{"_id":"69b2dd91eb304ed364065fe3","slug":"decks-cleared-for-revival-of-ranchis-bacon-factory-two-key-mous-signed-to-strengthen-agriculture-and-animal-husbandry-sectors-ranchi-news-c-1-1-noi1475-4042862-2026-03-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jharkhand: झारखंड में कृषि और पशुपालन को नई उड़ान, बेकन फैक्ट्री और हॉर्टिकल्चरल रिसर्च में हुए दो बड़े समझौते","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jharkhand: झारखंड में कृषि और पशुपालन को नई उड़ान, बेकन फैक्ट्री और हॉर्टिकल्चरल रिसर्च में हुए दो बड़े समझौते
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Thu, 12 Mar 2026 10:31 PM IST
विज्ञापन
सार
झारखंड विधानसभा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कृषि मंत्री शिल्पी ने दो महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए। पहला एमओयू रांची की बेकन फैक्ट्री के आधुनिकीकरण और पुनरुद्धार के लिए इंडियन कॉउन्सिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च और नेशनल मीट रिसर्च इंस्टिट्यूट के साथ हुआ।
सीएम हेमंत औरों के सामने एमओयू हुआ
विज्ञापन
विस्तार
गुरुवार को झारखंड विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय कक्ष में कृषि, पशुपालन और सहकारिता विभाग के तहत दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की मौजूद रहीं। इन समझौतों को राज्य के कृषि, बागवानी और पशुपालन क्षेत्र के विकास के लिए अहम कदम माना जा रहा है।
बेकन फैक्ट्री का पुनरुद्धार
पहले एमओयू के तहत रांची स्थित बहुप्रतीक्षित बेकन फैक्ट्री के पुनरुद्धार का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह समझौता इंडियन कॉउन्सिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (आईसीएआर) और नेशनल मीट रिसर्च इंस्टिट्यूट, हैदराबाद तथा झारखंड के पशुपालन निदेशालय के बीच किया गया है।
इस समझौते के तहत बेकन फैक्ट्री के आधुनिकीकरण और पुनरुद्धार के लिए तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही राज्य में मांस प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा, अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को लागू किया जाएगा और स्थानीय उद्यमियों व श्रमिकों के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी। इसके अलावा मांस प्रसंस्करण क्षेत्र में तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा।
आईसीएआर-एनएमआरआई की भूमिका
इस अवसर पर आईसीएआर-एनएमआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एम. मुथुकुमार ने कहा कि यह सहयोग आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों के जरिए झारखंड के मीट सेक्टर को नई दिशा देगा। वहीं पशुपालन निदेशक आदित्य कुमार आनंद ने कहा कि बेकन फैक्ट्री का पुनरुद्धार राज्य में मीट उद्योग के व्यापक विकास का आधार बनेगा, जिससे किसानों, उद्यमियों और उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।
उद्यान निदेशालय और हॉर्टिकल्चरल रिसर्च में समझौता
दूसरा एमओयू झारखंड के उद्यान निदेशालय और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ हॉर्टिकल्चरल रिसर्च, बेंगलुरु के बीच हुआ। इसका उद्देश्य राज्य में फल, सब्जी, सजावटी और औषधीय पौधों के साथ-साथ मशरूम जैसी फसलों की उत्पादकता, गुणवत्ता और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना है। सरकार का मानना है कि इन पहलों से कृषि आधारित प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में वृद्धि के साथ झारखंड के ग्रामीण अर्थतंत्र को मजबूती मिलेगी।
Trending Videos
बेकन फैक्ट्री का पुनरुद्धार
पहले एमओयू के तहत रांची स्थित बहुप्रतीक्षित बेकन फैक्ट्री के पुनरुद्धार का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह समझौता इंडियन कॉउन्सिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (आईसीएआर) और नेशनल मीट रिसर्च इंस्टिट्यूट, हैदराबाद तथा झारखंड के पशुपालन निदेशालय के बीच किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस समझौते के तहत बेकन फैक्ट्री के आधुनिकीकरण और पुनरुद्धार के लिए तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही राज्य में मांस प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा, अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को लागू किया जाएगा और स्थानीय उद्यमियों व श्रमिकों के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी। इसके अलावा मांस प्रसंस्करण क्षेत्र में तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा।
आईसीएआर-एनएमआरआई की भूमिका
इस अवसर पर आईसीएआर-एनएमआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एम. मुथुकुमार ने कहा कि यह सहयोग आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों के जरिए झारखंड के मीट सेक्टर को नई दिशा देगा। वहीं पशुपालन निदेशक आदित्य कुमार आनंद ने कहा कि बेकन फैक्ट्री का पुनरुद्धार राज्य में मीट उद्योग के व्यापक विकास का आधार बनेगा, जिससे किसानों, उद्यमियों और उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।
उद्यान निदेशालय और हॉर्टिकल्चरल रिसर्च में समझौता
दूसरा एमओयू झारखंड के उद्यान निदेशालय और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ हॉर्टिकल्चरल रिसर्च, बेंगलुरु के बीच हुआ। इसका उद्देश्य राज्य में फल, सब्जी, सजावटी और औषधीय पौधों के साथ-साथ मशरूम जैसी फसलों की उत्पादकता, गुणवत्ता और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना है। सरकार का मानना है कि इन पहलों से कृषि आधारित प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में वृद्धि के साथ झारखंड के ग्रामीण अर्थतंत्र को मजबूती मिलेगी।