Spiritual Places in India: एकांत की तलाश? भारत की ये आध्यात्मिक जगहें शोर से दूर हैं
Spiritual Places in India: शांति और एकांत की तलाश में हैं तो भारत के ऐसे आध्यात्मिक स्थलों की सैर पर जाएं, जहां भीड़ नहीं, बल्कि आत्मा को सुकून मिले।
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Spiritual Places in India: शहरों के शोर से सिर्फ कान नहीं, मन पर भी असर पड़ता है। यहां लगातार मोबाइल की घंटी, ट्रैफिक का शोर, सोशल मीडिया का दिखावा समेत सबकुछ है, बस शांति नहीं है। ऐसे में लोग एकांत की तलाश में निकलते हैं। आज के समय में एकांत जरूरत बन चुका है।
एकांत की तलाश में लोग मंदिरों में जाते हैं। हालांकि अब अधिकतर मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ इतनी बढ़ चुकी है कि यहां शांति और एकांत वातावरण नहीं मिलता है। भारत की आत्मा मंदिरों की भीड़ में नहीं, बल्कि उन शांत, साधना-भरी जगहों में सांस लेती है। अगर आप भीड़ से दूर, शांति की तलाश में किसी ऐसे आध्यात्मिक स्थल की यात्रा के लिए जाएं, जहां का एकांत आपके दिल को सुकून दे। अगर आप सच में खुद से मिलना चाहते हैं, तो ये आध्यात्मिक स्थल आपके लिए हैं।
अरुणाचल प्रदेश, तवांग मठ
बर्फीली पहाड़ियों के बीच स्थित तवांग मठ सिर्फ बौद्ध स्थल नहीं, बल्कि शांत स्थल है। यहां हवा की आवाज भी धीमी आती है। इस स्थल पर पर्यटक कम आते हैं और एकांत की तलाश में साधक ज़्यादा आते हैं।
- क्यों जाएं: ध्यान, आत्मचिंतन, प्राकृतिक एकांत
- सही समय: मार्च से अक्टूबर
तमिलनाडु में रामेश्वरम के शांत तट
रामेश्वरम के मुख्य मंदिर से दूर, समुद्र किनारे फैला एकांत मन को स्थिर करता है। सूर्योदय के समय यहाँ बैठना अपने भीतर उतरने जैसा है।
- क्यों जाएं: शिव भक्ति, मौन साधना
- सही समय: अक्टूबर से फरवरी
उत्तराखंड का माणा गांव, बद्रीनाथ से आगे
भारत का आखिरी गांव माणा है, जहाँ रास्ता खत्म होता है और साधना शुरू होती है। भीड़ बद्रीनाथ तक ही रहती है, उसके आगे शांति है।
- क्यों जाएं: वेदों की भूमि, हिमालय का सन्नाटा
- सही समय: मई से सितंबर
केरल, वागामोन
ना हिल स्टेशन की भीड़, ना बाजारों का शोर। वागामोन उन लोगों के लिए है जो यात्रा में फोटो नहीं, अनुभव ढूंढते हैं।
- क्यों जाएं: प्रकृति ध्यान, आत्मिक शांति
- सही समय: सितंबर से मार्च
महाराष्ट्र, भंडारदरा
साईं नगरी शिरडी से दूर, भंडारदरा आज भी पर्यटन की होड़ से बचा हुआ है। यहां झील, पहाड़ और मंदिर तीनों साथ में दिखते हैं।
- क्यों जाएं: भक्ति और प्रकृति का संतुलन
- सही समय: अगस्त से फरवरी