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Eating Disorder: क्या आपका बच्चा भी खाने का नाम सुनते ही भागता है? कहीं ARFID बीमारी तो नहीं है इसका कारण

Tue, 30 Jun 2026 03:14 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 30 Jun 2026 03:14 PM IST
सार

एआरएफआईडी से पीड़ित बच्चे भोजन में बहुत कम रुचि दिखाते हैं या फिर उन्हें खाने से डर लगता है।  वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी में इस बीमारी के इलाज को लेकर बड़ी सफलता मिली है।

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Avoidant Restrictive Food Intake Disorder picky eating in children causes and treatment
खान पान से संबंधित विकारों का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI

क्या आपका बच्चा भी खाने का नाम सुनते ही भागता है? ये शिकायत अमूमन सभी माता पिता की होती है। कोई बच्चा सिर्फ चावल खाता है, कोई केवल जंक फूड्स पसंद करता है। अक्सर परिवार के लोग इसे जिद, नखरे या खराब आदत मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या हो अगर यह सिर्फ नखरा नहीं, बल्कि एक गंभीर मानसिक और खानपान से जुड़ा विकार हो?



अवायडेंट रेस्ट्रिक्टिव फूड इनटेक डिसऑर्डर (एआरएफआईडी) दुनियाभर में बच्चों के खानपान से जुड़ी एक ऐसी ही बीमारी है। इस स्थिति में बच्चा किसी खास स्वाद, रंग, गंध, बनावट या पहले हुए किसी बुरे अनुभव के कारण कई तरह के भोजन से इतना बचने लगता है।

खाना न खाने से बच्चों के शरीर को जरूरी पोषण ही नहीं मिल पाता। लिहाजा इसका असर बच्चे की लंबाई, वजन, दिमागी विकास, पढ़ाई, सामाजिक व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य तक पर दिखाई देने लगता है।

स्टैनफोर्ड मेडिसिन के वैज्ञानिकों की एक नई अध्ययन में इस बीमारी के इलाज को लेकर बड़ी सफलता मिली है।

Avoidant Restrictive Food Intake Disorder picky eating in children causes and treatment
एआरएफआईडी की समस्याएं - फोटो : Adobe stock

बच्चों में बढ़ती एआरएफआईडी की समस्या

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि एआरएफआईडी की समस्या वैसे तो किसी को भी हो सकती है, पर बच्चे इसका सबसे ज्यादा शिकार देखे जाते हैं। एआरएफआईडी के कारण बच्चों में खाने को लेकर डर, संवेदनशीलता या अरुचि होती है। यही वजह है कि कई बार माता-पिता लंबे समय तक समझ ही नहीं पाते कि मामला सामान्य नहीं है।
 

  • चिंता की बात यह है कि अगर समय रहते इस बीमारी की पहचान न हो तो शरीर में आयरन, विटामिन, प्रोटीन और दूसरे जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। 
  • कुछ बच्चों को सप्लीमेंट या ट्यूब फीडिंग तक की जरूरत पड़ सकती है।
  • कुछ अध्ययन बताते हैं कि आमतौर पर एआरएफआईडी के शिकार लोगों में इस बीमारी के साथ एंग्जाइटी ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर और अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी) जैसी स्थितियां भी मौजूद हो सकती हैं।
Avoidant Restrictive Food Intake Disorder picky eating in children causes and treatment
खान-पान संबंधी समस्याएं - फोटो : Adobe stock

एआरएफआईडी का हो सकता है इलाज

'जर्नल ऑफ द अमेरिकन एकेडमी ऑफ चाइल्ड एंड एडोलसेंट साइकियाट्री' में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन में  इस बीमारी के इलाज को लेकर जानकारी दी गई है। यह पहली बार है कि एआरएफआईडी जैसे खान-पान संबंधी विकार के उपचार का मूल्यांकन रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल के जरिए किया गया है। 
 

