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AI & Mental Health: एआई का ज्यादा इस्तेमाल कहीं आपको न बना दे डिप्रेशन का मरीज? विशेषज्ञों ने किया सावधान

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 29 Jan 2026 12:58 PM IST
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सार

Artificial Intelligence & Mental Health: क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो दिनभर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का इस्तेमाल करते रहते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक टीम ऐसे लोगों को सावधान करते हुए कहा है कि एआई पर बहुत ज्यादा निर्भरता मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाली हो सकती है, इससे डिप्रेशन होने का खतरा बढ़ जाता है।

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मेंटल हेल्थ पर एआई का असर - फोटो : Amarujala.com
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विस्तार
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और आधुनिक तकनीक ने हमारे जीवन को काफी आसान बना दिया है। ये स्मार्ट तरीके काम करने, चीजों को सीखने और रोजमर्रा की जिंदगी के कई कार्यों में मदद कर रहे हैं। बैंकिंग से लेकर शॉपिंग, ऑफिस के काम काज से लेकर पढ़ाई तक, सब बस एक क्लिक या वॉइस कमांड पर हो रहा है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई की मदद से भविष्य में मेडिकल सुविधाओं में काफी मदद मिलने की उम्मीद है, कई गंभीर रोगों के इलाज में भी एआई का अहम योगदान हो सकता है।

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10 जनवरी को अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया था कि किस तरह से डायबिटीज और पेट के कैंसर का पता लगाने में एआई की मदद ली जा रही है। इसने बीमारियों के निदान को काफी आसान बना दिया है। इसी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उन लोगों के लिए भी नई उम्मीद ला रहा है जो कई स्वास्थ्य समस्याओं से लंबे समय से परेशान रहे हैं।
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एआई को भविष्य के लिए बड़ी आशा के तौर पर देखा जा रहा है, पर इसका स्याह पक्ष भी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, एआई चैटबॉट का बहुत ज्यादा इस्तेमाल लोगों की मेंटल हेल्थ के लिए ठीक नहीं है।

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एआई का ज्यादा इस्तेमाल मेंटल हेल्थ के लिए ठीक नहीं - फोटो : Freepik.com

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ज्यादा इस्तेमाल नुकसानदायक

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक टीम लोगों को सावधान करते हुए कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बहुत ज्यादा इस्तेमाल मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला हो सकता है, इससे डिप्रेशन होने का खतरा बढ़ जाता है।

21,000 से अधिक प्रतिभागियों पर किए गए एक सर्वे में पाया गया है कि जो लोग एआई का अधिक इस्तेमाल करते हैं या फिर एआई पर निर्भर हो गए हैं उनमें स्ट्रेस-एंग्जाइटी से लेकर, चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन होने का जोखिम अधिक पाया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि वैसे तो एआई कुछ ही साल पहले अस्तित्व में आया है, लेकिन यह कई लोगों के जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है। चाहे खाना बनाने के बारे में पूछना हो, डेटा एनालिसिस करना हो या फिर बड़े काम चुटकियों में करना हो चैटजीपीटी और एआई के अन्य टूल इसमें मदद कर रहे हैं। 

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एंग्जाइटी और डिप्रेशन का खतरा - फोटो : Freepik.com

डिप्रेशन का बढ़ सकता है खतरा

जामा नेटवर्क जर्नल में प्रकाशित अध्ययन की रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने बताया कि दिलचस्प बात यह है कि एआई और मेंटल हेल्थ को होने वाली समस्याओं के नतीजे अलग-अलग उम्र के ग्रुप्स में अलग थे।

पहले से ही कुछ ऐसे सबूत मिले हैं कि चैटबॉट लोगों में भ्रम को बढ़ा सकता है और यहां तक कि सुसाइड के विचारों को भी बढ़ावा दे सकते हैं।  इन चिंताजनक संकेतों के बावजूद, बहुत कम एकेडमिक रिसर्च ने एआई के इस्तेमाल और मेंटल हेल्थ पर ध्यान दिया है। ये अध्ययन इस दिशा में सोचने पर विवश कर रही है।
 

  • विशेषज्ञ कहते हैं, जब हम खुद का दिमाग न लगाकर एआई की मदद लेते हैं तो इससे हमारी बौद्धिक क्षमता पर भी असर पड़ने का खतरा रहता है।
  • लंबे समय तक एआई पर निर्भरता हमारी रचनात्मकता और कार्यक्षमता को भी कम करने वाली हो सकती है।

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नुकसान भी जान लीजिए - फोटो : adobe stock

अध्ययन में क्या पता चला?

शोधकर्ताओं ने अप्रैल और मई 2025 में इकट्ठा किए गए सर्वे डेटा का अध्ययन किया। इसमें शामिल प्रतिभागियों की उम्र 18 साल या उससे ज्यादा थी।
 

  • सर्वे के लिए दिए गए प्रश्नावली में सभी प्रतिभागियों से पूछा गया कि आप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी या इसके प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कितनी बार करते हैं?
  • सैंपल में से 10.3% लोगों ने कहा कि वह हर दिन एआई का इस्तेमाल करते हैं, वहीं 5.3% ऐसे लोग थे रोजाना कई बार या घंटों तक इसका इस्तेमाल करते थे।
  • हर दिन इस्तेमाल करने वालों में से, लगभग आधे लोग काम के लिए, 11.4% स्कूल के लिए और 87.1% किसी अन्य व्यक्तिगत कारणों से इसका इस्तेमाल कर रहे थे।

अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने पाया कि रोजाना इस्तेमाल करने वाले लोगों में डिप्रेशन होने का खतरा अन्य लोगों की तुलना में 30% अधिक पाया गया। ऐसे लोगों में एंग्जायटी और चिड़चिड़ापन की दिक्कत भी अधिक पाई गई। 

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सावधानी से करें एआई का इस्तेमाल - फोटो : Freepik.com

एआई चैटबॉट का सावधानी से करें इस्तेमाल

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में साइकेट्री के प्रोफेसर रॉय एच. पर्लिस कहते हैं, फिलहाल यह पता लगाना मुश्किल है कि डिप्रेशन में बढ़ोतरी सीधे तौर पर एआई की वजह से है या जो लोग डिप्रेस्ड हैं, वे एआई का इस्तेमाल अधिक कर रहे हैं। मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम वाले लोग अपने लक्षणों के लिए मदद और सपोर्ट पाने के लिए इसका ज्यादा इस्तेमाल कर सकते हैं।

कई बार, अकेलापन दूर करने और नए दोस्त बनाने के लिए, बहुत से लोग इंटरनेट पर ज्यादा समय बिताते हैं। एआई असिस्टेंस जैसे विकल्प लोगों को एक साथी दे रहे हैं जिनसे वे बात कर पा रहे हैं। 

इसके अलावा विशेषज्ञों ने कहा, कई अन्य शोध में पाया गया है कि एआई चैटबॉट अनजाने में नकारात्मक सोच के पैटर्न को मजबूत कर सकते हैं। अगर कोई यूजर बार-बार डर, उदासी या खुद पर शक के बारे में बात करता है, तो चैटबॉट उन विषयों पर बिना किसी क्लिनिकली सही तरीके के बात करता रह सकता है, जिससे डिप्रेशन वाली सोच और गहरी हो सकती है।

ऐसे में एआई पर निर्भरता या इसके इस्तेमाल की सीमा न तय करना आपके मेंटल हेल्थ के लिए समस्याओं का कारण बन सकता है।


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स्रोत
Generative AI Use and Depressive Symptoms Among US Adults



अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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