देशभर में होली की धूम देखी जा रही है। मिठाइयों-पकवान, धूमधाम-आनंद वाला ये त्योहार कई मामलों में खास होता है। होली में लोग एक दूसरे से गले मिलते हैं, पकवान खिलाते हैं और रंग-गुलाल लगाकर त्योहार की खुशियां मनाते हैं।
Holi Health Alert: रंग-गुलाल की मस्ती कहीं अस्थमा अटैक का न बढ़ा दे खतरा? सांस के मरीज किन बातों का रखें ध्यान
Holi me Asthma Attack Se Kaise Bache: सांस की बीमारी-अस्थमा के मरीजों को होली के उत्सव के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है। रंगों में लेड-मेटल और रसायन हो सकते हैं जो श्वास नली में दिक्कतें बढ़ा देते हैं। आइए जानते हैं कि अस्थमा अटैक से कैसे बचा जा सकता है?
होली में बढ़ सकती हैं सांस की दिक्कतें
होली के दौरान अस्थमा अटैक के खतरे को कम करने, सांस की समस्याओं से बचे रहने के लिए श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ रितु आचार्य ने कुछ जरूर सलाह दी हैं जिसके बारे में सभी लोगों को जानना जरूरी है।
डॉक्टर कहती हैं, हवा में उड़ते सूखे रंग, कैमिकल युक्त गुलाल, धूल और धुआं सांस के मरीजों के लिए परेशानी बढ़ा सकते हैं। खासतौर पर अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जिक राइनाइटिस या क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) से पीड़ित मरीजों को इसके कारण सांस फूलने, सीने में जकड़न और अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ सकता है।
रंग-गुलाल की सावधानी से करें इस्तेमाल
जिन लोगों को पहले से सांस की बीमारी है उन्हें होली के उत्सव के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है।
- सूखे गुलाल-रंग हवा की गुणवत्ता को खराब कर देते हैं, जिससे सांस की दिक्कत बढ़ सकती है।
- आमतौर पर बाजार में बिकने वाले रंगों में लेड-मेटल और रसायन हो सकते हैं जो श्वास नली में दिक्कतें बढ़ा देते हैं।
- महीन कण सांस के रास्ते फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं और वायुमार्ग में सूजन और संकुचन पैदा कर सकता है।
- इससे सीटी जैसी आवाज, खांसी और सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।
होली के दौरान क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
डॉक्टर कहते हैं, ड्राई कलर और सिंथेटिक गुलाल के संपर्क में आने से श्वसन नलिकाओं में सूजन की समस्या बढ़ सकती हैं, जिससे घरघराहट, खांसी और सांस फूलने की समस्या हो सकती है। अस्थमा रोगियों को होली से पहले अपनी दवाएं नियमित रूप से लेनी चाहिए और डॉक्टर द्वारा बताए गए इनहेलर को साथ रखना चाहिए।
डॉ. रितु कहती हैं, अस्थमा मरीजों के लिए बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है। सूखे रंगों और केमिकल वाले गुलाल से दूरी बनाना चाहिए, क्योंकि ये कण फेफड़ों में जाकर एलर्जिक रिएक्शन बढ़ा सकते हैं।
- भीड़भाड़ और धूलभरे माहौल से बचना बेहतर है। अगर बाहर जाना जरूरी हो तो मास्क पहनकर जाएं।
- घर लौटकर तुरंत स्नान करें और कपड़े बदलें, ताकि त्वचा और श्वसन मार्ग पर जमे कण हट जाएं।
- पर्याप्त पानी पिएं ताकि डिहाइड्रेशन न होने पाए। इस वजह से भी सांस की दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
अस्थमा अटैक होने पर तुरंत क्या करें?
होली के दौरान अगर किसी को अस्थमा अटैक हो जाए या सांस लेने में तकलीफ हो रही हो तो तुरंत उपचार उपलब्ध कराना जरूरी है।
- अस्थमा अटैक के दौरान मरीजों को अचानक सांस लेने में कठिनाई, सीने में जकड़न, तेज घरघराहट और लगातार खांसी होती है, ऐसे लक्षणों की पहचान करें।
- सांस की दिक्कतों में इनहेलर का प्रयोग करें जिससे दिक्कतों को बढ़ने से रोका जा सके।
- मरीज को सीधा बैठाकर रखें, टाइट कपड़े ढीले करें और ताजी हवा वाली जगह पर ले जाएं।
- यदि इनहेलर लेने के बाद भी 10–15 मिनट में राहत न मिले, बोलने में दिक्कत हो या होंठ नीले पड़ रहे हों तो तुरंत डॉक्टर के पास लें जाएं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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