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Uttarakhand Samwad 2026 Live: संवाद के मंच पर कुंभ 2027 पर चर्चा जारी
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अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून
Published by: Sharukh Khan
Updated Wed, 24 Jun 2026 12:43 PM IST
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खास बातें
देवभूमि के विकास पर अमर उजाला संवाद के मंच पर मंथन चल रहा है। देहरादून में आयोजित हो रहे अमर उजाला संवाद के इस मंच पर विचारों और अनुभवों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
Amar Ujala Uttarakhand
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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लाइव अपडेट
12:42 PM, 24-Jun-2026
संवाद के मंच पर कुंभ 2027 पर चर्चा जारी
आस्था का संगम कुंभ 2027 सत्र का शुभारंभ हो गया है। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद वर्धन मंच पर चर्चा कर रहे हैं। उनके साथ में हेमंत द्विवेदी वर्तमान में श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के चेयरमैन, नितिन गौतम, अध्यक्ष, श्रीगंगा सभा मैनेजमेंट कमेटी, हर की पैड़ी भी इस चर्चा में शामिल हुए हैं।12:33 PM, 24-Jun-2026
'देहरादून में भी इस नाटक को कर चुका हूं'
आपका 'मसाज' नाटक है। दो दशक से अधिक वक्त से चला आ रहा है। क्या बात है इस प्ले में कि ये अब तक प्रासंगिक है। आप शो करते हैं तो हॉल भर जाते हैं? आप इसमें 20 से ज्यादा किरदार अदा करते हैं।राकेश बेदी: वह नाटक हिंदुस्तान के या कहें कि दुनिया के शानदार नाटककार विजय तेंदुलकर का लिखा हुआ है। वह वन एक्टर प्ले है, जिसे मोनोलॉग कहते हैं। उसका असर कैसा होता है, यह तो आपको देखकर ही पता चलेगा। देहरादून में भी इस नाटक को कर चुका हूं। इस नाटकर को देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। पहले लोग सोचते हैं कि अकेला कैसे बांध कर रखेगा? खत्म होते-होते समय देखकर कहते हैं कि अरे बाप रे दो घंटे निकल गए।
12:28 PM, 24-Jun-2026
कितना मुश्किल होता है इन चीजों को छिपाकर रखना?
राकेश बेदी ने कहा कि शुरू में बहुत तकलीफ हुई। आदित्य धर ने बहुत रिक्वेस्ट की थी कि राकेश जी प्लीज किसी को मत बताना। फिर ये भी है कि बात निकलेगी तो दूर तक जाएगी। इसलिए मैंने छिपाकर रखा।अर्जुन रामपाल आपसे कहते हैं कि सर आप तो सबको खा गए। ऐसे कॉम्प्लीमेंट सुनकर कुछ फील आता है?
राकेश बेदी: नहीं! ऐसा फील आ जाएगा तो एक शेर है:
शोर नदी का नहीं, आबशार का है
यहां से जो भी सफर है उतार का है
अगर कोई तुमसे ये कहे कि बच्चा है तू मेरा
उससे बचकर रहो, वो आदमी बेकार का है।
उन्होंने जो कॉम्प्लीमेंट दिया था, वह एक तारीफ थी। काम अच्छा है। अब उस पर मेरा दिमाग खराब हो जाए तो बेकार है।
12:17 PM, 24-Jun-2026
'एक दिन मेरी जिंदगी में ऐसा आया कि काम नहीं था और पैसे भी नहीं थे'
आज की पीढ़ी बहुत जल्दी डिप्रेशन में चली जाती है। नौकरी में किसी ने कुछ कह दिया, तनाव में चले गए। आप अपनी जिंदगी का वो किस्सा साझा करिए, जब लगा हो कि छोड़ दूं मगर हिम्मत नहीं हारी?अभिनेता राकेश बेदी ने कहा कि सबकी जिंदगी में ऐसा दिन आता है। मैंने यह बात कम मंचों पर बोली है। एक दिन मेरी जिंदगी में ऐसा आया कि काम नहीं था और पैसे भी नहीं थे। मैंने लेकिन एक बात तय की थी कि अपनी मजबूरियां परिवार तक नहीं जाने दूंगा। मेरी मां घबरा जाती कि मेरा बेटा रात को भूखा सोया। वापस बुला लेगी घर। मुझे वापस नहीं जाना। ऐसा वक्त आया कि बैंक भी खाली। घर भी खाली। सिर्फ 50 पैसे थे। तब 50 पैसे कि छह केले आते थे। मैंने सोचा कि सबसे पहले तो यह तय करूं कि जरूरी क्या है? आज की भूख या करियर? एक शेर था मुझे बहुत अच्छा लगता था
माना कि लौटकर आना है नामुमकिन
घर पलटा बियाहब से बहारें साथ लाऊंगा।
मैंने छह केले खाए और सो गया कि कल का कल देखेंगे।
12:06 PM, 24-Jun-2026
'श्रीमान श्रीमती अपने आप में कामयाब कार्यक्रम था'
अभिनेता राकेश बेदी ने कहा कि जब मैं कुछ भी नहीं था। तब यहां से गुजर रहा था। कुछ लोग आए और मेरा ऑटोग्राफ लेना शुरू कर दिया। फिर पता चला कि ये है जिंदगी बहुत बड़ा हिट हो गया है। कई फिल्में आईं। श्रीमान श्रीमती अपने आप में कामयाब कार्यक्रम था। मगर, धुरंधर आते-आते जो रीच है वह करोड़ों तक जाने लगी है। फिल्म बहुत बड़ी हिट है। कह नहीं सकते कि यह हिट है, सुपरहिट है या सुपर-डुपर हिट है। लोगों के मन से उतर नहीं रही। कल एयरपोर्ट पर एक शख्स मिले वो बोले कि उन्होंने 13 बार फिल्म देख ली है।12:02 PM, 24-Jun-2026
उत्तराखंड से कोई यादें?
