Seasonal Yoga: सालभर एक ही योग करने से होती हैं बीमारियां! जानिए ऋतु अनुसार योगाभ्यास के फायदे
Seasonal Yoga: आज योग को कैलोरी बर्न और बॉडी शेप तक सीमित कर दिया गया है। जबकि असल योग शरीर, मन और मौसम तीनों का संतुलन है। जो व्यक्ति ऋतु के अनुसार योग अपनाता है, उसे दवा कम और ऊर्जा ज्यादा चाहिए होती है।
विस्तार
Seasonal Yoga: योग कोई ट्रेंड नहीं, बल्कि ऋतु के साथ चलने वाला जीवन-विज्ञान है। हमारे पूर्वजों ने शरीर को मौसम के खिलाफ नहीं, मौसम के साथ ढालना सिखाया। यही कारण है कि आयुर्वेद और योग दोनों में ऋतुचर्या को सर्वोपरि रखा गया। सर्दी की जकड़न, गर्मी की तपन और बरसात की सुस्ती हर मौसम शरीर पर अलग असर डालता है, और उसी अनुसार योगासन बदलना ही संतुलित स्वास्थ्य का मूल मंत्र है। आज की सबसे बड़ी गलती यही है कि लोग सालभर एक ही योग अभ्यास करते रहते हैं। नतीजा कभी थकान, कभी दर्द, कभी चिड़चिड़ापन। सच यह है कि हर ऋतु अलग योग मांगती है।
एक ही योग पूरे साल क्यों नहीं?
शरीर कोई मशीन नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ा जीवंत तंत्र है। मौसम बदलता है, तो शरीर की जरूरतें भी बदलती हैं। एक ही योग को हर मौसम में करना ऐसा है जैसे गर्मी में ऊनी कपड़े पहनना। योग का असली लाभ तभी मिलता है जब वह ऋतु के अनुरूप हो। आज योग को कैलोरी बर्न और बॉडी शेप तक सीमित कर दिया गया है। जबकि असल योग शरीर, मन और मौसम तीनों का संतुलन है। जो व्यक्ति ऋतु के अनुसार योग अपनाता है, उसे दवा कम और ऊर्जा ज्यादा चाहिए होती है।
सर्दी में योग क्यों बदलना जरूरी है?
ठंड में शरीर की अग्नि भीतर सिमट जाती है। मांसपेशियां अकड़ती हैं, जोड़ों में जकड़न बढ़ती है और आलस्य हावी रहता है। इस मौसम में ऊष्मा बढ़ाने वाले योगासन जरूरी होते हैं। कुछ योगासन सर्दियों में जरूर करने चाहिए, जैसे
- सूर्य नमस्कार
- भुजंगासन
- धनुरासन
- कपालभाति और भस्त्रिका
ये योग शरीर को गर्म रखते हैं, रक्तसंचार तेज करते हैं और इम्युनिटी मजबूत बनाते हैं।
गर्मी में भारी योग क्यों नुकसानदेह हो सकता है?
गर्मी में शरीर पहले से ही ऊष्मा से भरा होता है। ऐसे में ज्यादा तीव्र योग शरीर को थका सकता है, चक्कर और डिहाइड्रेशन का कारण बन सकता है। इस ऋतु में योग का उद्देश्य शीतलता और संतुलन होना चाहिए। गर्मियों में किए जाने वाले योगासन सर्दी के मौसम से अलग होते हैं, जैसे
- शीतली और शीतकारी प्राणायाम
- चंद्र नमस्कार
- बालासन
- शवासन
ये योग मन को शांत करते हैं और शरीर की गर्मी को नियंत्रित करते हैं।
बरसात में योग क्यों सबसे ज्यादा जरूरी हो जाता है?
बरसात में पाचन कमजोर, शरीर भारी और रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इस मौसम में गलत योग संक्रमण और जोड़ों की समस्या बढ़ा सकता है। इसलिए स्थिर और नियंत्रित योग सबसे बेहतर माना जाता है। बरसात में कुछ खास योग जरूर करने चाहिए।
- वज्रासन
- पवनमुक्तासन
- ताड़ासन
- अनुलोम-विलोम
ये योग पाचन सुधारते हैं और शरीर में जमा वात दोष को संतुलित करते हैं।