शरीर को स्वस्थ रखना है तो इसके लिए जरूरी है कि आपके सभी अंग ठीक तरीके से काम करते रहें। किडनी की सेहत को लेकर हमें और भी सावधानी बरतते रहने की जरूरत होती है। ये छोटा सा अंग कई बड़े-बड़े और महत्वपूर्ण कार्य लगातार बिना थके करता रहता है।
Kidney Disease: क्या बच्चों में भी होती है किडनी की बीमारी? किडनी को हेल्दी रखने के लिए क्या करें
बदलती जीवनशैली, ज्यादा नमक, प्रोसेस्ड फूड और कम पानी पीने की आदत किडनी की बीमारियों का जोखिम बढ़ा रही है। किडनी की बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इसका शिकार हो सकते हैं।
बच्चों में किडनी की बीमारी का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, किडनी की बीमारी किसी को भी हो सकती है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी उम्र और लिंग वालों में इसका जोखिम देखा जाता रहा है। शुरुआती स्टेज में किडनी की बीमारी के लक्षण बहुत हल्के होते हैं, जिनपर अक्सर लोगों का ध्यान नहीं जाता है। हालांकि अगर समय पर जांच और इलाज हो जाए, तो किडनी की समस्याओं को काफी हद तक कम किया सकता है।
दर्द निवारक दवाओं के अधिक सेवन, मोटापा, धूम्रपान जैसी आदतों को वयस्कों में किडनी की बीमारी बढ़ाने वाला माना जाता है, फिर बच्चों में ये समस्या क्यों होती है?
बच्चों में किडनी रोग के कारण वयस्कों से अलग हो सकते हैं। जन्मजात दोष, नेफ्रोटिक सिंड्रोम, बार-बार होने वाला यूरिन इन्फेक्शन और कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां इसका कारण हो सकती हैं।
बच्चों में किडनी की बीमारी क्यों होती है?
स्टैनफोर्ड मेडिसिन की एक रिपोर्ट में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कई स्थितियां हैं जो बच्चों में किडनी की समस्याएं बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
- किडनी में किसी वजह से खून का संचार कम होना।
- डिहाइड्रेशन (पानी की कमी), बहुत ज्यादा खून बह जाने, सर्जरी या शॉक की वजह से ये दिक्कत हो सकती है।
- यूरिनरी ट्रैक्ट यानी पेशाब की नली में रुकावट।
- ऐसी दवाएं बार-बार लेना जिनसे किडनी को नुकसान हो सकता है।
- हीमोलिटिक यूरेमिक सिंड्रोम भी बच्चों में किडनी की बीमारी का कारण है। यह आमतौर पर ई. कोलाई इन्फेक्शन की वजह से होता है।
बच्चों में किडनी की बीमारी की पहचान क्या है?
किडनी की बीमारियों में वैसे तो शुरुआती स्थिति में लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं पर कुछ बदलावों पर गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए। बच्चों में एक्यूट (अचानक होने वाली) और क्रॉनिक (लंबे समय से चली आ रही) किडनी की बीमारी के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं।
एक्यूट किडनी की बीमारी में आमतौर पर बुखार, त्वचा पर चकत्ते, खून वाला दस्त, उल्टी-पेट दर्द, पेशाब बिल्कुल न होना या बहुत ज्यादा होने, आंखों में सूजन जैसी समस्याएं होती हैं। वहीं क्रॉनिक बीमारियों में कुछ अन्य दिक्कतें भी हो सकती हैं।
- भूख कम लगना-उल्टी
- हड्डियों में दर्द और अक्सर सिरदर्द रहना
- बच्चों के विकास में देरी।
- पेशाब बहुत ज्यादा होना या बिल्कुल न होना
- बार-बार यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई) होना
- पेशाब पर कंट्रोल न रहना।
बच्चों की किडनी को कैसे हेल्दी रखें?
बच्चों में अगर किडनी की बीमारी की जोखिम आनुवांशिक है तो डॉक्टर की सलाह और इलाज जरूरी है। इसके अलावा बच्चों में किडनी की बीमारी से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली की आदतों को अपनाना जरूरी है।
- बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं, शरीर में पानी की कमी न होने दें।
- बच्चों को ज्यादा नमक और चीनी वाली चीजें, प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ न दें।
- बच्चों के वजन को बढ़ने न दें।
- ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने वाले उपाय करें। दर्द वाली दवाएं कम दें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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