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Surya Grahan 2026 Live: सूर्य ग्रहण हुआ शुरू, यहां जानें सूतक काल, मंत्र, उपाय और दान का महत्व
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ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: श्वेता सिंह
Updated Tue, 17 Feb 2026 03:49 PM IST
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खास बातें
Surya Grahan in India 2026 Solar Eclipse Date, Sutak Kaal Time: आज 17 फरवरी 2026 को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने वाला है। भारतीय समय के अनुसार सूर्य ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 26 मिनट से होगी और इसका समापन शाम 07 बजकर 57 मिनट होगा। यह सूर्य ग्रहण शनि के स्वामित्व वाली राशि कुंभ में लगेगा। यह वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा जो भी बहुत ही खास रहेगा। जिसमें सूर्य 'रिंग ऑफ फायर' की तरह दिखाई देगा।
सूर्य ग्रहण 2026 live
- फोटो : amar ujala
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लाइव अपडेट
03:44 PM, 17-Feb-2026
Surya Grahan Time: कितने घंटे का होगा सूर्यग्रहण
यह सूर्य ग्रहण लगभग 4 घंटे 31 मिनट तक रहेगा। इसकी शुरुआत दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर होगी और समापन शाम 7 बजकर 57 मिनट पर होगा। यह कंकण (वलयाकार) सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें सूर्य का किनारा छल्ले की तरह दिखाई देता है।
03:26 PM, 17-Feb-2026
Surya Grahan Time: सूर्य ग्रहण ग्रहण का समय
- ग्रहण की शुरुआत: दोपहर 03:26 बजे
- ग्रहण का मध्यकाल: शाम 05:42 बजे
- ग्रहण का समापन: शाम 07:57 बजे
03:14 PM, 17-Feb-2026
Surya Grahan 2026: ग्रहण के दौरान न करें ये गलतियां
- ग्रहण के दौरान बाहर निकलने से बचना चाहिए, ताकि सूर्य की सीधी किरणों का प्रभाव शरीर पर न पड़े।
- मान्यता है कि इस समय, विशेषकर गर्भवती महिलाओं को, सुई, कैंची या चाकू जैसी नुकीली वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए।
- ग्रहण शुरू होने से पहले भोजन और पानी में तुलसी के पत्ते डाल देना शुभ माना जाता है, क्योंकि तुलसी को पवित्र माना गया है।
- मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या गायत्री मंत्र का जप करना लाभकारी माना जाता है।
03:03 PM, 17-Feb-2026
Surya Grahan 2026: किस राशि और नक्षत्र में लगेगा ग्रहण
सूर्य ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में घटित होगा। ज्योतिष के अनुसार यह समय थोड़ा संवेदनशील माना जा रहा है। ग्रहण के दौरान कर्क लग्न रहेगा और कई ग्रह अष्टम भाव में एक साथ स्थित होंगे, जिसे सामान्यतः शुभ संकेत नहीं माना जाता। ज्योतिषियों का मानना है कि इसका प्रभाव खासकर पश्चिमी देशों में देखने को मिल सकता है, जहां भारी बारिश, तूफान या प्राकृतिक आपदाओं जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं।
02:47 PM, 17-Feb-2026
Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण का तुला और वृश्चिक राशि पर प्रभाव
तुला राशि- तुला राशि वालों के लिए समय प्रभावशाली रहेगा।
- आपकी बातों का असर लोगों पर पड़ेगा।
- समाज में सम्मान बढ़ेगा और नए लोगों से मिलेंगे।
- प्रेम संबंध मजबूत होंगे और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
वृश्चिक राशि
- वृश्चिक राशि वालों के लिए समय शुभ रहेगा।
- पुराने विवाद समाप्त हो सकते हैं।
- धन लाभ के अवसर मिलेंगे और आत्मविश्वास बढ़ेगा।
- कोई खास मिलने भी आ सकता है।
02:32 PM, 17-Feb-2026
Surya Grahan 2026: अपनी राशि के अनुसार करें ये उपाय
मेष राशिउपाय: हनुमान चालीसा का पाठ
वृषभ राशि
उपाय: मां लक्ष्मी की पूजा, सफेद वस्त्र या चावल दान
मिथुन राशि
उपाय: तुलसी पर जल चढ़ाएं
कर्क राशि
उपाय: दूध में केसर मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं।
सिंह राशि
उपाय: गेहूं दान करें।
कन्या राशि
उपाय: दुर्गा सप्तशती पाठ।
तुला राशि
उपाय: मीठा भोजन बांटें।
वृश्चिक राशि
उपाय: रुद्राभिषेक करें।
धनु राशि
उपाय: विष्णु सहस्रनाम पाठ
मकर राशि
उपाय: शनि मंत्र जप।
कुंभ राशि
उपाय: दान करें।
मीन राशि
उपाय: शिवलिंग पर जल अर्पित करें।
