Yoga Reduce Anxiety: क्या योग सच में एंग्जाइटी को जड़ से मिटा सकता है?
Anxiety Reduce Yoga : ध्यान रखें कि योग सुरक्षित है और मन को शांत करने में असरदार है लेकिन गंभीर स्थिति में केवल योग से तनाव व मानसिक समस्या का इलाज संभव नहीं है।
विस्तार
एंग्जाइटी या चिंता एक आम मानसिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें लोग अत्यधिक, लगातार तनाव, बेचैनी और डर महसूस करते हैं। आज के तनावपूर्ण जीवन में लोग वैकल्पिक तरीकों की तरफ भी देख रहे हैं, जिनमें से एक है योग। लेकिन क्या योग वास्तव में एंग्जाइटी को कम कर सकता है?
योग एक प्राचीन भारतीय अभ्यास है, जिसमें आसन (शारीरिक मुद्राएं), प्राणायाम (श्वास नियंत्रण) और ध्यान व मेडिटेशन शामिल हैं। यह शरीर-मन-भावनाओं को संतुलित करने का एक प्रभावी तरीका माना जाता है। चलिए वैज्ञानिक शोध और अध्ययन के आधार पर इसे समझते हैं।
योग एंग्जाइटी लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है
हाल के शोध बताते हैं कि योग से एंग्जाइटी के लक्षणों में कमी आती है। अध्ययन बताते हैं कि योग अभ्यास ने एंग्जाइटी स्तर को बेहतर किया। अन्य शोधों में भी पाया गया कि नियमित योग करने वाले लोगों में तनाव व चिंता के स्कोर में महत्वपूर्ण कमी देखी गई। योग आम लोगों की चिंता के लक्षणों पर लाभदायक प्रभाव दिखाता है, लेकिन यह साबित करना कठिन है कि यह डायग्नोस्टिक एंग्जाइटी डिसऑर्डर जैसे GAD में मुख्य इलाज के रूप में कितना लाभदायक है।
कैसे काम कर सकता है योग?
- नर्वस सिस्टम पर असर
योग के अभ्यास से सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम यानी लड़ाई या भागो प्रतिक्रिया शांत होता है और पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम यानी आराम सक्रिय होता है, जिसकी वजह से तनाव-हार्मोन कम हो सकते हैं।
- श्वास नियंत्रण
धीमी, गहरी सांसें करने से हार्मोनल संतुलन सुधरता है और मन ज्यादा शांत होता है।
- ध्यान
ध्यान अभ्यास से व्यक्ति अपने विचारों को अवलोकित करना सीखता है और अनावश्यक चिंता पर नियंत्रण पाता है।
नोट- ध्यान रखें कि योग सुरक्षित है और मन को शांत करने में असरदार है लेकिन गंभीर स्थिति में केवल योग से तनाव व मानसिक समस्या का इलाज संभव नहीं है।
रोज़ाना अभ्यास में शामिल करें
तनाव व चिंता को कम करने के लिए रोजाना के अभ्यास में कुछ प्राणायाम और आसन को शामिल करें। जैसे,
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प्राणायाम: अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, शीशुम
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ध्यान: 10-15 मिनट माइंडफुल मेडिटेशन
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शारीरिक योगा फ़्लो: हठ योग, विन्यसा योग
टिप: अगर एंग्जाइटी बहुत गंभीर हो, तो योग के साथ काउंसलिंग, थेरपी या डाक्टरी सलाह अनिवार्य है।