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Jharkhand: आदिवासी पहचान की राजनीति पर गरमाई बहस, बाबूलाल मरांडी बोले- सरना भी सनातन परंपरा का हिस्सा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: राँची ब्यूरो Updated Mon, 25 May 2026 08:27 AM IST
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सार

रांची में भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरना, सनातन और हिंदू एक ही सांस्कृतिक धारा के प्रतीक हैं। उन्होंने कांग्रेस और झामुमो पर आदिवासी समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाया और आदिवासी धार्मिक स्थलों के संरक्षण की मांग की।

Babulal Marandi Slams Congress-JMM Over Tribal Identity Politics
प्रेस कॉन्फ्रेंस करते पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने झारखंड में सरना, सनातन और हिंदू पहचान को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस और झामुमो पर आदिवासी समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाया है। रविवार को रांची स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि सरना, सनातन और हिंदू अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही सांस्कृतिक परंपरा और प्रकृति पूजा की भावना के प्रतीक हैं।


देशभर में आदिवासी समाज की सैकड़ों जातियां
मरांडी ने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति की पूजा करता आया है। पेड़, पहाड़, जल, धरती माता और स्थानीय देवी-देवताओं की आराधना सरना परंपरा का हिस्सा है, जो सनातन संस्कृति से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि देशभर में आदिवासी समाज की सैकड़ों जातियां और अलग-अलग पूजा पद्धतियां हैं, लेकिन विविधता में एकता ही उनकी सबसे बड़ी पहचान है।
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कांग्रेस और झामुमो वोट बैंक की राजनीति कर रहे
पूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और झामुमो पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों दल वोट बैंक की राजनीति के लिए आदिवासी समाज में भ्रम और अलगाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस पर आदिवासियों को हिंदू बनाने का लगाया जाने वाला आरोप पूरी तरह निराधार है।
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हिंदू बनाने जैसी कोई परंपरा नहीं
बाबूलाल मरांडी ने कहा, 'हिंदू बनाने जैसी कोई परंपरा नहीं है, जबकि धर्मांतरण के जरिए लोगों को ईसाई और मुसलमान बनाया जाता है।' उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी संस्कृति और आस्था को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।

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पारंपरिक आदिवासी व्यवस्थाओं को प्रभावित करने की कोशिशें
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पेसा कानून की नियमावली का जिक्र करते हुए कहा कि पारंपरिक आदिवासी व्यवस्थाओं को प्रभावित करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही सरना, जाहेरथान और मांझीथान जैसे आदिवासी धार्मिक स्थलों की जमीनों के संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। मरांडी ने दावा किया कि उनकी सरकार ने ही जाहेरथान की घेराबंदी और आदिवासी धार्मिक स्थलों के संरक्षण की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि आदिवासी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है।
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