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Uttarakhand Samwad 2026 Live: सीएम धामी बोले- हमारे राज्य की भौगोलिक परिस्थितियां काफी कठिन हैं
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अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून
Published by: Sharukh Khan
Updated Wed, 24 Jun 2026 11:27 AM IST
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खास बातें
देवभूमि के विकास पर अमर उजाला संवाद के मंच पर मंथन चल रहा है। देहरादून में आयोजित हो रहे अमर उजाला संवाद के इस मंच पर विचारों और अनुभवों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
Amar Ujala Uttarakhand
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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लाइव अपडेट
11:15 AM, 24-Jun-2026
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से चर्चा
संवाद के अगले सत्र 'कल, आज और कल' सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से चर्चा की जा रही है। उन्होंने कहा कि अमर उजाला को मैं बधाई देता हूं कि इस प्रकार के कार्यक्रम वो आयोजित करते हैं। मैं बहुत सामान्य परिवार में पैदा हुआ। लेकिन बचपन से मुझे कक्षा पांच और छह के बाद मुझे अखबार पढ़ने का एक शौक जैसा हो गया। मेरा गांव नगला तराई है खटीमा में।11:09 AM, 24-Jun-2026
'उत्तराखंड और अमर उजाला का रिश्ता बहुत पुराना है'
अमर उजाला के संपादक डॉक्टर इंदुशेखर पंचोली ने कहा कि उत्तराखंड और अमर उजाला का रिश्ता बहुत पुराना है उत्तराखंड के जन्म से। इसे हिंदी में हम गर्भनाल का संबंध कहते हैं। जब इस प्रदेश के वासियों ने अपने राज्य का सपना देखा, उसके लिए संघर्ष की शुरुआत की थी। अमर उजाला उनके साथ खड़ा था। स्थानीय निवासियों को जहां जरूरत हुई, अमर उजाला को हर दम साथ पाया। इस राज्य के हर दर्द और पीड़ा को अमर उजाला ने अपना दर्द समझा। इसी तरह इसकी हर खुशी अमर उजाला की खुशी होती है।11:04 AM, 24-Jun-2026
प्रबंध निदेशक तन्मय माहेश्वरी ने किया सीएम धामी का स्वागत
अमर उजाला संवाद उत्तराखंड कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर की गई। मंच पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पहुंच गए हैं। अमर उजाला के प्रबंध निदेशक तन्मय माहेश्वरी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का स्वागत किया।11:01 AM, 24-Jun-2026
'जीवन की हर चीज को केवल धन के रूप में नहीं देखना चाहिए'
देवी चित्रलेखा ने कहा कि कमाई करना जरूरी है, लेकिन हमें यह भी समझना चाहिए कि समाज से जो कुछ हमें मिला है, उसके प्रति अपने कर्तव्यों को निभाना भी उतना ही आवश्यक है। जीवन की हर चीज को केवल धन के रूप में नहीं देखना चाहिए। इस संसार में दान के कई रूप हैं, जैसे कन्यादान, अन्नदान, रक्तदान और सेवा।10:59 AM, 24-Jun-2026
'जीवन के अनमोल रिश्तों और अपनों के लिए समय ही नहीं बचता'
उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास सबसे बड़ी पूंजी हमारा शरीर और यह मानव जीवन है, इसलिए इसकी महत्ता को समझना जरूरी है। आज के समय में लोग धन कमाने की दौड़ में इस तरह उलझ गए हैं कि जीवन के अनमोल रिश्तों और अपनों के लिए समय ही नहीं बचता। इंसान पैसे कमाने निकल जाता है और जब तक धन आता है, तब तक बहुत कुछ पीछे छूट चुका होता है। कई बार बच्चों के साथ बैठने का समय नहीं मिलता और जब समय मिलता है, तब बच्चे खुद अपनी जिंदगी की दौड़ में निकल चुके होते हैं।10:55 AM, 24-Jun-2026
'धर्म मिलना अपने आप में बहुत बड़ा सौभाग्य है'
देवी चित्रलेखा ने सभी को गंगा दशहरा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि, हमें अपने जीवन को केवल सफल नहीं, बल्कि सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य जैसा जन्म, भारत जैसा देश और सनातन जैसा धर्म मिलना अपने आप में बहुत बड़ा सौभाग्य है। इससे अधिक भाग्यशाली स्थिति और कुछ नहीं हो सकती।
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10:46 AM, 24-Jun-2026
'खुश होने में और आनंदित होने में अंतर है'
देवी चित्रलेखा ने कहा कि खुश होने में और आनंदित होने में अंतर है। खुशी आती है चीजों से। आनंद आता है अंदर से। आनंद एक ऐसा जीवन का गुण है जो किसी के जीवन में आ गया तो उसके अलावा कुछ नहीं आएगा।10:43 AM, 24-Jun-2026
नेम, फेम और तीसरा है मनी: चित्रलेखा
ठीक उसी तरह भगवान ने हमें इस संसार में एक अवसर देकर भेजा है। देवी चित्रलेखा ने कहा कि जब मनुष्य इस संसार को छोड़कर ईश्वर के पास जाएगा, तब भगवान उससे दो महत्वपूर्ण प्रश्न करेंगे। पहला प्रश्न होगा, मैंने तुम्हें इतना अनमोल जीवन दिया, क्या तुमने इसे आनंद के साथ जिया? उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के जीवन में सच्चा आनंद आ जाता है, उसका जीवन अपने आप सार्थक बन जाता है। उन्होंने बताया कि भगवान का दूसरा प्रश्न होगा , जो आनंद तुम्हें मिला, क्या तुमने उसे दूसरों के साथ बांटा? यदि इन दोनों प्रश्नों का उत्तर हां में होगा, तभी भगवान को लगेगा कि उन्होंने मनुष्य को जीवन देकर सही निर्णय लिया और वह उस व्यक्ति से प्रसन्न होंगे।10:30 AM, 24-Jun-2026
पहले सत्र सुप्रभात देवभूमि की शुरुआत
देवी चित्रलेखा ने 'सुप्रभात देवभूमि' के साथ सत्र की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने 'हरे कृष्ण हरे राम' मंत्र का जाप करते हुए अपने विचार साझा किए। उन्होंने सबसे पहले अमर उजाला का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जीवन में कोई भी कार्य हो, उसकी शुरुआत हमेशा अध्यात्म से ही होनी चाहिए। जीवन के महत्व पर बात करते हुए देवी चित्रलेखा ने कहा कि मनुष्य के सामने दो तरह का जीवन होता है, सफल जीवन और सार्थक जीवन। सफल होना आवश्यक है, लेकिन उससे कहीं अधिक जरूरी जीवन को सार्थक बनाना है। उन्होंने कहा कि आज के समय में लोग सफलता को नाम, प्रसिद्धि और धन से जोड़कर देखते हैं। सोशल मीडिया पर बढ़ते फॉलोअर्स की संख्या को भी लोग सफलता का पैमाना मानने लगे हैं। उन्होंने आगे कहा कि भगवान ने हमें यह अनमोल मानव जीवन किसी उद्देश्य के लिए दिया है। जिस व्यक्ति का जीवन सार्थक होता है, उसके भीतर आनंद स्वतः दिखाई देता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे विद्यालय में अवकाश के दौरान विद्यार्थियों को कार्य दिया जाता है, कुछ लोग उसे समय पर पूरा करते हैं और आगे बढ़ते हैं, जबकि कुछ लोग उसे टाल देते हैं और पीछे रह जाते हैं।10:23 AM, 24-Jun-2026