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Pranav Jha : कौन हैं प्रणव झा, जिनपर कांग्रेस ने खेला दांव? जीत की संभावना और सरकार गणित भी समझिए
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jun 2026 02:29 PM IST
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सार
Jharkhan News : झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी के रूप में प्रणव झा का नाम जारी किया है। कौन हैं प्रणव झा? इनके चयन की वजह क्या है? जीत की कितनी संभावना है? झारखंड में सत्तारूढ़ दलों की खींचतान के बीच इस नाम का क्या होने वाला है?
कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय सचिव प्रणव झा को मैदान में उतारा है। देर रात जारी सूची में उनके नाम की घोषणा की गई। संगठन और मीडिया प्रबंधन में मजबूत पकड़ रखने वाले प्रणव झा को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का करीबी माना जाता है। उनके चयन को संगठन के प्रति निष्ठा और लंबे समय से पर्दे के पीछे काम कर रहे नेताओं के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।
बिहार के भागलपुर से है प्रणव झा का संबंध
प्रणव झा मूल रूप से बिहार के भागलपुर जिले के कहलगांव क्षेत्र स्थित अनादिपुर गांव के निवासी हैं। झारखंड के बोकारो से भी उनका जुड़ाव रहा है। पिछले कई वर्षों से वे दिल्ली की राजनीति में सक्रिय हैं और कांग्रेस संगठन में राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पार्टी कार्यों के सिलसिले में वे कई बार झारखंड का दौरा भी कर चुके हैं।
जीत की राह आसान नहीं
हालांकि राज्यसभा पहुंचने की राह उनके लिए पूरी तरह आसान नहीं दिख रही है। कांग्रेस के पास विधानसभा में 16 विधायक हैं। वहीं राजद के 4, भाकपा-माले के 2 और एक निर्दलीय विधायक का समर्थन महागठबंधन को प्राप्त है। इसके बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार की जीत के लिए झामुमो के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। माना जा रहा है कि उम्मीदवार तय करने से पहले कांग्रेस नेतृत्व और झामुमो के शीर्ष नेताओं के बीच चर्चा हुई होगी, जिसके बाद प्रणव झा के नाम पर सहमति बनी।
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झामुमो ने अभी नहीं खोले पत्ते
दूसरी ओर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने अभी तक अपने उम्मीदवार के नाम की औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन अंजनी सोरेन का नाम प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि झामुमो जल्द ही अपने उम्मीदवार का ऐलान कर सकता है।
यदि भारतीय जनता पार्टी उद्योगपति परिमल नाथवानी को मैदान में उतारती है तो मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है। हालांकि भाजपा की ओर से अभी तक उम्मीदवार को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
क्रॉस वोटिंग का इतिहास बढ़ा रहा रोमांच
झारखंड में राज्यसभा चुनावों के दौरान क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों का इतिहास भी रहा है। ऐसे में महागठबंधन की एकजुटता और विधायकों की निष्ठा इस चुनाव का सबसे बड़ा फैक्टर होगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि महागठबंधन पूरी तरह एकजुट रहता है और झामुमो दूसरी सीट पर अलग रणनीति अपनाता है, तो प्रणव झा की जीत की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है। राज्यसभा चुनाव को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है।
बिहार के भागलपुर से है प्रणव झा का संबंध
प्रणव झा मूल रूप से बिहार के भागलपुर जिले के कहलगांव क्षेत्र स्थित अनादिपुर गांव के निवासी हैं। झारखंड के बोकारो से भी उनका जुड़ाव रहा है। पिछले कई वर्षों से वे दिल्ली की राजनीति में सक्रिय हैं और कांग्रेस संगठन में राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पार्टी कार्यों के सिलसिले में वे कई बार झारखंड का दौरा भी कर चुके हैं।
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जीत की राह आसान नहीं
हालांकि राज्यसभा पहुंचने की राह उनके लिए पूरी तरह आसान नहीं दिख रही है। कांग्रेस के पास विधानसभा में 16 विधायक हैं। वहीं राजद के 4, भाकपा-माले के 2 और एक निर्दलीय विधायक का समर्थन महागठबंधन को प्राप्त है। इसके बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार की जीत के लिए झामुमो के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। माना जा रहा है कि उम्मीदवार तय करने से पहले कांग्रेस नेतृत्व और झामुमो के शीर्ष नेताओं के बीच चर्चा हुई होगी, जिसके बाद प्रणव झा के नाम पर सहमति बनी।
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झामुमो ने अभी नहीं खोले पत्ते
दूसरी ओर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने अभी तक अपने उम्मीदवार के नाम की औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन अंजनी सोरेन का नाम प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि झामुमो जल्द ही अपने उम्मीदवार का ऐलान कर सकता है।
यदि भारतीय जनता पार्टी उद्योगपति परिमल नाथवानी को मैदान में उतारती है तो मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है। हालांकि भाजपा की ओर से अभी तक उम्मीदवार को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
क्रॉस वोटिंग का इतिहास बढ़ा रहा रोमांच
झारखंड में राज्यसभा चुनावों के दौरान क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों का इतिहास भी रहा है। ऐसे में महागठबंधन की एकजुटता और विधायकों की निष्ठा इस चुनाव का सबसे बड़ा फैक्टर होगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि महागठबंधन पूरी तरह एकजुट रहता है और झामुमो दूसरी सीट पर अलग रणनीति अपनाता है, तो प्रणव झा की जीत की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है। राज्यसभा चुनाव को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है।