अमर उजाला संवाद के मंच पर अभिनेता राकेश बेदी से चर्चा जारी है। उन्होंने उत्तराखंड से कोई यादों के सवाल पर जवाब देते हुए कहा कि मैंने अपना बचपन बहुत देहरादून में बिताया है। मेरी दादी के साइड के बहुत लोग थे, तो हर साल आता था। मेरे दादाजी ने भी यहां अपना बिजनेस शुरू किया था। मैं हर साल गर्मियों में यहां आता था। लीची के बाग होते थे तो लीची खाते थे, तब तक जब तक कि मालिक आकर डंडे मारकर हमें नहीं भगाता था।
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12:01 PM, 24-Jun-2026
चारधाम यात्रा को लेकर आपकी क्या तैयारी है?
चारधाम यात्रा एक सामान्य यात्रा नहीं है। यह बहुत ही आस्था और श्रद्धा की यात्रा है। मैं हमेशा से एक बात कहता हूं कि चारधाम यात्रा आज तो हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद जिस तरह से रोडे बन गई हैं। केदारनाथ का नवनिर्माण हो गया। बद्रीनाथ के लिए प्लान बन गया। एक समय ये यात्राएं काफी कठिन हुआ करती थीं, आज यात्रा का स्वरूप बदल गया है। ऐसे में कई समस्याएं भी हो गई है, ज्यादा लोगों का आना, मार्ग में परेशानी हो जाना। पहले क्या होता था इन यात्राओं की तैयारी की समीक्षा यात्रा शुरू होने के पहले होती थी। हम लोगों ने एक नई संस्कृति शुरू की है कि जैसे ही 2025 की यात्रा समाप्त हुई हमने 2026 की यात्रा की तैयारी शुरू कर दी और उसका परिणाम भी सामने आया । छोटी मोटी बातों को छोड़ दिया जाए तो इस बार यात्रा ने रिकॉर्ड कायम किया है। मतलब अभी तक 19 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा अबतक 40 लाख लोगों ने कर ली है। हेमकुंड साहब की यात्रा 1 लाख 25 हजार पहुंच गई जो पिछले पूरे सालभर से 20 से 25 हजार ज्यादा है। सीमांत क्षेत्र आदि कैलाश जहां पूर वर्षभर में 400 से 500 लोग पहुंचते थे वहां अभी तक 45000 लोग पहुंच चुके हैं और अभी तो यात्रा आधी भी नहीं हुई है। इसी प्रकार शीतकाल में लोगों लगता था कि कपाट बंद हो गए है देव लोगों की मान्यता है उनके कपाट बंद हो जाते हैं लेकिन उनके गद्दी स्थलों के लिए श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए लगातार उपलब्धता उपलब्ध कराई गई है।सवाल: मुख्यमंत्री बनने पर बढ़ती मजारों पर नकेल, 10 हजार एकड़ भूमि पर कब्जा मुक्त, लव जिहाद,लैंड जिहाद, थूक जिहाद ताकि बनी रहे देवभूमि की पवित्रता। ये पुष्कर सिंह धामी जी कहां छुपे हुए थे। आपको इन विषयों पर इतने अग्रेसिव होने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
आपको लगता है मैं अग्रेसिव हूं। जब उत्तराखंड के मुख्य सेवक के रूप में मुझे जिम्मेदारी मिली है तो देव भूमि का मूल स्वरूप बना न रहे, यहां देवत्व कायम रहे। हम कहीं भी जाते हैं तो कहते हैं कि हम देवभूमि उत्तराखंड से आए हैं या देवभूमि उत्तराखंड से हमारा नाम जुड़ा है तो सामने वाले जो भाव बदल जाते हैं। क्योंकि लोग मानते हैं भगवान के सबसे नजदीक का स्थान देवभूमि है। तो क्या देवभूमि की आस्था, श्रद्धा कम होनी चाहिए यहां का देवत्व