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Buddhist Circuit: बोधगया से कुशीनगर तक, भारत की इन जगहों से करें बुद्ध की जीवन यात्रा

लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवानी अवस्थी Updated Thu, 29 Jan 2026 11:28 AM IST
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सार

Gautam Buddha Places: भारत सरकार द्वारा विकसित बौद्ध सर्किट पर्यटन के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना को भी पुनर्जीवित कर रहा है। यह सर्किट बताता है कि भारत की आत्मा आज भी बुद्ध की करुणा में सांस लेती है।

Buddhist Circuit In India Must Visit Gautam Buddha Places From Bodhgaya Sarnath To Kushinagar
बुद्ध की स्थली - फोटो : Adobe
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विस्तार
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Gautam Buddha Places: भारत की मिट्टी केवल सभ्यताओं की जननी नहीं रही, बल्कि करुणा, अहिंसा और आत्मबोध जैसे विचारों की भी जन्मस्थली रही है। गौतम बुद्ध का जीवन और उनकी शिक्षाएं इसी धरती से निकलीं और पूरी दुनिया में फैलीं। आज भी भारत का बौद्ध सर्किट उन स्थानों का जीवंत दस्तावेज है, जहां बुद्ध ने जन्म लिया, ज्ञान पाया, पहला उपदेश दिया और अंततः महापरिनिर्वाण को प्राप्त हुए। ये जगहें केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि चेतना की यात्रा हैं। 

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बौद्ध सर्किट की यात्रा सिखाती है कि शांति बाहर नहीं, भीतर खोजी जाती है। आज की भागदौड़ और तनावपूर्ण जीवनशैली में बुद्ध की शिक्षाएं मध्यम मार्ग, करुणा और सजगता पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। भारत सरकार द्वारा विकसित बौद्ध सर्किट पर्यटन के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना को भी पुनर्जीवित कर रहा है। यह सर्किट बताता है कि भारत की आत्मा आज भी बुद्ध की करुणा में सांस लेती है।
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गौतम बुद्ध से जुड़े पर्यटन स्थल


लुंबिनी (वर्तमान नेपाल सीमा के पास)

  • लुंबिनी वह पावन भूमि है, जहां राजकुमार सिद्धार्थ का जन्म हुआ।
  • अशोक स्तंभ और माया देवी मंदिर आज भी इस स्थान की ऐतिहासिक प्रामाणिकता को प्रमाणित करते हैं।
  • यहां की शांति स्वयं में ध्यान का अनुभव कराती है।


बोधगया (बिहार)

  • बोधगया वह स्थान है, जहां पीपल वृक्ष के नीचे तपस्या करते हुए सिद्धार्थ बुद्ध बने।
  • महाबोधि मंदिर आज भी विश्व के बौद्ध श्रद्धालुओं का सबसे बड़ा तीर्थ है।
  • यहां आकर यह एहसास होता है कि ज्ञान कोई रहस्य नहीं, बल्कि जागरूकता की अवस्था है।


सारनाथ (उत्तर प्रदेश)

  • ज्ञान प्राप्ति के बाद बुद्ध ने अपना पहला उपदेश सारनाथ में दिया, जिसे धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है।
  • यहीं से बौद्ध संघ की शुरुआत हुई। धमेख स्तूप आज भी उस ऐतिहासिक क्षण का मौन साक्षी है।


कुशीनगर (उत्तर प्रदेश)

  • कुशीनगर वह स्थल है, जहां बुद्ध ने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया।
  • यहां मृत्यु शोक का विषय नहीं, बल्कि मुक्ति का द्वार मानी जाती है।
  • लेटी हुई बुद्ध प्रतिमा जीवन की क्षणभंगुरता का गहन बोध कराती है।


राजगीर और नालंदा (बिहार)

  • राजगीर वह स्थान है, जहां बुद्ध ने अनेक उपदेश दिए और गृद्धकूट पर्वत पर गहन चिंतन किया।
  • वहीं नालंदा विश्वविद्यालय प्राचीन विश्व का सबसे बड़ा ज्ञान केंद्र रहा, जहां एशिया भर से विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते थे।


श्रावस्ती (उत्तर प्रदेश)

  • श्रावस्ती में बुद्ध ने अपने जीवन का अधिकांश समय वर्षावास में बिताया।
  • यहीं उन्होंने कई महत्वपूर्ण सूत्रों का उपदेश दिया।
  • जेतवन विहार आज भी उनकी करुणा और अनुशासन की स्मृति को जीवित रखता है।
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