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'मौत को भी दूर रखने वाला वो घिनौना' सुपरफूड, जिसे खाना बड़ा मुश्किल है

Sat, 08 Aug 2020 08:29 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Sat, 08 Aug 2020 08:29 AM IST
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Disgusting superfood of Japan Natto which is difficult to eat
जापान का सूपरफूड नट्टो - फोटो : Social media

65 साल की मेरी मां हर दिन एक खास डिश बनाती हैं जिसके बारे में कई लोग कहेंगे कि उसे देखना, सूंघना या चखना बहुत घिनौना है। 'नट्टो' एक पारंपरिक जापानी खाना है जो किण्वित सोयाबीन से बनाया जाता है। इसकी अमोनिया जैसी बदबू और बलगम जैसी चिपचिपाहट उन लोगों को भी पसंद नहीं आती जो इसे खाकर बड़े हुए हैं। 2017 में जापानी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनी निफ्टी ने एक सर्वे किया तो पता चलता कि सिर्फ 62 फीसदी लोग नट्टो को चाव से खाते हैं। यह भी पता चला कि 13 फीसदी लोग नट्टो को नापसंद करते हैं, भले ही इसे खाने के कितने भी फायदे हों। 



लंदन में कुकिंग स्कूल चलाने वाली जापानी शेफ युकी गोमी कहती हैं, 'नट्टो में बहुत बदबू होती है। आप इसकी गंध को नोटिस किए बिना नहीं रह सकते, लेकिन मैं इसे हमेशा अपने फ्रिज में रखती हूं।' गोमी के घर में यह सामान्य खाद्य सामग्री है, उसी तरह जैसे पश्चिमी देशों में चीज और योगर्ट घर-घर में मिलते हैं। 

Disgusting superfood of Japan Natto which is difficult to eat
जापान का सूपरफूड नट्टो - फोटो : Social media

जापान का सुपरफूड

जापान के लोग नट्टो को लंबे समय से सुपरफूड मानते रहे हैं। उनको लगता है कि इसे खाने से रक्त का प्रवाह बेहतर होता है और हृदयाघात का जोखिम कम होता है। जापान उन देशों में शामिल है जहां बुजुर्गों की आबादी सबसे ज्यादा है इसलिए यहां नट्टो की ये खूबियां बहुत मायने रखती हैं। मेरी मां अक्सर दावा करती हैं कि नट्टो उनके खून को 'सारा सारा' (सिल्की) रखता है। जापानी न्यूज साइट सोरान्यूज24 ने तो यहां तक दावा कर दिया कि 'रोजाना नट्टो का एक पैक खाने से मौत भी दूर रहती है।' 

तोहोकु यूनिवर्सिटी के ग्रैजुएट स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंस में पोषण और खाद्य विज्ञान के प्रोफेसर हितोशी शिराकावा के मुताबिक यह दावा सच हो सकता है। शिराकावा ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में छपे अध्ययन का हवाला देते हैं। टोक्यो के नेशनल कैंसर सेंटर के शोधकर्ताओं ने पाया कि पुरुष हो या स्त्री, जो भी नियमित रूप से नट्टो जैसा सोयाबीन से बना खाना खाते थे, उनके हृदय आघात या दिल का दौरा पड़ने से मरने का जोखिम 10 फीसदी कम हो गया। शिराकावा कहते हैं, 'किण्वित सोयाबीन से बने खाने में प्रसंस्करण के दौरान पोषक तत्वों के नुकसान की आशंका कम होती है। यही वजह है कि नट्टो खाने और हृदय रोगों का जोखिम घटने में सीधा संबंध देखा जाता है।'  

Disgusting superfood of Japan Natto which is difficult to eat
जापान का सूपरफूड नट्टो - फोटो : Social media

पोषक तत्वों की भरमार

नट्टो में भरपूर प्रोटीन, आयरन और फाइबर होने से रक्तचाप और वजन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह लोगों को जवान दिखने में भी मददगार हो सकता है। 40 से 50 ग्राम नट्टो खाने से जापान सरकार द्वारा तय विटामिन K की दैनिक जरूरत पूरी हो जाती है। इससे ऑस्टोपोरोसिस रोकने में मदद मिल सकती है। नट्टो में विटामिन B6 और विटामिन E की मात्रा भी भरपूर होती है जिससे त्वचा में झुर्रियां नहीं पड़तीं। 

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जापान का सूपरफूड नट्टो - फोटो : Social media

किण्वित सोयाबीन जापानी खानपान में सदियों से शामिल रहे हैं। तब इसके पोषण संबंधी फायदों के बारे में जानकारी भी नहीं थी। कैलिफोर्निया में क्लेरमॉन्ट के पोमोना कॉलेज में जापानी इतिहास के प्रोफेसर डॉक्टर सैमुएल यामाशिता का कहना है कि यह खाना नारा काल (710-784 ईस्वी) में चीन से जापान आया था। ऐतिहासिक रिकॉर्ड से पता चलता है कि नट्टो कामाकुरा काल (1192-1333 ईस्वी) में अभिजात वर्ग और योद्धाओं, दोनों में एक साथ लोकप्रिय हुआ। 

मूरोमची काल (1338-1573 ईस्वी) में बौद्ध धर्म से प्रेरित शाकाहारी व्यंजनों में टोफू के साथ यह अहम खाना बन गया। इदो काल (1603-1867 ईस्वी) में नट्टो जापानी खानपान की मुख्य सामग्री बन गया। इसे व्यंजनों की किताबों में शामिल किया गया और घर-घर में इसे तैयार किया जाने लगा। 

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जापान का सूपरफूड नट्टो - फोटो : Pixabay

कैसे बनता है नट्टो?

पहले नट्टो बनाने के लिए सोयाबीन को पानी में भिगोया जाता था, उबाला जाता था और फिर इसमें बैसिलस सबटिलिस बैक्टीरिया मिलाया जाता था। खर-पतवार में लपेटकर इसे चार दिनों तक किण्वित होने के लिए छोड़ दिया जाता था। यह अवधि मौसम और तापमान पर निर्भर करती थी। आजकल नट्टो बनाने में इतनी मेहनत नहीं करनी पड़ती। पूरे जापान में किराने की दुकानों और सुपरमार्केट में यह आसानी से उपलब्ध है। 

नट्टो का एक सेट, जिसमें आम तौर पर पॉलीस्टीरिन फोम के तीन छोटे कंटेनर होते हैं, उसकी कीमत 100 से 300 येन (0.75 पाउंड से 2.25 पाउंड) होती है। हर कंटेनर में एक बार खाने जितना नट्टो होता है। उसके साथ सोया सॉस का एक छोटा पैकेट और तीखी चटनी (कराशी) होती है। 

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