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AHA Guideline 2026: कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करके कैसे ठीक रखें दिल की सेहत? जारी हुई नई गाइडलाइंस

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Mon, 16 Mar 2026 04:32 PM IST
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सार

मेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (एसीसी) और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) सहित नौ अन्य प्रमुख मेडिकल एसोसिएशन ने  लिपिड और कोलेस्ट्रॉल को मैनेज करके दिल की सेहत में सुधार के लिए नए गाइडलाइंस जारी किए हैं। 

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कोलेस्ट्रॉल - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

दिल की सेहत से जुड़ी समस्याएं वैश्विक स्तर पर गंभीर चिंता का कारण बनी हुई हैं। कम उम्र के लोगों में भी दिल की बीमारियां, हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामलों में इजाफा देखा जा रहा है, जिसे लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को निरंतर सावधानी बरतते रहने की सलाह देते हैं।

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हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल को हृदय रोगों और हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी ने इन जोखिमों को काफी बढ़ा दिया है। मसलन आप प्रोसेस्ड चीजें, नमक-चीनी ज्यादा खाते हैं, शारीरिक रूप से कम सक्रिय रहते हैं तो इससे ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा रहता है जो दिल की समस्याओं का भी कारण बनता है। दिनचर्या और खान-पान में सुधार करके दिल की सेहत को ठीक रखा जा सकता है।
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इसी क्रम में अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (एसीसी) और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) सहित नौ अन्य प्रमुख मेडिकल एसोसिएशन ने लिपिड और कोलेस्ट्रॉल को मैनेज करके दिल की सेहत में सुधार के लिए नए गाइडलाइंस जारी किए हैं। 

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कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Adobe Stock

डिस्लिपिडेमिया के मैनेजमेंट को लेकर गाइडलाइंस

हृदय स्वास्थ्य की प्रमुख संस्थाओं ने डिस्लिपिडेमिया के मैनेजमेंट को लेकर गाइडलाइंस जारी की हैं। डिस्लिपिडेमिया हमारे खून में फैट या कोलेस्ट्रॉल का असामान्य स्तर है। यह स्थिति हृदय रोग, स्ट्रोक और एथेरोस्क्लेरोसिस के खतरे को बढ़ाती है। मुख्य रूप से खराब जीवनशैली मोटापा और आनुवंशिकता के कारण ये समस्या होती है।
 

  • एक अनुमान के मुताबिक, अकेले अमेरिका में हर 4 में से 1 वयस्क में लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन-कोलेस्ट्रॉल ( LDL-C) का स्तर ज्यादा पाया जा रहा है, जिससे दिल के दौरे और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
  • इस नई गाइडलाइंस में लिपिड की मात्रा में गड़बड़ी को ठीक करने  के लिए साक्ष्य-आधारित सुझावों को बताया गया है।  
  • इससे व्यक्ति में एथेरोस्क्लेरोटिक कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (ASCVD) के खतरे को कम किया जा सकता है। 


स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं,  एथेरोस्क्लेरोटिक कार्डियोवैस्कुलर डिजीज धमनियों में वसा जमा होने के कारण होता है और यह विश्व स्तर पर मृत्यु का प्रमुख कारण है। इस गाइडलाइन का मुख्य फोकस हेल्दी लाइफस्टाइल के जरिए इसके खतरे को कम करना है। 

वजन को कंट्रोल बनाए रखना, नियमित रूप से फिजिकल एक्टिविटी, तंबाकू वाले प्रोडक्ट्स से बचना, नींद की आदतों में सुधार और डॉक्टर द्वारा दी गई कोलेस्ट्रॉल की दवाओं का लेना आपके लिए जरूरी है। 

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हार्ट अटैक और हृदय रोगों का खतरा कैसे कम करें? - फोटो : Adobe Stock Photos

कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का कैसे कम करें खतरा

गाइडलाइन तैयार करने  वाली कमेटी के चेयरमैन, जॉन्स हॉपकिन्स सिसारोन सेंटर फॉर द प्रिवेंशन ऑफ हार्ट डिजीज के डायरेक्टर केनेथ जे. पोलिन कहते हैं, हम जानते हैं कि 80% या उससे ज्यादा कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों को रोका जा सकता है। बढ़ा हुआ बैड कोलेस्ट्रॉल इस जोखिम को कम कर सकता है।
 

  • हम कोलेस्ट्रॉल कम करने के पहले कदम के तौर पर हेल्दी लाइफस्टाइल की आदतों को बढ़ाने की सलाह देते हैं। 
  • हालांकि कुछ समय तक लाइफस्टाइल को बेहतर बनाने के बाद भी लिपिड के आंकड़े मनचाही सीमा के अंदर नहीं आते हैं।
  • ऐसे में हमें लिपिड कम करने वाली दवा को अब ज्यादा जल्दी शुरू करने के बारे में सोचना चाहिए। 
  • लंबे समय तक बैड कोलेस्ट्रॉल को कम रखने से भविष्य में होने वाले दिल के दौरे और स्ट्रोक के जोखिमों से सुरक्षा मिलती है।

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दिल की बीमारियों का खतरा कैसे कम करें? - फोटो : Freepik.com

डिस्लिपिडेमिया मैनेजमेंट गाइडलाइंस की महत्वपूर्ण बातें

2026 के डिस्लिपिडेमिया मैनेजमेंट गाइडलाइंस के अनुसार, वयस्कों को 19 वर्ष की आयु में कोलेस्ट्रॉल की जांच करवानी चाहिए। इस जांच को कम से कम हर पांच साल में एक बार दोहराना चाहिए ताकि संभावित जोखिमों का जल्द पता लगाने में मदद मिल सके।

अगर हाई कोलेस्ट्रॉल के समय रहते इलाज न किया जाए तो ये रक्त वाहिकाओं को चुपचाप नुकसान पहुंचा सकता है। उच्च कोलेस्ट्रॉल के अक्सर कोई प्रत्यक्ष लक्षण नहीं दिखते, इसलिए इसे मैनेज करना जरूरी है।


कोलेस्ट्रॉल गाइडलाइंस में रिस्क असेसमेंट का नया टूल शामिल 

2026 की कोलेस्ट्रॉल गाइडलाइंस में एक अहम बदलाव यह है कि पुराने रिस्क प्रेडिक्शन मॉडल्स की जगह अब AHA PREVENT-ASCVD रिस्क कैलकुलेटर का इस्तेमाल किया जाएगा।
 

  • पहले इस्तेमाल होने वाले मॉडल्स में यह पाया गया था कि वे दिल के दौरे और स्ट्रोक के 10 साल के रिस्क को 40–50 प्रतिशत तक ज्यादा बताते थे। 
  • नया टूल एथेरोस्क्लेरोटिक कार्डियोवैस्कुलर बीमारी (ASCVD) होने के 10 साल और 30 साल, दोनों के रिस्क का अनुमान लगाता है। 




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स्रोत:
ACC/AHA Issue Updated Guideline for Managing Lipids, Cholesterol


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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