FSSAI Rating: भारत में 28.6% लोग मोटापे की चपेट में, 11.4% को मधुमेह; 15.3% आबादी प्री-डायबिटीज की स्थिति में
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डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों के पैकेट पर सामने की तरफ पोषक तत्वों की जानकारी स्पष्ट तरीके से दिए जाने को लेकर शीर्ष कोर्ट के नए आदेश ने एफएसएसएआई के सामने विकल्प बेहद सीमित कर दिए हैं।
दरअसल, एफएसएसएआई अभी जिस स्टार रेटिंग मॉडल की वकालत कर रहा है, उसे आम भारतीयों के लिए समझना आसान नहीं है। इस बारे में किए गए एक अध्ययन में भी इसकी पुष्टि हुई है। फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग पर हुए अध्ययन में 2,869 लोगों को अलग-अलग तरह के लेबल दिखाए गए। ज्यादा चीनी, सोडियम और सैचुरेटेड फैट वाले उत्पादों की पहचान में चेतावनी वाले लेबल को 60.8 फीसदी लोगों ने सही तरीके से समझा जबकि स्टार रेटिंग वाले मॉडल में यह आंकड़ा करीब 45 फीसदी रहा। यानी पैकेट पर सीधी चेतावनी लोगों को पैकेट में बंद सामग्री की बेहतर समझ देती है यह साबित हो गया है। दुनिया के कई देश भी सीधी चेतावनी वाला मॉडल अपना रहे हैं, ताकि लोगों में अस्वास्थ्यकर खानों को लेकर जागरूकता आए।
क्या है स्टार रेटिंग मॉडल
एफएसएसएआई ने पोषण रेटिंग मॉडल में खाद्य पदार्थ को आधे से पांच स्टार तक रेटिंग देने का प्रस्ताव दिया है। इसमें सिर्फ चीनी, नमक और संतृप्त फैट ही नहीं, बल्कि प्रोटीन, फाइबर और दूसरे पोषक तत्वों को शामिल किया जाता है। किसी उत्पाद में अन्य पोषक तत्व ज्यादा हों तो चीनी-नमक-वसा अधिक होने पर भी उसकी स्टार रेटिंग अधिक हो सकती है। यही विशेषज्ञों की सबसे बड़ी आपत्ति है। उनका कहना है कि किसी उत्पाद को कुल मिलाकर ज्यादा स्टार मिलने से ग्राहक को यह पता नहीं चलता कि उसमें चीनी या नमक की मात्रा बहुत ज्यादा है।
एक चौथाई से अधिक आबादी हो चुकी है मोटी...
खानपान की गलत आदतों के कारण देश में करीब 28.6 फीसदी लोग सामान्य से ज्यादा वजन या कहें मोटापे की स्थिति में हैं। देश की करीब 11.4 फीसदी आबादी यानी करीब 10.1 करोड़ लोग डायबिटीज से जूझ रहे हैं। 20 साल पहले आंकड़ा 7 फीसदी था। अभी 15.3 फीसदी आबादी प्री-डायबिटीज की स्थिति में है।
भारत में अभी बहस...
पीआईएल दायर करने वाली संस्था ‘3 एस एंड अवर हेल्थ’ का कहना है कि तमाम देशों ने अपनी जरूरत के हिसाब से पैकेट पर जानकारी के मॉडल अपनाए हैं। कहीं सीधी चेतावनी है, कहीं लाल-पीला-हरा रंग, तो कहीं दूसरे तरह के पोषण संकेत। भारत अब भी इसे लेकर बहस की स्थिति में ही उलझा है।
- एनएपीआई के संयोजक डॉ. अरुण गुप्ता ने कहा कि कोर्ट ने जनस्वास्थ्य को मुनाफे से ऊपर रखा है। उनके मुताबिक चेतावनी लेबल कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के अधिकार से जुड़ा मुद्दा है और एफ़एसएसएआई को कोर्ट के निर्देश का बिना देरी पालन करना चाहिए।
पंजाब में रोज दो से ज्यादा सैंपल फेल
पंजाब में बच्चों के खाने, हेल्थ ड्रिंक्स और फूड सप्लीमेंट्स की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। वर्ष 2024-25 में लिए गए 10,804 सैंपलों में 748 फेल पाए गए। यानी रोजाना दो से अधिक सैंपल जांच में मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें 108 सैंपल असुरक्षित मिले जो खाने योग्य नहीं थे। डिब्बों और पैकेट पर दी गई जानकारी और अंदर मौजूद उत्पाद में अंतर भी सामने आया। यह बात हाल में लोकसभा में पेश संसद की उपभोक्ता मामलों की स्थायी समिति की रिपोर्ट में सामने आई है।
- हरियाणा में 500 तो चंडीगढ़ में 65 सैंपल फेल: हरियाणा में 2024-25 के दौरान बच्चों के खाने, हेल्थ ड्रिंक्स और फूड सप्लीमेंट्स के 4,763 सैंपल लिए गए। इनमें 500 फेल और 89 असुरक्षित मिले। चंडीगढ़ में 1,906 सैंपलों की जांच हुई जिनमें 65 फेल पाए गए। हिमाचल में 4,353 सैंपलों में 293 फेल और 36 असुरक्षित मिले। जम्मू-कश्मीर में 23,037 में 651 फेल और 24 असुरक्षित पाए गए।