मू संभाग के आयुक्त रमेश कुमार ने बताया कि संगाग में 7,325 किलोलीटर (एक किलोलीटर में 1000 लीटर होता है) पेट्रोल और 27,241 किलोलीटर डीजल का पर्याप्त स्टॉक है। सुपीरियर केरोसिन ऑयल 49 दिन और एविएशन टर्बाइन फ्यूल 12 दिनों के लिए है। 47,296 एलपीजी सिलिंडर हैं। पिछले 10 दिनों में 7,769 सिलिंडर वितरित हुए है।
कश्मीर संभाग के आयुक्त अंशुल गर्ग ने बताया कि संभाग में 7,721 किलोलीटर पेट्रोल और 13,487 किलोलीटर डीजल का भंडार है। कुल 148,769 सिलिंडर उपलब्ध है। 1 से 8 अप्रैल के बीच 4,987 सिलेंडर वितरित किए गए। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को हिदायत दी कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों की आड़ में जमाखोरी रोकने के लिए बाजार मूल्यों पर कड़ी निगरानी रखें।
एलपीजी आपूर्ति पर संकट, डीलरों ने दी काम बंद करने की चेतावनी
जम्मू संभाग में एलपीजी (रसोई गैस) की सुचारू आपूर्ति को लेकर डीलरों की चिंताएं बढ़ गई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया तो वे गैस एजेंसियों का संचालन बंद कर देंगे जिससे पूरे संभाग में एलपीजी आपूर्ति ठप हो सकती है।
हाल में आयोजित एक आपात बैठक में हिन्दुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल जैसी प्रमुख तेल कंपनियों के डीलरों ने वर्तमान व्यवस्था को अव्यावहारिक बताया है। डीलरों का कहना है कि सरकार द्वारा लागू की गई अनिवार्य ऑनलाइन प्रणाली और डीएसी (डीलर ऑथेंटिकेशन कोड) आधारित बिक्री जमीनी स्तर पर विफल साबित हो रही है।
बैठक में जम्मू संभाग के सभी जिलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि बनी, बसोहली, डोडा, भद्रवाह, राजोरी और पुंछ जैसे पहाड़ी व दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट की भारी समस्या है। खराब नेटवर्क के कारण न तो बुकिंग हो पा रही है और न ही डिलीवरी। इससे आम उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मंत्री ने शीघ्र समाधान का दिया आश्वासन
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री सतीश शर्मा ने भी वर्चुअल माध्यम से इस बैठक में शिरकत की। उन्होंने डीलरों की समस्याओं को सुना और उनके शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।
ये हैं मांगें:
डीएसी आधारित बुकिंग को कुल बिक्री के 30% तक किया जाए। ‘इंस्टेंट बुकिंग’ (तत्काल बुकिंग) की व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाए। विभिन्न विभागों द्वारा बार-बार मांगे जाने वाले अनावश्यक डेटा के दबाव को कम किया जाए।