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Jharkhand News: धनबाद भूमि अधिग्रहण घोटाला मामले में ACB के एकसाथ कई ठिकानों पर छापे, 16 से अधिक लोग गिरफ्तार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धनबाद Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 09 Jan 2026 03:05 PM IST
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सार

Jharkhand News: धनबाद में भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले को लेकर एसीबी ने कई ठिकानों पर छापामारी कर 16 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया। रिंग रोड परियोजना से जुड़े इस मामले में फर्जी दस्तावेज, नियमों की अनदेखी और 300 करोड़ से अधिक की अनियमितता की आशंका है।
 

ACB raids multiple locations simultaneously in Dhanbad land acquisition scam case more than 16 people arrested
धनबाद में एसीबी की बड़ी कार्रवाई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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झारखंड के धनबाद जिले में जमीन अधिग्रहण से जुड़े मुआवजा घोटाले को लेकर शुक्रवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई की। एसीबी की टीम ने एक साथ कई ठिकानों पर छापामारी की, जिसमें अब तक 16 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया।

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मुआवजा भुगतान में नियमों की अनदेखी उजागर
एसीबी की प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया में नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई। जांच में सामने आया है कि भू-राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारी, कर्मचारी और कई बिचौलिये इस पूरे मामले में शामिल थे, जिन्होंने मिलकर व्यवस्था का दुरुपयोग किया।
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रिंग रोड परियोजना से जुड़ा है मामला
जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा रिंग रोड निर्माण के लिए रैयतों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। नियमानुसार जमीन मालिकों को उचित मुआवजा दिया जाना था, लेकिन फर्जी दस्तावेज और गलत रिकॉर्ड तैयार कर मुआवजे की बड़ी राशि निकाल ली गई। कई मामलों में ऐसे लोगों के नाम पर भुगतान किया गया, जिनका जमीन से कोई संबंध नहीं था।
 
दस्तावेजों में हेराफेरी और बिचौलियों की भूमिका
जांच के दौरान जमीन से जुड़े दस्तावेजों में व्यापक हेराफेरी की पुष्टि हुई है। एसीबी को संदेह है कि इस पूरे खेल में बिचौलियों की अहम भूमिका रही, जिन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर फर्जीवाड़े को अंजाम दिया और सरकारी धन का दुरुपयोग किया।
 
300 करोड़ से अधिक के घोटाले की आशंका
जानकारों के अनुसार, इस मुआवजा घोटाले में करीब 300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का खेल हुआ है। जांच एजेंसी को आशंका है कि आगे की जांच में घोटाले की रकम और बढ़ सकती है, क्योंकि कई संदिग्ध लेनदेन अभी सामने आना बाकी हैं।

यह भी पढ़ें- Jharkhand: अवैध खनन मामले में सीबीआई की जांच तेज, खनन कार्यालय से जुटाए कई वर्षों पुराने दस्तावेज
 
2014 से चल रही है जांच की प्रक्रिया
यह मामला पहली बार वर्ष 2014 में सामने आया था। इसके बाद राज्य सरकार ने पहले निगरानी ब्यूरो और फिर एसीबी को इसकी जांच सौंपी। प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी उदयकांत पाठक, लाल मोहन नायक समेत कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था।
 
जांच जारी, और नाम आने की संभावना
विभागीय टीम का कहना है कि इस घोटाले में अभी और भी कई लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। एसीबी ने स्पष्ट किया है कि जब तक पूरे मामले की गहन पड़ताल पूरी नहीं हो जाती और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, तब तक जांच जारी रहेगी।
 
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