कम होना चाहिए। यहां का जो मूल अस्तित्व है उसको कोई नुकसान नहीं होना चाहिए। कल का उत्तराखंड कैसा होगा यह हमारी जिम्मेदारी है और मुझे लगता है उतराखंड के सारे लोग बल्कि पूरे देश के लिए ये सोचते हैं कि देवभूमि का स्वरूप बना रहना चाहिए। हमारी भावी पीढ़ी को असुरक्षित उत्तराखंड नहीं मिलना चाहिए। यह अवैध कब्जे नहीं मिलने चाहिए, अवैध अतिक्रमण नहीं मिलना चाहिए। किसी को टारगेट करने जैसा इसमें कुछ भी नहीं है। अवैध कब्जे का मतलब अवैध कब्जा वो चाहे किसी का भी हो। हमने वोटर लिस्ट देखकर नहीं, हमारे राजस्व के अभिलेखों को देखकर उन पर कार्रवाई की है। मैं कहना चाहता हूं और मैं बार बार कह रहा हूं, मेरे भी दो बेटे हैं और मैं जब उनको देखता हूं तो मैं सोचता हूं कि जैसे मेरे दो बेटे हैं वैसे ही मेरी देवभूमि के सभी बच्चे हैं। मैं मानता हूं कि मेरे देवभूमि के सभी बच्चों को सुरक्षित उत्तराखंड मिलना चाहिए।
यूसीसी लाने वाला देश का पहला राज्य उत्तरखंड बना, इसके पीछे क्या प्रेरणा थी?
यूसीसी एक श्रेष्ठ भारत की कल्पना को साकार करने की शुरुआत है। यह हमारी जो विचारधारा है उस विचारधारा की तीन चार प्रमुख अवधारणाएं थी कि उनको धरातल पर उतारना है। उनमें से एक यूसीसी था। हमने 2022 के चुनाव में उत्तराखंड की जनता को वचन दिया था कि हमारी सरकार बनेगी तो हम यूसीसी को लागू करेंगे। उस समय लोग कहते थे कि कैसे लागू होगा ये तो बस घोषणा में बोल दिया है। हमने जो वचन दिया था उस वचन को हमने हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में धरातल पर उतारा और आज यूसीसी उत्तराखंड में लागू हो गया और लागू होने के बाद पूरे देश में लागू होने की दिशा में आगे बढ़ गया है।
जिस दिन यूसीसी का ड्राफ्ट हम बना रहे थे, जिस दिन हमने विधेयक प्रस्तुत किया था उस दिन हमने कहा था कि ये यूसीसी की जो गंगा है वो मां गंगा की तरह आने वाले समय में पूरे देश की सभी राज्यों को लाभ देगी।
12:00 PM, 24-Jun-2026
'कोई पेपर लीक का मामला नहीं आया है'
नकल माफिया पर बोलते हुए सीएम धामी ने कहा, हमारे यहां पिछले चार वर्षों में एक भी नकल का मामला सामने नहीं आया है। कोई पेपर लीक का मामला नहीं आया है। पिछले चार वर्षों में 33 हजार नियुक्तियां हमारे राज्य के युवाओं को मिली हैं। बिना नकल के यह सब हुआ है। हमारे यहां देश का सबसे सख्त नकल का कानून है। 100 से ज्यादा नकल माफियाओं को जेल की सलाखों के पीछे भेजने का काम किया।'11:47 AM, 24-Jun-2026
'किसी भी सरकार के लिए किसी भी प्रशासन के लिए आपदा एक ऐसा विषय होता है'
सीएम धामी ने कहा कि किसी भी सरकार के लिए किसी भी प्रशासन के लिए आपदा एक ऐसा विषय होता है। आपदा आती चाहे जैसे भी हो और इसके लिए कोई जिम्मेदार नहीं होता है लेकिन उस समय जो लोग सरकार में है, प्रशासन में हैं या जिम्मेदारी के लिए चुने गए हैं। कई बार उन पर गुस्सा भी निकलता है, लेकिन कई बार इस घड़ी में लोगों ने यह भी देखा कि किस तरह सभी ने मिलकर काम किया।11:45 AM, 24-Jun-2026