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Nipah Alert: पश्चिम बंगाल में तीन और लोग हुए संक्रमण का शिकार, 10 प्वाइंट्स में निपाह के बारे में जानिए सबकुछ

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 15 Jan 2026 01:17 PM IST
सार

  • पश्चिम बंगाल में बढ़ते निपाह को लेकर डॉक्टर्स ने अलर्ट किया है।
  •  निपाह वायरस के संक्रमण की दर और इससे मृत्यु का खतरा दोनों ही अधिक रहता है। संक्रमण का शिकार रहे 40-70% मरीजों की मौत हो जाती है। 

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पश्चिम बंगाल में निपाह के मामले - फोटो : Amarujala.com

पश्चिम बंगाल में इन दिनों निपाह वायरस का असर देखा जा रहा है। 13 जनवरी को अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बंगाल में दो स्वास्थ्य कर्मियों में संक्रमण पाए जाने की जानकारी दी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तीन अन्य लोगों को निपाह से संक्रमित पाया गया है। इसके साथ अब पश्चिम बंगाल में संक्रमितों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है।



पहले जिन दो स्वास्थ्य कर्मियों को संक्रमित पाया गया था, उनका अब भी आईसीयू में इलाज चल रहा है। दोनों की हालत गंभीर बताई जा रही है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने इन मरीजों के संपर्क में आए करीब 120 लोगों को ट्रैक किया है। इन्हें होम आइसोलेशन में रहने की सलाह दी गई है। 

पश्चिम बंगाल में बढ़ती इस संक्रामक बीमारी ने डॉक्टर्स को अलर्ट कर दिया है। गौरतलब है कि निपाह वायरस के संक्रमण की दर और इससे मृत्यु का खतरा दोनों ही अधिक रहता है। संक्रमण का शिकार रहे 40-70% मरीजों की मौत हो जाती है। इन जोखिमों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय लोगों को सावधानी बरतते रहने की सलाह दी गई है।

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निपाह वायरस को लेकर झारखंड अलर्ट - फोटो : अमर उजाला

क्या कहते हैं स्वास्थ्य अधिकारी?

मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से, एक अधिकारी ने कहा, संक्रमण के स्रोत का पता लगाना मुश्किल है। यह एक से दूसरे व्यक्ति में फैलने वाला ट्रांसमिशन हो सकता है या फिर संभव है कि संक्रमण दूषित फलों के माध्यम से फैला हो। मरीजों की राज्य के बाहर की कोई ट्रैवेल हिस्ट्री भी नहीं है।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि राज्य के कई प्रवासी मजदूर इस समय के आसपास घर लौटते हैं, तो इससे ट्रांसमिशन का खतरा हो सकता है, फिलहाल ये बीमारी फैल कैसे रही है इसका पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

वहीं, स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप ने मीडिया को बताया कि हम सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं और प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं। निपाह को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से मौतों के बाद झारखंड स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। स्वास्थ्य मंत्री ने सभी जिलों को सख्त निगरानी, त्वरित रिपोर्टिंग और जन-जागरूकता के निर्देश दिए। फिलहाल यहां कोई मरीज नहीं मिला है।
 

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निपाह वायरस और इसके जोखिम - फोटो : Adobe Stock Photos

कई मामलों में खतरनाक है निपाह का संक्रमण

निपाह वायरस के संक्रमण को कई अध्ययनों में कोरोनावायरस से अधिक खतरनाक बताया जाता रहा है। इससे संक्रमितों की हालत तेजी से बिगड़ती जाती है। गंभीर स्थितियों में आईसीयू और वेंटिलेटर की भी जरूरत हो सकती है। निपाह का संक्रमण फेफड़े और ब्रेन को भी अटैक करता है। कुछ मरीजों में संक्रमण के एन्सेफलाइटिस होने के मामले भी देखे गए हैं।

आइए 10 प्वाइटंस में निपाह वायरस से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें जान लेते हैं।

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पश्चिम बंगाल में बढ़े निपाह के मरीज - फोटो : Adobe Stock Photos

1. निपाह वायरस एक गंभीर और जानलेवा जूनोटिक रोग है, जिसका मतलब है कि ये जानवरों से इंसानों में फैलता है। मुख्य रूप से ये चमगादड़ों में पाया जाता है और जब इन चमगादड़ों द्वारा दूषित फल इंसान खा लेते हैं तो इसे संक्रमण का खतरा हो सकता है। चमगादड़ों के लार और मूत्र से दूषित खाद्य पदार्थ भी संक्रमण का कारण हो सकते हैं।


2. निपाह वायरस इसलिए ज्यादा खतरनाक माना जाता है क्योंकि यह तेजी से शरीर में फैलकर दिमाग और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। कई मामलों में यह संक्रमण बहुत जल्दी गंभीर रूप ले लेता है, जिससे मरीज की जान को खतरा हो सकता है।


3. निपाह वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे होते हैं, जिससे इसे पहचान में देरी हो सकती है। संक्रमितों को तेज बुखार, सिरदर्द, थकान, मांसपेशियों में दर्द और उल्टी की शिकायत हो सकती है। शुरुआत में हल्के लगने वाले ये लक्षण तेजी से गंभीर होते जाते हैं।

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निपाह के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com


4. निपाह वायरस का असर फेफड़ों पर भी पड़ सकता है। संक्रमित व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत, तेज खांसी और सीने में जकड़न महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में निमोनिया जैसी स्थिति बन जाती है, जिससे ऑक्सीजन लेवल गिरने लगता है। इसके साथ ही मरीज को चक्कर आना, भ्रम की स्थिति और बोलने में परेशानी भी हो सकती है।


5. निपाह वायरस की सबसे गंभीर जटिलता एन्सेफेलाइटिस यानी मस्तिष्क में सूजन होना है। जब वायरस दिमाग तक पहुंचता है, तो इससे मरीज को दौरे पड़ सकते हैं। इसके अलावा  भ्रम, व्यवहार में बदलाव और याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई मामलों में मरीज कोमा की हालत में भी चला जाता है। 


6. मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कुछ मरीजों में संक्रमण ठीक होने के बाद भी लंबे समय तक न्यूरोलॉजिकल समस्याएं बनी रहती हैं। जिन स्थानों पर इसका जोखिम रहता है वहां लोगों को बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। पिछले साल ये वायरस केरल में भी प्रकोप मचा चुका है।

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