मौसम में बदलाव के साथ नाक बहने-छींक आने, आंखों में जलन, त्वचा पर रैशेज और सांस में तकलीफ जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लग जाती हैं। दिल्ली-एनसीआर जैसे इलाकों में जहां वायु प्रदूषण का स्तर काफी अधिक रहता है, एलर्जी की दिक्कतें यहां और भी ज्यादा देखी जाती हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र के लोगों में एलर्जी के कारण होने वाली समस्याओं का खतरा रहता है।
Alert: एलर्जी से राहत के नाम पर सेहत से खिलवाड़, दिल्ली-एनसीआर वाले हो जाएं सावधान; हो सकते हैं गंभीर खतरे
एलर्जी से राहत पाने के लिए लोग अक्सर बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से ओवर द काउंटर (ओटीसी) दवाएं खरीद लेते हैं। ये दवाएं अस्थायी राहत तो देती हैं, लेकिन लंबे समय तक या गलत तरीके से उपयोग करने पर इनके गंभीर दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। कहीं आप भी तो इस तरह की दवाएं बहुत ज्यादा नहीं ले रहे हैं?
एंटी-एलर्जिक दवाओं के हो सकते हैं गंभीर साइड-इफेक्ट्स
दिल्ली-एनसीआर में फार्मास्यूटिकल ट्रेड डेटा के आधार पर पाया गया कि साल 2026 की शुरुआत तक एंटी-एलर्जिक दवाओं के मार्केट में एंटीहिस्टामाइन के कॉम्बिनेशन वाली दवाओं का दबदबा बहुत ज्यादा रहा है। ये दवाएं आमतौर पर हे फीवर, राइनाइटिस और स्किन से जुड़ी एलर्जी को ठीक करने के लिए इस्तेमाल में लाई जाती रही हैं। बिना डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन के आसानी से इस तरह की दवाएं ओवर द काउंटर मिल भी जाती हैं।
- हालांकि अध्ययनों पर गौर किया जाए तो पता चलता है कि इन दवाओं के कारण दीर्घकालिक तौर पर कई तरह के गंभीर दुष्प्रभावों का खतरा हो सकता है।
- इन दवाओं के साइड-इफेक्ट के कारण पाचन में गड़बड़ी और दस्त से लेकर हृदय गति में अनियमितता से संबंधित दिक्कतों का खतरा हो सकता है।
कैसे काम करती हैं ये दवाएं?
अमर उजाला से बातचीत में पुणे स्थित एक निजी अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर उत्कर्ष सचदेवा बताते हैं, बार-बार एंटी-एलर्जिक और एंटीहिस्टामाइन दवाएं लेने से सेहत पर कई तरह के दुष्प्रभाव का खतरा हो सकता है, जिसपर अक्सर लोगों का ध्यान नहीं जाता है।
- एंटीहिस्टामाइन दवाएं हिस्टामाइन रिसेप्टर्स को ब्लॉक करने का काम करती हैं।
- हिस्टामाइन एक प्रकार का केमिकल है जिसे आपका इम्यून सिस्टम अलग-अलग सेल्स के बीच मैसेज भेजने के लिए रिलीज करता है।
- हिस्टामाइन के कई काम हैं, लेकिन यह मुख्य रूप से एलर्जी और एनाफिलेक्टिक लक्षण पैदा करने में भूमिका के लिए जाना जाता है।
- ये दवाएं अलग-अलग तरह के एलर्जी के लक्षणों जैसे खांसी-जुकाम, त्वचा में खुजली-लालिमा, आंखों में जलन को कम करने में मदद करती हैं।
लंबे समय तक इन दवाओं के लेने से क्या दिक्कतें हो सकती हैं?
बार-बार खुद से, बिना डॉक्टरी सलाह के अगर आप भी एलर्जी वाली दवाएं ले रहे हैं तो इससे सेहत को कई तरह के खतरे हो सकते हैं। आमतौर पर कुछ लोगों में इसके हल्के साइड-इफेक्ट्स देखे जाते हैं, जिसमें मुंह सूखना, नींद आना, चक्कर आना या मतली और उल्टी की दिक्कत हो सकती हैं। हालांकि कुछ लोगों को और भी कई तरह के दुष्प्रभावों का अनुभव हो सकता है।
- बेचैनी या मूड से संबंधित दिक्कतें।
- पेशाब करने में दिक्कत या पेशाब न कर पाना
- नजर धुंधली होना और कन्फ्यूजन
- आंखों में सूखना बढ़ना।
- हाइपर महसूस होना या याददाश्त की समस्या।
ऐसे लोग ओटीसी दवाओं से बचें
डॉक्टर कहते हैं, अगर आपको प्रोस्टेट की समस्या है, दिल की बीमारी या हाई ब्लड प्रेशर है, थायरॉइड- किडनी या लिवर की बीमारी है तो किसी भी तरह की दवाओं के सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
- अगर आप प्रेग्नेंट हैं या ब्रेस्टफीडिंग करा रही हैं, तो भी बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी दवा को लेने से बचें।
- 2 साल से कम उम्र के बच्चों को फर्स्ट-जेनरेशन एंटीहिस्टामाइन नहीं दी जानी चाहिए।
- अगर वे 2 से 6 साल के बीच के हैं, तो उनके पीडियाट्रिशियन से बात करें।
- लंबे समय तक इस्तेमाल के कारण कुछ लोगों में दिल की धड़कनों में अनियमितता की समस्या देखी गई है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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