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02:10 PM, 17-Feb-2026
Surya Grahan 2026: ग्रहण से बचने के उपाय
- शास्त्रों में सूर्य ग्रहण के प्रभाव से बचने के लिए कुछ खास उपाय बताए गए हैं।
- ग्रहण के दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है।
- इससे बचने के लिए गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है।
- ग्रहण के बाद पवित्र नदियों में स्नान और गरीबों को दान करने से दोषों से मुक्ति मिलती है।
- ग्रहण के बाद घर में गंगाजल का छिड़काव करें। इससे वातावरण शुद्ध होता है।
- ग्रहण के दौरान भोजन न करें और पानी में तुलसी के पत्ते डालें, जिससे भोजन पर ग्रहण का प्रभाव न पड़े।
- ग्रहण के दौरान सोने से बचें और मंत्र जाप करते रहें।
01:52 PM, 17-Feb-2026
Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण के दौरान करें इस चालीसा का पाठ
श्री सूर्य चालीसा
दोहा
कनक बदन कुंडल मकर, मुक्ता माला अंग।
पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के संग।।
चौपाई
जय सविता जय जयति दिवाकर, सहस्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर।
भानु, पतंग, मरीची, भास्कर, सविता, हंस, सुनूर, विभाकर।
विवस्वान, आदित्य, विकर्तन, मार्तण्ड, हरिरूप, विरोचन।
अम्बरमणि, खग, रवि कहलाते, वेद हिरण्यगर्भ कह गाते।
सहस्रांशु, प्रद्योतन, कहि कहि, मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि।
अरुण सदृश सारथी मनोहर, हांकत हय साता चढ़ि रथ पर।
मंडल की महिमा अति न्यारी, तेज रूप केरी बलिहारी।
उच्चैश्रवा सदृश हय जोते, देखि पुरन्दर लज्जित होते।
मित्र, मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर, सविता,
सूर्य, अर्क, खग, कलिहर, पूषा, रवि,
आदित्य, नाम लै, हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै।
द्वादस नाम प्रेम सो गावैं, मस्तक बारह बार नवावै।
चार पदारथ सो जन पावै, दुख दारिद्र अघ पुंज नसावै।
नमस्कार को चमत्कार यह, विधि हरिहर कौ कृपासार यह।
सेवै भानु तुमहिं मन लाई, अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई।
बारह नाम उच्चारन करते, सहस जनम के पातक टरते।
उपाख्यान जो करते तवजन, रिपु सों जमलहते सोतेहि छन।
छन सुत जुत परिवार बढ़तु है, प्रबलमोह को फंद कटतु है।
अर्क शीश को रक्षा करते, रवि ललाट पर नित्य बिहरते।
सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत, कर्ण देश पर दिनकर छाजत।
भानु नासिका वास करहु नित, भास्कर करत सदा मुख कौ हित।
ओठ रहैं पर्जन्य हमारे, रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे।
कंठ सुवर्ण रेत की शोभा, तिग्मतेजसः कांधे लोभा।
पूषा बाहु मित्र पीठहिं पर, त्वष्टा-वरुण रहम सुउष्णकर।
युगल हाथ पर रक्षा कारन, भानुमान उरसर्मं सुउदरचन।
बसत नाभि आदित्य मनोहर, कटि मंह हंस, रहत मन मुदभर।
जंघा गोपति, सविता बासा, गुप्त दिवाकर करत हुलासा।
विवस्वान पद की रखवारी, बाहर बसते नित तम हारी।
सहस्रांशु, सर्वांग सम्हारै, रक्षा कवच विचित्र विचारे।
अस जोजजन अपने न माहीं, भय जग बीज करहुं तेहि नाहीं।
दरिद्र कुष्ट तेहिं कबहुं न व्यापै, जोजन याको मन मंह जापै।
अंधकार जग का जो हरता, नव प्रकाश से आनन्द भरता।
ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही, कोटि बार मैं प्रनवौं ताही।
मन्द सदृश सुतजग में जाके, धर्मराज सम अद्भुत बांके।
धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा, किया करत सुरमुनि नर सेवा।
भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों, दूर हटत सो भव के भ्रम सों।
परम धन्य सो नर तनधारी, हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी।
अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन, मध वेदांगनाम रवि उदय।
भानु उदय वैसाख गिनावै, ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै।
यम भादों आश्विन हिमरेता, कातिक होत दिवाकर नेता।
अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं, पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं।
दोहा
भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य।
सुख सम्पत्ति लहै विविध, होंहि सदा कृतकृत्य।।
दोहा
कनक बदन कुंडल मकर, मुक्ता माला अंग।
पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के संग।।
