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Yoga Mats Benefits: सस्ती योग मैट बन सकती है बीमारी की वजह! जानिए क्यों चुनें नेचुरल मैट
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shivani Awasthi
Updated Wed, 08 Apr 2026 10:54 AM IST
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सार
Yoga Mats For Joint Support: जानकार सेहत सुधारने के लिए योग की सलाह देते हैं, लेकिन इसके लिए प्राकृतिक और पर्यावरण अनुकूल योग मैट बहुत जरूरी है।
योग
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
Yoga Mats: योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर और मन का सामंजस्य है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस साधना में आपके और जमीन के बीच संपर्क बनाती वह ‘योग मैट’ कितनी महत्वपूर्ण है?
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कल्पना कीजिए, आप ‘अधोमुख श्वान आसन’ कर रही हैं और अचानक आपके हाथ फिसलने लगते हैं। आपकी एकाग्रता टूटती है और आप आसन छोड़ चोट से बचने का प्रयास करती हैं। बस, यहीं से शुरू होती है एक बेहतरीन योग मैट की कहानी।
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प्रकृति से जुड़ाव
अधिकतर सस्ती योग मैट प्लास्टिक की होती हैं, जिनमें हानिकारक रसायन होते हैं। योग करते समय गहरी सांस लेने के दौरान यह रसायन शरीर में जा सकते हैं, जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। इसके बजाय प्राकृतिक रबर, जूट, कॉर्क या जैविक कपास से बनी मैट सुरक्षित है। ये त्वचा और सांस दोनों के लिए बेहतर हैं।
कठिन आसनों के लिए
प्राकृतिक मैट की सबसे बड़ी खूबी उनकी मजबूत पकड़ है। उदाहरण के लिए जेडयोगा जैसी प्राकृतिक रबर मैट की सतह 'ओपन-सेल' संरचना वाली होती है। यह पसीने को हल्का सोख लेती है, जिससे आपके हाथ-पांव फिसलते नहीं हैं। कठिन संतुलन वाले आसनों में यह पकड़ ही चोट से बचाव करती है। वहीं, कॉर्क मैट पसीने से गीली होने पर भी बेहतर पकड़ देती है।
संतुलन और आराम
प्राकृतिक रबर में स्वाभाविक रूप से लचीलापन होता है। यह सिंथेटिक मैट की तुलना में बेहतर कुशनिंग प्रदान करती है। जब आप घुटनों के बल कोई आसन करती हैं, तो रबर का घनत्व आपके जोड़ों को फर्श की कठोरता से बचाता है। यह संतुलन और आराम के बीच एक सटीक सामंजस्य बिठाती है, जो लंबी साधना के लिए अनिवार्य है।
स्वच्छ भी, टिकाऊ भी
प्राकृतिक सामग्री जैसे कॉर्क और जूट स्वाभाविक रूप से एंटी-माइक्रोबियल होती हैं यानी इनमें बैक्टीरिया, फफूंद या पसीने की बदबू नहीं पनपती। टिकाऊपन के मामले में भी ये बेहतर हैं। साथ ही प्राकृतिक रबर की मैट लंबे समय तक अपना आकार और पकड़ बनाए रखती है, जबकि प्लास्टिक की मैट कुछ समय बाद फटने या उखड़ने लगती हैं।
पर्यावरण का ध्यान
आपको यह जरूर जानना चाहिए कि जब एक योग मैट का जीवन खत्म हो जाता है, तो उसका असर पर्यावरण पर अलग होता है। पीवीसी मैट सैकड़ों वर्षों तक कचरे में रह जाती हैं, लेकिन प्राकृतिक मैट बायोडिग्रेडेबल होती हैं। जूट, कॉर्क और रबर समय के साथ मिट्टी में मिल जाते हैं। जूट की खेती और कॉर्क का उत्पादन भी पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाता। इस तरह प्राकृतिक मैट न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि प्रकृति के अनुकूल भी है।