  • यह अध्ययन 6 से 12 वर्ष की आयु के 98 बच्चों पर किया गया।
  • अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता जेम्स लॉक ने कहा कि पहली बार इस बीमारी के उपचार का वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण किया गया है।
  • अब ऐसा वैज्ञानिक डेटा उपलब्ध है जिसकी मदद से खासकर उस आयु वर्ग के बच्चों का बेहतर इलाज किया जा सकता है, जिसमें यह समस्या सबसे अधिक देखी जाती है।
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बच्चों में खान-पान की समस्या - फोटो : Freepik.com

प्रभावित बच्चों को थेरेपी से मिल सकता है लाभ

इस रिसर्च में दो तरह की थेरेपी को टेस्ट किया गया। पहली- फैमिली-बेस्ड थेरेपी और दूसरी- इंडिविजुअल मोटिवेशनल थेरेपी। दोनों ही ट्रीटमेंट ऑनलाइन दिए गए और हर बच्चे को चार महीने तक 14-14 सेशन मिले।
 

  • फैमिली-बेस्ड थेरेपी में माता-पिता को मुख्य भूमिका दी गई। उन्हें सिखाया गया कि बच्चे की खाने की आदतों को कैसे धीरे-धीरे बदलें। पूरा परिवार (माता-पिता, भाई-बहन और थेरेपिस्ट) एक साथ सेशन में शामिल होते थे। इसमें यह भी समझाया जाता था कि बच्चा जानबूझकर ऐसा नहीं कर रहा, बल्कि यह एक मेडिकल कंडीशन है।
  • दूसरी तरफ, इंडिविजुअल थेरेपी में बच्चे को खुद मोटिवेट किया जाता था। इसमें बच्चों के साथ गेम्स, एक्टिविटी और कल्पना आधारित अभ्यास कराए जाते थे, जैसे कि काल्पनिक रेस्टोरेंट बनाना या अलग-अलग देशों के खाने के बारे में सोचना, ताकि उनकी खाने में रुचि बढ़े।


अध्ययन के नतीजे दिलचस्प रहे। जिन बच्चों ने फैमिली-बेस्ड थेरेपी ली, उनका वजन ज्यादा तेजी से बढ़ा और उनकी सेहत में सुधार दिखा। वहीं दोनों ही ग्रुप्स में एआरएफआईडी के लक्षणों में सुधार हुआ, यानी दोनों तरीके काफी हद तक कारगर पाए गए।

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खान-पान संबंधी समस्याएं - फोटो : Adobe stock

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अध्ययन में शामिल एक बच्ची ने बताया कि पहले वह बहुत सीमित चीजें ही खाती थी, लेकिन धीरे-धीरे उसने नए खाद्य पदार्थ आजमाने शुरू किए। पहले जिन चीजों से वह परहेज करती थी, जैसे अंडा, एवोकाडो, दही और फल, अब उन्हें पसंद करने लगी है।
 

  • विशेषज्ञों का कहना है कि एआरएफआईडी सिर्फ नखरे या चुन-चुनकर खाना खाने की आदत नहीं है, बल्कि यह एक वास्तविक मानसिक और शारीरिक समस्या है। अगर इसे नजरअंदाज किया जाए तो बच्चों में पोषण की कमी, कमजोरी, और विकास से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
  • कई बार बच्चे किसी डर या बुरे अनुभव के कारण भी खाना छोड़ देते हैं, जैसे किसी ने पहले कभी गला अटकने का अनुभव किया हो।
  • विशेषज्ञों के मुताबिक अच्छी बात यह है कि इसका इलाज संभव है। डॉक्टरों का कहना है कि सही थेरेपी और परिवार के सहयोग से बच्चों की खाने की आदतों में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।



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स्रोत:
Family vs Individual Treatment for Children With Avoidant/Restrictive Food Intake Disorder: A Randomized Clinical Trial


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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