चौपाई
जय सविता जय जयति दिवाकर, सहस्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर।
भानु, पतंग, मरीची, भास्कर, सविता, हंस, सुनूर, विभाकर।
विवस्वान, आदित्य, विकर्तन, मार्तण्ड, हरिरूप, विरोचन।
अम्बरमणि, खग, रवि कहलाते, वेद हिरण्यगर्भ कह गाते।
सहस्रांशु, प्रद्योतन, कहि कहि, मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि।
अरुण सदृश सारथी मनोहर, हांकत हय साता चढ़ि रथ पर।
मंडल की महिमा अति न्यारी, तेज रूप केरी बलिहारी।
उच्चैश्रवा सदृश हय जोते, देखि पुरन्दर लज्जित होते।
मित्र, मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर, सविता,
सूर्य, अर्क, खग, कलिहर, पूषा, रवि,
आदित्य, नाम लै, हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै।
द्वादस नाम प्रेम सो गावैं, मस्तक बारह बार नवावै।
चार पदारथ सो जन पावै, दुख दारिद्र अघ पुंज नसावै।
नमस्कार को चमत्कार यह, विधि हरिहर कौ कृपासार यह।
सेवै भानु तुमहिं मन लाई, अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई।
बारह नाम उच्चारन करते, सहस जनम के पातक टरते।
उपाख्यान जो करते तवजन, रिपु सों जमलहते सोतेहि छन।
छन सुत जुत परिवार बढ़तु है, प्रबलमोह को फंद कटतु है।
अर्क शीश को रक्षा करते, रवि ललाट पर नित्य बिहरते।
सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत, कर्ण देश पर दिनकर छाजत।
भानु नासिका वास करहु नित, भास्कर करत सदा मुख कौ हित।
ओठ रहैं पर्जन्य हमारे, रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे।
कंठ सुवर्ण रेत की शोभा, तिग्मतेजसः कांधे लोभा।
पूषा बाहु मित्र पीठहिं पर, त्वष्टा-वरुण रहम सुउष्णकर।
युगल हाथ पर रक्षा कारन, भानुमान उरसर्मं सुउदरचन।
बसत नाभि आदित्य मनोहर, कटि मंह हंस, रहत मन मुदभर।
जंघा गोपति, सविता बासा, गुप्त दिवाकर करत हुलासा।
विवस्वान पद की रखवारी, बाहर बसते नित तम हारी।
सहस्रांशु, सर्वांग सम्हारै, रक्षा कवच विचित्र विचारे।
अस जोजजन अपने न माहीं, भय जग बीज करहुं तेहि नाहीं।
दरिद्र कुष्ट तेहिं कबहुं न व्यापै, जोजन याको मन मंह जापै।
अंधकार जग का जो हरता, नव प्रकाश से आनन्द भरता।
ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही, कोटि बार मैं प्रनवौं ताही।
मन्द सदृश सुतजग में जाके, धर्मराज सम अद्भुत बांके।
धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा, किया करत सुरमुनि नर सेवा।
भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों, दूर हटत सो भव के भ्रम सों।
परम धन्य सो नर तनधारी, हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी।
अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन, मध वेदांगनाम रवि उदय।
भानु उदय वैसाख गिनावै, ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै।
यम भादों आश्विन हिमरेता, कातिक होत दिवाकर नेता।
अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं, पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं।
दोहा
भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य।
सुख सम्पत्ति लहै विविध, होंहि सदा कृतकृत्य।।
01:33 PM, 17-Feb-2026
Surya Grahan Time: सूर्य ग्रहण में किन कार्यों से बचें
- ग्रहण के समय बाल या नाखून काटना शुभ नहीं माना जाता।
- इस अवधि में यात्रा करने से भी बचने की सलाह दी जाती है।
- सूतक काल के नियम छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर लागू नहीं माने जाते।
- सूर्य ग्रहण को सीधे नंगी आंखों से देखना हानिकारक हो सकता है, इससे आंखों की रोशनी पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
01:07 PM, 17-Feb-2026
Surya Grahan Time: ग्रहण काल में क्या करें
- मान्यता है कि सूर्य ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, इसलिए भोजन और पानी में तुलसी के पत्ते डालने की परंपरा है।
- ऐसा माना जाता है कि तुलसी डालने से ग्रहण के दुष्प्रभाव कम हो जाते हैं।
- ग्रहण के दौरान मंदिर में पूजा-पाठ या बड़े धार्मिक अनुष्ठान करना वर्जित माना गया है।
- इस समय भगवान विष्णु का ध्यान और उनके मंत्रों का जप करना शुभ माना जाता है।
- गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी विशेष रूप से फलदायी माना गया है।