Jharkhand News: खरसावां गोलीकांड के शहीदों को सीएम हेमंत सोरेन की श्रद्धांजलि, न्यायिक आयोग गठन का एलान
खरसावां गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि देने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खरसावां शहीद स्थल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने गोवा गोलीकांड की तर्ज पर शहीदों को चिह्नित कर सम्मान देने के लिए न्यायिक आयोग गठित करने की घोषणा की।
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खरसावां गोलीकांड में शहीद हुए वीरों को श्रद्धांजलि देने के लिए गुरुवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां शहीद स्थल पहुंचे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ मंत्री दीपक बिरुवा, सिंहभूम की सांसद जोबा मांझी, चक्रधरपुर के विधायक सुखराम उरांव, खरसावां के विधायक दशरथ गागराई और ईचागढ़ की विधायक सविता महतो भी मौजूद रहीं।
मुख्यमंत्री ने शहीदों को नमन करते हुए घोषणा की कि खरसावां गोलीकांड में शहीद हुए लोगों को चिह्नित कर उन्हें सम्मान देने के लिए न्यायिक जांच आयोग का गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गोवा गोलीकांड की तर्ज पर खरसावां गोलीकांड के शहीदों को सम्मान दिया जाएगा। इसके लिए एक विस्तृत मसौदा तैयार किया जा रहा है, जिसमें यह तय किया जाएगा कि प्रशासनिक अधिकारियों की क्या भूमिका होगी और शहीदों की पहचान किस प्रक्रिया से की जाएगी।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही इस मसौदे को अंतिम रूप दिया जाएगा। आयोग में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को शामिल किया जाएगा और अगले वर्ष के शहीद दिवस से पहले शहीदों की पहचान कर उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
'किसान और मजदूरों के लिए यह शहीद दिवस है'
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि एक जनवरी पूरी दुनिया के लिए नया साल है, लेकिन झारखंड के आदिवासी, मूलवासी, किसान और मजदूरों के लिए यह शहीद दिवस है। जब देश नया साल मना रहा होता है, तब झारखंड के लोग अपने शहीदों को याद करते हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड का इतिहास गौरवपूर्ण रहा है। चाहे कोल्हान क्षेत्र हो, संथाल परगना हो, उत्तरी-दक्षिणी छोटानागपुर या पलामू प्रमंडल यह भूमि शहीदों की कुर्बानियों से भरी हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा की रक्षा के लिए यहां के वीर सपूतों ने अंग्रेजों और दमनकारी नीतियों के खिलाफ संघर्ष किया और अपनी जान की आहुति दी। खरसावां शहीद दिवस इस संघर्ष की सबसे बड़ी मिसाल है। उन्होंने कहा कि हम ऐसे वीरों के वंशज हैं, जिन्होंने कभी अन्याय के आगे घुटने नहीं टेके। इसी भावना को जीवित रखने के लिए शहीदों को याद किया जाता है और उनके समाधि स्थलों पर शीश नवाया जाता है।
मुख्यमंत्री ने किसान-मजदूरों के अधिकारों का जिक्र करते हुए कहा कि आज उनके अधिकारों को छीना जा रहा है, लेकिन कोई पूंजीपति उनके आंसू नहीं पोंछेगा। उन्होंने कहा कि जब-जब उन्हें अवसर मिला, उन्होंने शहीदों को नमन कर संघर्ष किया, जिसका सकारात्मक परिणाम भी मिला है। इस दौरान उन्होंने संताल परगना के वीर शहीद सिद्धू-कान्हू को भी याद किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मइयां सम्मान योजना के तहत महिलाओं को 2500 रुपये प्रतिमाह दे रही है, जबकि पड़ोसी राज्यों में केवल घोषणाएं कर सरकारें बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड को देश के अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा करना सरकार का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन को याद करते हुए कहा कि उनके संघर्ष की बदौलत ही झारखंड को अलग राज्य का दर्जा मिला।
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इससे पहले खरसावां के विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि खरसावां गोलीकांड आजाद भारत के इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है। यह गोलीकांड देश की आजादी के साढ़े चार महीने बाद तब हुआ, जब पूरा देश नए साल का जश्न मना रहा था। उन्होंने बताया कि ओडिशा सरकार द्वारा आदिवासियों पर गोली चलाए जाने के बाद से आदिवासी समाज एक जनवरी को नया साल नहीं, बल्कि शोक दिवस के रूप में मनाता है।
न्यायिक आयोग गठित करने की मांग उठाई थी
उन्होंने कहा कि झारखंड के अलावा ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से भी आदिवासी समाज के लोग हर वर्ष खरसावां आकर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं। दशरथ गागराई ने बताया कि वर्ष 2014 में विधायक बनने के बाद उन्होंने विधानसभा में न्यायिक आयोग गठित करने की मांग उठाई थी। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने जांच आयोग का गठन किया, जिसमें दो शहीदों खरसावां के महादेव बूटा और कुचाई के बाईडीह निवासी सिंगराय बोदरा को चिह्नित कर उनके परिजनों को एक-एक लाख रुपये की सहायता दी गई थी। हालांकि, वर्ष 2017 में कुछ घटनाओं के बाद शहीदों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया रुक गई थी।
इस निर्णय के विरोध में आदिवासियों ने आंदोलन शुरू किया था
विधायक ने मुख्यमंत्री से शहीदों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया पुनः शुरू करने की मांग की और कहा कि झारखंड के बाहर के शहीदों को भी सम्मान दिया जाना चाहिए। उन्होंने शहीद स्थल से जुड़े कुछ विवादों का भी उल्लेख किया और शहीदों को श्रद्धांजलि देने आने वाले लोगों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। कार्यक्रम में मंत्री दीपक बिरुवा और सांसद जोबा मांझी ने भी सभा को संबोधित किया।
गौरतलब है कि आजादी के बाद खरसावां को ओडिशा में शामिल करने के निर्णय के विरोध में आदिवासियों ने आंदोलन शुरू किया था। इसी आंदोलन के दौरान 1 जनवरी 1948 को खरसावां हाट बाजार में जुटी भीड़ पर तत्कालीन पुलिस ने गोली चला दी थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे। इस घटना को इतिहास में खरसावां गोलीकांड के नाम से जाना जाता है, जिसे ‘दूसरा जलियांवाला बाग’ भी कहा जाता है। तब से हर वर्ष एक जनवरी को यहां शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।