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Nomophobia: स्मार्टफोन से दूर रहने के बाद भी दिमाग में रहता है मोबाइल फोन, कहीं आपको नोमोफोबिया तो नहीं?

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Wed, 14 Jan 2026 06:20 PM IST
सार

Nomophobia Kya Hota Hai: आज के डिजिटल युग में बहुत से लोग अपनी दिनचर्या का ज्यादातर समय किसी न किसी रूप में स्क्रीन के बिताते हैं। कई लोगों को स्मार्टफोन की लत इस कदर होती है, कि वो फोन से दूर रहने के बाद भी उनका दिमाग फोन के नोटिफिकेशन पर ही टिका रहता है। इसलिए आइए इस लेख में इसी से बचने के उपाय के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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Nomophobia Explained: Anxiety of Staying Away From Smartphone Digital Addiction Impact on Health
मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik

आज के डिजिटल युग में, क्या आपने कभी गौर किया है कि फोन पास न होने पर आपको बेचैनी होने लगती है? या बैटरी खत्म होने के डर से आप पसीने-पसीने हो जाते हैं? अगर हां तो आप 'नोमोफोबिया' के शिकार हो सकते हैं। यह एक ऐसी मनोवैज्ञानिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति मोबाइल फोन के बिना रहने की कल्पना मात्र से ही घबराने लगता है। 



स्मार्टफोन अब सिर्फ संचार का साधन नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व का हिस्सा बन गया है। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि फोन दूर होने पर भी व्यक्ति के दिमाग में नोटिफिकेशन और मैसेज के ख्याल चलते रहते हैं। इसे 'फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम' भी कहते हैं, जहां हमें लगता है कि फोन बज रहा है, जबकि असल में ऐसा नहीं होता। यह समस्या हमारी एकाग्रता, नींद और मानसिक शांति को दीमक की तरह चाट रही है। यह महज एक आदत नहीं, बल्कि एक गंभीर डिजिटल बीमारी है जिसे समय रहते पहचानकर इसे ठीक करना बहुत जरूरी है।

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Nomophobia Explained: Anxiety of Staying Away From Smartphone Digital Addiction Impact on Health
मोबाइल फोन से दूर रहने पर भी परेशान रहना - फोटो : Adobe Stock

क्या है नोमोफोबिया और इसके लक्षण?
नोमोफोबिया के लक्षण धीरे-धीरे हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन जाते हैं-

  • बिना किसी कारण के हर 5 मिनट में फोन की स्क्रीन को अनलॉक करके देखना।
  • मोबाइल फोन घर पर भूल जाने या सिग्नल न मिलने पर पैनिक अटैक जैसा महसूस होना।
  • फोन की बैटरी 20% से नीचे जाते ही घबराहट और असुरक्षा की भावना पैदा होना।
  • आधी रात को आंख खुलने पर सबसे पहले नोटिफिकेशन चेक करने की लत।

 

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मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : Adobe stock

आखिर क्यों हो रहा है यह डिजिटल डर?
इस लत के पीछे कई सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारण जिम्मेदार हैं-

  • सोशल मीडिया पर मिलने वाले 'लाइक' और 'कमेंट' मस्तिष्क में डोपामाइन रिलीज करते हैं, जो हमें फोन का गुलाम बना देता है।
  • लोगों को लगता है कि यदि वे ऑनलाइन नहीं रहे, तो वे दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों या इवेंट्स से कट जाएंगे।
  • लोग अपनी असल जिंदगी से ज्यादा अपनी डिजिटल छवि को लेकर चिंतित रहने लगे हैं।


 

Nomophobia Explained: Anxiety of Staying Away From Smartphone Digital Addiction Impact on Health
'फबिंग' (Phubbing) - फोटो : Freepik

भविष्य पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
अगर इस फोबिया को नियंत्रित नहीं किया गया, तो इसके परिणाम घातक हो सकते हैं-

  • लंबे समय में यह एंग्जायटी, डिप्रेशन और गंभीर एकाग्रता की कमी का कारण बन सकता है।
  • 'फबिंग' (Phubbing) (फोन के कारण सामने बैठे व्यक्ति को नजरअंदाज करना) से सामाजिक और पारिवारिक रिश्ते टूटने लगते हैं।
  • गर्दन में दर्द, आंखों की रोशनी कम होना और इन्सोम्नियां की समस्या विकराल रूप ले लेगी।
  • हर समय सूचनाओं से घिरे रहने के कारण मस्तिष्क की मौलिक सोचने की क्षमता खत्म हो जाती है।

 

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मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik
कैसे पाएं इस फोबिया से मुक्ति?
नोमोफोबिया से लड़ना असंभव नहीं है, बस आपको छोटे कदम उठाने होंगे। दिन में कुछ घंटों के लिए 'नो फोन जोन' बनाएं और रात को सोने से एक घंटा पहले फोन को खुद से दूर कर दें। असल दुनिया के रिश्तों और हॉबीज पर ध्यान देना शुरू करें। ध्यान रखें, स्मार्टफोन आपकी सुविधा के लिए बनाया गया है, आपको उसका गुलाम बनाने के लिए नहीं। अपनी डिजिटल लाइफ और असल जिंदगी के बीच एक मजबूत संतुलन बनाना ही आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

स्रोत और संदर्भ
NOMOPHOBIA: NO MObile PHone PhoBIA


नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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