COPD Risk: फेफड़ों की लाइलाज बीमारी के लिए आ गया गेमचेंजर इंजेक्शन, सालाना इलाज पर बचेगा 73 हजार करोड़ का खर्च
ब्रिटेन में पहली बार सीओपीडी मरीजों को एक नया इंजेक्शन डुपिलुमैब दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह दवा बीमारी के अचानक बिगड़ने वाले मामलों को करीब 33 प्रतिशत तक कम कर सकती है।
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फेफड़ों और सांस की बीमारियां वैश्विक स्तर पर मौत का प्रमुख कारण रही हैं। आंकड़ों के अनुसार दुनियाभर में ये लगभग 56.9 करोड़ लोगों को प्रभावित करती हैं, जिससे हर साल एक करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है। अस्थमा, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), निचले श्वसन तंत्र का संक्रमण (जैसे निमोनिया), फेफड़ों का कैंसर और टीबी इनमें प्रमुख है। बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण, धूम्रपान और कुछ आनुवांशिक स्थितियों को इन बीमारियों को बढ़ाने वाला माना जाता रहा है।
सांस से जुड़ी बीमारियों में सीओपीडी को काफी गंभीर जोखिमों वाला माना जाता रहा है। करीब 213 मिलियन (21 करोड़ से अधिक) लोग इसका शिकार हैं। यह दुनिया भर में मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण है, जिससे हर साल लगभग 37 लाख लोगों की मौत होती है। इनमें से 90% से ज्यादा मौतें कम और मध्यम आय वाले देशों में रिपोर्ट की जाती रही है।
सीओपीडी वायुमार्ग में सूजन और क्षति पहुंचाती है। यह वायु प्रवाह को बाधित करती है और सांस लेने में कठिनाई पैदा करती है। इसके मरीजों को अब तक लक्षणों में सुधार और सांस लेने में मदद करने के लिए दवाएं दी जाती रही थीं, हालांकि अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसे गेमचेंजर इंजेक्शन के बारे में जानकारी दी है जो इसके उपचार को बिल्कुल बदलने वाली हो सकती है।
सांस लेना इंसान की सबसे सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है। लेकिन जरा सोचिए, अगर हर सांस लेने के लिए आपको संघर्ष करना पड़े, कुछ कदम चलने पर ही दम फूलने लग जाए, लगातार खांसी परेशान करे और सीने में ऐसा महसूस हो जैसे किसी ने कसकर जकड़ लिया हो, तो जिंदगी कितनी मुश्किल हो सकती है?
सीओपीडी हर दिन इसी तरह की गंभीर समस्याओं का कारण बनती है। यह बीमारी धीरे-धीरे फेफड़ों को कमजोर करती जाती है और समय के साथ मरीज की सामान्य जिंदगी छीन लेती है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इसका अभी तक कोई स्थायी इलाज मौजूद नहीं था।
सीओपीडी पर सालाना खर्च होता है कई लाख करोड़
सीओपीडी, सांस की दिक्कतों को तो बढ़ाती ही है, साथ ही इसके कारण ग्लोबल इकॉनमी पर सालाना अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ता जा रहा है।
- आंकड़ों के अनुसार इस बीमारी पर सालाना सीधे मेडिकल खर्च के तौर पर ही $778 बिलियन (73 लाख करोड़ से अधिक) लगता है।
- विशेषज्ञों का कहना है कि इस इंजेक्शन को अगर दुनियाभर में मान्यता मिलती है और इसका इस्तेमाल होता है तो हर साल कई लाख करोड़ रुपये के खर्च को कम किया जा सकता है।
सांस की नलियों को संकरी कर देती है ये बीमारी
सीओपीडी के कारण सांस लेने की नलियां धीरे-धीरे संकरी हो जाती हैं। इससे मरीज को सांस लेने में दिक्कत, लगातार खांसी, बलगम और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
- इस बीमारी में कई बार मरीज की हालत अचानक ज्यादा खराब हो जाती है। डॉक्टर इसे एक्सासरबेशन कहते हैं।
- नई दवा डुपिलुमैबऐसे गंभीर अटैक या बीमारी के अचानक बिगड़ने की घटनाओं को करीब एक-तिहाई (लगभग 33 प्रतिशत) तक कम कर सकती है।
सीओपीडी के लिए डुपिलुमैब इंजेक्शन
अब इसी दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है। ब्रिटेन में पहली बार सीओपीडी मरीजों को एक नया इंजेक्शन दिया गया है। इसका नाम है- डुपिलुमैब।
- विशेषज्ञों का कहना है कि यह दवा बीमारी के अचानक बिगड़ने वाले मामलों को करीब 33 प्रतिशत तक कम कर सकती है।
- इतना ही नहीं, इससे मरीजों को सांस लेने में आसानी होती है, फेफड़ों की कार्यक्षमता बेहतर होती है और अस्पताल में भर्ती होने की नौबत भी कम आ सकती है।
- यदि इसके परिणाम बड़े स्तर पर सफल रहे, तो यह लाखों मरीजों के जीवन की गुणवत्ता बदल सकता है।
हालांकि यह इंजेक्शन सीओपीडी का स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन इसे इस बीमारी के उपचार में पिछले कई वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।
पहली बार मरीजों की दी गई इंजेक्शन
पिछले साल ब्रिटेन की स्वास्थ्य संस्था (NICE) ने इसे मंजूरी दी थी और पिछले सप्ताह पहली बार सीओपीडी के मरीजों को यह इंजेक्शन एनएचएस (ब्रिटेन की सरकारी स्वास्थ्य सेवा) के तहत दी गई।
- यह दवा हर दो सप्ताह में एक बार इंजेक्शन के रूप में दी जाती है। अभी तक इस बीमारी का इलाज मुख्य रूप से इनहेलर (सांस के जरिए ली जाने वाली दवा) और स्टेरॉयड (सूजन कम करने वाली दवाएं) से किया जाता है।
इस इंजेक्शन का पहला डोज पाने वाले मरीज 67 वर्षीय पैट्रिक रेगन हैं, जो दक्षिण-पूर्वी लंदन के कैटफोर्ड इलाके में रहते हैं। करीब 15 साल पहले उन्हें सीओपीडी होने का पता चला था।
- पैट्रिक रेगन कहते हैं, मैं यह इंजेक्शन लेने के लिए खुश था। अगर इससे मेरी तबीयत थोड़ी भी बेहतर होती है और मुझे सांस लेने में आसानी मिलती है, तो यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है।
- सीओपीडी ने मेरी जिंदगी पर बहुत असर डाला है।
- अब मैं पहले की तरह चल-फिर नहीं पाता और अपने बच्चों व पोते-पोतियों के साथ बाहर जाने में भी परेशानी होती है।
- इसी वजह से मैं यह नई दवा लेना चाहता था, ताकि शायद मेरी जिंदगी कुछ आसान हो सके।
कैसे काम करती है ये दवा?
डुपिलुमैब शरीर में मौजूद उन खास प्रोटीन को निशाना बनाती है, जो फेफड़ों में सूजन पैदा करते हैं। इससे सांस की नलियों की सूजन कम होती है, बलगम बनने की मात्रा घटती है और मरीज को सांस लेने में पहले की तुलना में ज्यादा आसानी महसूस होती है।
ब्रिटेन की स्वास्थ्य संस्था में दवाओं के मूल्यांकन की निदेशक हेलेन नाइट ने कहा कि डुपिलुमैब सीओपीडी मरीजों के लिए एक प्रभावी इलाज है। इसके अच्छे नतीजे सामने आए हैं। यह बीमारी के गंभीर दौर को कम करने के साथ-साथ फेफड़ों की कार्यक्षमता भी बेहतर बनाती है। इससे मरीजों की जिंदगी की गुणवत्ता बेहतर होगी और साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बोझ कम पड़ेगा।
शोध बताते हैं कि नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से बीमारी के गंभीर होने का खतरा कम किया जा सकता है। इसके बावजूद कई अध्ययनों में पाया गया है कि सीओपीडी का पता चलने के बाद अधिकांश मरीज औसतन करीब 10 साल तक ही जीवित रह पाते हैं।
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स्रोत:
Dupilumab for COPD with Type 2 Inflammation Indicated by Eosinophil Counts
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