दुनिया इस वक्त कोरोना के लगातार बढ़ते संक्रमण से जूझ रही है। इससे निजात पाने के लिए न तो अभी तक कोई वैक्सीन मिल पाई है और न ही दवाई। ऐसे में कोरोना के संक्रमण को रोकना दुनियाभर के देशों के लिए मुश्किल साबित होता दिख रहा है। हालांकि ये कोई पहला वायरस नहीं है जो इतनी तबाही मचा रहा है। दुनिया में और भी कई खतरनाक वायरस हैं जो समय-समय पर तबाही मचा चुके हैं। इन्ही में से एक है रोटावायरस। यह एक अत्याधिक संक्रामक विषाणु है जो बच्चों में गैस्ट्रोएंटेराइटिस (पेट का संक्रमण) होने का एक आम कारण है। आइए जानते हैं यह वायरस कितना खतरनाक है और इसका नाम 'रोटावायरस' ही क्यों रखा गया?
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रोटावायरस
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दरअसल, रोटावायरस डबल-स्ट्रैंडेड वाला आरएनए वायरस है, जो रियोविरिडे परिवार का है। इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से अगर इस वायरस को देखें तो इसकी आकृति एक पहिए की तरह दिखाई देती है। यही वजह है कि इसका नाम रोटावायरस रखा गया। रोटा एक लैटिन शब्द है, जिसका मतलब पहिया होता है।
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अब चूंकि रोटावायरस संक्रामक है, ऐसे में यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक सामान्य संपर्क से भी आसानी से फैल जाता है। यह वायरस मल में मौजूद होता है और हाथों के मुंह से संपर्क से और दूषित पानी या अन्य चीजों से फैलता है। इसके फैलने का तरीका कुछ-कुछ कोरोना वायरस की तरह ही है, जैसे कि यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छींकने से भी फैल सकता है। यह वायरस पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को ज्यादातर अपना शिकार बनाता है। ऐसा माना जाता है कि दुनिया में लगभग हर बच्चा पांच साल की उम्र से पहले कम से कम एक बार रोटावायरस से संक्रमित जरूर होता है।
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वैसे तो रोटावायरस बच्चों में आसानी से फैल जाता है, लेकिन उसके बाद उन बच्चों से उन लोगों तक भी यह वायरस पहुंच जाता है जो बच्चों के सबसे पास होते हैं। इसके लक्षण बिल्कुल सामान्य हैं, जैसे कि सर्दी-खांसी, बुखार, दस्त, उल्टी, पेट दर्द। दस्त और उल्टी की वजह से बच्चों के शरीर में पानी की भारी कमी हो जाती है, जिससे उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने तक की नौबत आ जाती है। वैसे इसके संक्रमण के लिए कोई विशेष इलाज नहीं है। बच्चों के शरीर में पानी की कमी को पूरा करके उनकी जान बचाई जा सकती है, लेकिन अगर समय पर इलाज उपलब्ध नहीं हुआ या देर से हुआ तो रोगी की मौत भी हो सकती है।
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दुनियाभर में रोटावायरस के कारण लगातार मौंतें हो रही हैं। हालांकि मौतों की संख्या अब थोड़ी कम हो गई है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों को देखें तो साल 2013 में रोटावायरस के संक्रमण के कारण लगभग 2,15,000 मौतें हुई थी, जिसमें ज्यादातर बच्चे ही थे।