सब्सक्राइब करें

Swami Vivekananda Famous Speech: स्वामी विवेकानंद का वो भाषण, जिसकी वजह से अमेरिका में गूंजी थी तालियां

लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्रुति गौड़ Updated Sun, 11 Jan 2026 02:36 PM IST
सार

Swami Vivekananda Famous Speech: भारतीय संस्कृति, धर्म और आध्यात्म के महानायक स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी को है। ऐसे में हम आपको उनके ऐसे एक भाषण के बारे में बताएंगे, जिसकी वजह से अमेरिका के शिकागो में तालियों की गूंज सुनाई दी थी।

विज्ञापन
swami Vivekananda famous speech in chicago dharm sansad in hindi
स्वामी विवेकानंद का ऐतिहासिक भाषण - फोटो : अमर उजाला

Swami Vivekananda Famous Speech: भारतीय संस्कृति, धर्म और आध्यात्म के महानायक स्वामी विवेकानंद की जयंती हर साल 12 जनवरी को मनाई जाती है। वे न केवल भारत में, बल्कि विश्व स्तर पर युवाओं और समाज के लिए प्रेरणा के स्रोत रहे हैं। उनके विचार, उपदेश और भाषण आज भी लोगों के जीवन में दिशा और ऊर्जा प्रदान करते हैं।



स्वामी विवेकानंद ने अपने जीवन में शिक्षा, सेवा और आध्यात्म को एक साथ जोड़कर एक आदर्श स्थापित किया। उनके विचारों ने युवा पीढ़ी को आत्मविश्वासी बनने और अपने लक्ष्य की दिशा में निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।

अमेरिका के शिकागो में 1893 में हुए विश्व धर्म महासभा में उनका एक भाषण आज भी इतिहास में याद किया जाता है, जब उनके विचारों और शब्दों ने वहां उपस्थित लोगों के दिलों को छू लिया और तालियों की गूंज से उनका स्वागत किया गया। इस लेख में हम आपको उस ऐतिहासिक भाषण और इसके महत्व के बारे में बताएंगे।

Trending Videos
swami Vivekananda famous speech in chicago dharm sansad in hindi
स्वामी विवेकानंद का भाषण ... - फोटो : Freepik.com
स्वामी विवेकानंद का भाषण ...

11 सितंबर 1893 को स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में भाषण दिया। विश्व धर्म संसद में भाषण देते हुए अपने संबोधन की शुरुआत "अमेरिका के भाइयों और बहनों" से की। ये भाषण न केवल भारतीय धर्म और संस्कृति का परिचय था, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक संदेश भी था। उन्होंने भारत की प्राचीन वैदिक परंपरा, योग और ध्यान की शक्ति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। 

आगे उन्होंने कहा कि 'मैं आपको अपने देश की प्राचीन संत परंपरा की तरफ से धन्यवाद देता हूं। आपको सभी धर्मों की जननी की तरफ से भी धन्यवाद देता हूं और सभी जाति, संप्रदाय के लाखों, करोड़ों हिंदुओं की तरफ से आभार व्यक्त करता हूं। मेरा धन्यवाद कुछ उन वक्ताओं को भी जिन्होंने इस मंच से यह कहा कि दुनिया में सहनशीलता का विचार सुदूर पूरब के देशों से फैला है।'

क्या था संदेश ?

इस भाषण के दौरान स्वामी विवेकानंद का मुख्य संदेश था – “धर्म ही मानवता की असली ताकत है।” उन्होंने अपने भाषण में कहा कि "मुझे इस बात का गर्व है कि मैं ऐसे धर्म से हूं जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया और हम सभी धर्मों को स्वीकार करते हैं। जिस तरह अलग-अलग जगहों से निकली नदियां, अलग रास्तों से होकर समुद्र में मिलती हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य भी अपनी इच्छा से अलग रास्ते चुनता है। ये रास्ते दिखने में भले ही अलग-अलग लगते हैं लेकिन ये सभी ईश्वर तक ही जाते हैं।"

लोगों पर पड़ा गहरा प्रभाव

भाषण सुनने वाले वहां मौजूद सभी लोगों ने उनके विचारों और प्रस्तुति की गहराई से प्रभावित होकर उन्हें तालियों से सम्मानित किया। उनके शब्दों की गूंज और आत्मविश्वास ने यह दर्शाया कि भारत की संस्कृति और धर्म केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं, बल्कि एक वैश्विक संदेश देने वाली शक्ति है। यह भाषण भारतीय संस्कृति की अंतरराष्ट्रीय पहचान और स्वामी जी की प्रेरक क्षमता का प्रतीक बन गया।
विज्ञापन
अगली फोटो गैलरी देखें

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed