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Basant Panchami 2026: शुभ योग में वसंत पंचमी, जानें देवी सरस्वती को प्रसन्न करने के सरल उपाय
Basant Panchami 2026 Puja Vidhi Saraswati Puja Muhurat Live in Hindi: वसंत पंचमी के अवसर पर शुभ मुहूर्त में सरस्वती माता की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस विशेष समय में की गई पूजा से मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। सरस्वती पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त अब समाप्त होने वाला है और इसमें केवल थोड़ा ही समय शेष रह गया है, ऐसे में श्रद्धालुओं को शीघ्र ही पूजा संपन्न कर लेनी चाहिए।
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Basant Panchami 2026 Upay: वसंत पंचमी उपाय
- प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें, मां सरस्वती के सामने दीपक जलाएं और मंत्र 21/51/108 बार जाप करें।
- नारियल, पीली चुनरी और कलावा अर्पित करें, इससे पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम बढ़ता है।
- मां सरस्वती को हल्दी का तिलक लगाकर पीले फूल, फल, वस्त्र और मिठाई अर्पित करें।
- देवी के वैदिक मंत्रों का श्रद्धा से जाप करें, यह विद्या, बुद्धि और संपूर्ण सफलता दिलाता है।
वसंत पंचमी पर करोड़ों श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम स्नान किया
प्रयागराज में माघ मेले के दौरान बसंत पंचमी स्नान पर्व पर शुक्रवार को दोपहर 12 बजे तक 2.10 करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई। मेला प्राधिकरण के अधिकारी के अनुसार, रात 12 बजे से ही श्रद्धालुओं का आगमन और स्नान जारी था, और बसंत पंचमी तक भारी संख्या में लोगों ने आस्था का प्रदर्शन किया।
Basant Panchami Chalisa Path: बसंत पंचमी पर करें सरस्वती चालीसा का पाठ
॥ दोहा ॥
जनक जननि पद कमल रज,निज मस्तक पर धारि।बन्दौं मातु सरस्वती,बुद्धि बल दे दातारि॥
पूर्ण जगत में व्याप्त तव,महिमा अमित अनंतु।रामसागर के पाप को,मातु तुही अब हन्तु॥
॥ चौपाई ॥
जय श्री सकल बुद्धि बलरासी। जय सर्वज्ञ अमर अविनासी॥
जय जय जय वीणाकर धारी। करती सदा सुहंस सवारी॥
रूप चतुर्भुजधारी माता। सकल विश्व अन्दर विख्याता॥
जग में पाप बुद्धि जब होती। जबहि धर्म की फीकी ज्योती॥
तबहि मातु ले निज अवतारा। पाप हीन करती महि तारा॥
बाल्मीकि जी थे बहम ज्ञानी। तव प्रसाद जानै संसारा॥
रामायण जो रचे बनाई। आदि कवी की पदवी पाई॥
कालिदास जो भये विख्याता। तेरी कृपा दृष्टि से माता॥
तुलसी सूर आदि विद्धाना। भये और जो ज्ञानी नाना॥
तिन्हहिं न और रहेउ अवलम्बा। केवल कृपा आपकी अम्बा॥
करहु कृपा सोइ मातु भवानी। दुखित दीन निज दासहि जानी॥
पुत्र करै अपराध बहूता। तेहि न धरइ चित सुन्दर माता॥
राखु लाज जननी अब मेरी। विनय करूं बहु भाँति घनेरी॥
मैं अनाथ तेरी अवलंबा। कृपा करउ जय जय जगदंबा॥
मधु कैटभ जो अति बलवाना। बाहुयुद्ध विष्णू ते ठाना॥
समर हजार पांच में घोरा।फिर भी मुख उनसे नहिं मोरा॥
मातु सहाय भई तेहि काला। बुद्धि विपरीत करी खलहाला॥
तेहि ते मृत्यु भई खल केरी।पुरवहु मातु मनोरथ मेरी॥
चंड मुण्ड जो थे विख्याता।छण महुं संहारेउ तेहि माता॥
क्तबीज से समरथ पापी। सुर-मुनि हृदय धरा सब कांपी॥
काटेउ सिर जिम कदली खम्बा। बार बार बिनवउं जगदंबा॥
जग प्रसिद्ध जो शुंभ निशुंभा।छिन में बधे ताहि तू अम्बा॥
भरत-मातु बुधि फेरेउ जाई। रामचन्द्र बनवास कराई॥
एहि विधि रावन वध तुम कीन्हा। सुर नर मुनि सब कहुं सुख दीन्हा॥
को समरथ तव यश गुन गाना। निगम अनादि अनंत बखाना॥
विष्णु रूद्र अज सकहिं न मारी। जिनकी हो तुम रक्षाकारी॥
रक्त दन्तिका और शताक्षी। नाम अपार है दानव भक्षी॥
दुर्गम काज धरा पर कीन्हा। दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा॥
दुर्ग आदि हरनी तू माता। कृपा करहु जब जब सुखदाता॥
नृप कोपित जो मारन चाहै। कानन में घेरे मृग नाहै॥
सागर मध्य पोत के भंगे। अति तूफान नहिं कोऊ संगे॥
भूत प्रेत बाधा या दुःख में।हो दरिद्र अथवा संकट में॥
नाम जपे मंगल सब होई। संशय इसमें करइ न कोई॥
पुत्रहीन जो आतुर भाई। सबै छांड़ि पूजें एहि माई॥
करै पाठ नित यह चालीसा। होय पुत्र सुन्दर गुण ईसा॥
धूपादिक नैवेद्य चढावै। संकट रहित अवश्य हो जावै॥
भक्ति मातु की करै हमेशा। निकट न आवै ताहि कलेशा॥
बंदी पाठ करें शत बारा। बंदी पाश दूर हो सारा॥
करहु कृपा भवमुक्ति भवानी। मो कहं दास सदा निज जानी॥
॥ दोहा ॥
माता सूरज कान्ति तव,अंधकार मम रूप। डूबन ते रक्षा करहु,परूं न मैं भव-कूप॥
बल बुद्धि विद्या देहुं मोहि,सुनहु सरस्वति मातु। अधम रामसागरहिं तुम,आश्रय देउ पुनातु॥
Basant Panchami 2026 Live: घर पर कैसे करें सरस्वती पूजा
- पूजा स्थल पर चौकी रखें और उस पर पीला कपड़ा बिछाएं।
- चौकी पर मां सरस्वती की मूर्ति या फोटो स्थापित करें।
- चारों ओर गंगाजल छिड़कें और माता का स्नान कराएं।
- संकल्प लें और संकल्प मंत्र पढ़ें:"मम सर्वविद्या-बुद्धि-विवेक-वाक्शुद्धि-सिद्ध्यर्थं श्रीसरस्वतीदेव्याः पूजनं करिष्ये"
- सरस्वती मंत्र का जप करें और देवी का आवाहन करें।
- माता को फूलों की माला, सिंदूर, अक्षत और श्रृंगार का सामान अर्पित करें।
- माता के चरणों में गुलाल चढ़ाएं।
- मां को वस्त्र पहनाकर विधिपूर्वक पूजा करें।
- भोग (मिठाई, पकवान, फल) अर्पित करें।
- कथा पढ़ें और आरती गाएं।
Basant Panchami 2026 Live: बसंत पंचमी पर दान करें ये वस्तुएं
- पीले वस्त्र दान करना शुभ माना जाता है।
- पीला चावल या पीली दाल दान करना उत्तम फल देता है।
- गरीब बच्चों को किताबें, कॉपी और पेन देना मां सरस्वती को प्रसन्न करता है।
- दूध, दही, घी और केसर वाली मिठाइयाँ दान करना भी शुभ माना जाता है।
- ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन कराना विशेष पुण्यदायी होता है।
Basant Panchami 2026 Live: सरस्वती पूजा पर पुस्तक पढना शुभ या अशुभ?
सरस्वती पूजा के दिन किताबें पढ़ना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह दिन विद्या, ज्ञान और बुद्धि की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। लेकिन पूजा के समय किताबों को पढ़ने के बजाय माता के चरणों में रखकर पूजन करना अधिक उचित होता है। पूजा संपन्न होने के बाद इन किताबों से पढ़ाई, लेखन या अध्ययन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है और मां सरस्वती की कृपा बनी रहती है।
Basant Panchami 2026 Live: मां सरस्वती को चढ़ाए जाने वाले फल और प्रसाद
बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को प्रसाद के रूप में विभिन्न खाद्य पदार्थ और फल अर्पित किए जाते हैं। इनमें मुख्य रूप से बेर, गाजर, खिचड़ी, बूंदी, गुड़ वाले चावल और पंचामृत शामिल होते हैं। ये सभी पदार्थ मौसमी और सात्विक माने जाते हैं और माता को अर्पित करने से ज्ञान, बुद्धि और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
Basant Panchami 2026 Live: मां सरस्वती को प्रिय फूल
मां सरस्वती को सफेद और पीले रंग के फूल सबसे ज्यादा पसंद हैं, क्योंकि ये रंग ज्ञान, शुद्धता और सात्विकता का प्रतीक माने जाते हैं। इसलिए पूजा के दौरान आप उन्हें मोगरा, गंधराज, चांदनी, सदाबहार, अमरलीली, चंपा, लिली, रातरानी, या डेज़ी जैसे फूल अर्पित कर सकते हैं।
Saraswati Murti Ki Disha: मां सरस्वती की मूर्ति किस दिशा में रखें
- मां सरस्वती की मूर्ति पूर्व दिशा में रखें।
- घर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापना करने से धन-संपत्ति और करियर में अवसर बढ़ते हैं।
- उत्तर दिशा में मूर्ति रखने से सुख-समृद्धि बढ़ती है और घर का वातावरण सकारात्मक रहता है।
- मूर्ति कमल के फूल पर बैठी हुई होनी चाहिए, यह एकाग्रता और ज्ञान का प्रतीक है।
- चेहरे पर प्रसन्नता का भाव होना आवश्यक है।
- दो हाथों में वीणा होनी चाहिए, जो संगीत, कला और बौद्धिक कौशल का प्रतीक है।
- अन्य हाथों में पुस्तकें या शास्त्र होने चाहिए, जो शिक्षा और ज्ञान का महत्व दर्शाते हैं।
सरस्वती पूजा के दौरान इन वस्तुओं का पूजन
- पूजा के समय किताबें, कॉपी, पेन और वाद्य यंत्र माता के पास रखें।
- इन वस्तुओं पर फूल और अक्षत अर्पित करें।
- ऐसा करने से पढ़ाई और कला में सफलता मिलने की मान्यता है।
- पूजा के बाद इन्हीं वस्तुओं से पढ़ाई या अभ्यास शुरू करना शुभ माना जाता है।