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अमरनाथ आंदोलन से मेडिकल कॉलेज तक: जम्मू में आवाज उठी तो बदले फैसले, हर हक के लिए रहा लंबा संघर्ष

गौरव रावत अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Wed, 07 Jan 2026 11:20 AM IST
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सार

जम्मू में शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्थानों से जुड़े अधिकार बिना संघर्ष के नहीं मिले हैं, और जब भी क्षेत्रीय भेदभाव महसूस हुआ, जनआंदोलनों ने सरकारों को फैसले बदलने पर मजबूर किया। 

When voices were raised in Jammu, decisions changed, there was a long struggle for every right.
वर्ष 2008 में अमरनाथ भूमि आंदोलन के दौरान विरोध प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करती पुलिस। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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जम्मू का इतिहास गवाह है कि यहां शिक्षा, स्वास्थ्य और बड़े संस्थानों से जुड़ा कोई भी अधिकार बिना संघर्ष के नहीं मिला। जब भी लोगों को लगा कि क्षेत्रीय संतुलन और हिस्सेदारी की अनदेखी हो रही है तब-तब आंदोलन सड़कों तक पहुंचे और अंततः सरकारों को फैसले बदलने पड़े।

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2008 का अमरनाथ भूमि आंदोलन हो, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज जम्मू में एमबीबीएस सीटों की बढ़ोतरी का सवाल हो या बड़े शैक्षणिक संस्थानों की मांग, हर बार जनदबाव ने व्यवस्था को झुकने पर मजबूर किया।
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कटड़ा स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस से जुड़ा ताजा घटनाक्रम भी इसी लंबी संघर्ष परंपरा की एक और कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार संत कुमार शर्मा का कहना है कि जम्मू में ऐसे आंदोलन कोई नई बात नहीं हैं। उन्होंने बताया कि जब भी लोगों को लगा कि उनके साथ भेदभाव हो रहा है, तब उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ा। उनके मुताबिक अमरनाथ भूमि आंदोलन जम्मू की क्षेत्रीय चेतना का बड़ा मोड़ साबित हुआ। उस आंदोलन से साफ हो गया था कि जम्मू से अनदेखी पर पूरा क्षेत्र एकजुट होगा।

When voices were raised in Jammu, decisions changed, there was a long struggle for every right.
वर्ष 2008 में अमरनाथ भूमि आंदोलन के दौरान विरोध प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करती पुलिस। - फोटो : सोशल मीडिया

केंद्रीय विश्वविद्यालय और एम्स दोनों के लिए सड़कों पर उतरा जम्मू
वर्ष 2009 में जब केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय की घोषणा की, तो इसकी अधिकतर शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियां कश्मीर केंद्रित रखी गईं। इससे जम्मू में नाराजगी फैल गई। छात्रों, शिक्षकों, व्यापारिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने इसे क्षेत्रीय भेदभाव बताया। लंबे आंदोलन के बाद सरकार को संतुलन बनाना पड़ा और जम्मू में अलग केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना की गई।

इसी तरह वर्ष 2015 में जम्मू कश्मीर के लिए एम्स की घोषणा के बाद जब इसे कश्मीर में स्थापित करने की तैयारी शुरू हुई, तो जम्मू में विरोध तेज हो गया। लोगों का कहना था कि स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में जम्मू पहले ही पिछड़ा हुआ है। वकीलों, व्यापारिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं के आंदोलन के बाद सरकार को जम्मू के लिए अलग एम्स की घोषणा करनी पड़ी।

When voices were raised in Jammu, decisions changed, there was a long struggle for every right.
वर्ष 2008 में अमरनाथ भूमि आंदोलन के दौरान विरोध प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करती पुलिस। - फोटो : सोशल मीडिया

जम्मू वालों को लड़कर ही मिलता है हक
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक दिनेश मल्होत्रा के अनुसार जम्मू वालों को लगभग हर अधिकार संघर्ष के बाद ही मिला है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1998 में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज जम्मू में एमबीबीएस सीटों की बढ़ोतरी के लिए भी आंदोलन करना पड़ा था। छात्रों और अभिभावकों के लगातार दबाव के बाद ही सरकार ने सीटें बढ़ाने का फैसला लिया। मल्होत्रा ने यह भी याद दिलाया कि सत्तर के दशक में जम्मू में आयुर्वेदिक कॉलेज खोलने के लिए भी लंबा आंदोलन चला था। उनके मुताबिक आज जो संस्थान सामान्य नजर आते हैं, वे वर्षों की लड़ाई और जनदबाव का नतीजा हैं।

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