Navratri 2026 : कल शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन, मां ब्रह्मचारिणी की होगी आराधना, जानें शुभ मुहूर्त
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Sun, 11 Oct 2026 02:56 PM IST
मेघा कुमारी
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: मेघा कुमारी
Updated Sun, 11 Oct 2026 02:56 PM IST
खास बातें
Shardiya Navratri 2026 Live Ghatasthapana Muhurat in Hindi: शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्तूबर 2026 से हो चुका है। नवरात्रि के पहले दिन भक्तों ने कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की। अब कल, 12 अक्तूबर को नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाएगी। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में भक्त व्रत रखकर, मंत्र जाप और विधि-विधान से माता रानी की आराधना करते हैं।
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Shardiya Navratri 2026
- फोटो : अमर उजाला AI
लाइव अपडेट
02:54 PM, 11-Oct-2026
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए जपें ये मंत्र
मां ब्रह्मचारिणी का सरल पूजा मंत्र
“ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥”
मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान मंत्र
“दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥”
मां ब्रह्मचारिणी का स्तुति मंत्र
“या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
02:46 PM, 11-Oct-2026
कल नवरात्रि का दूसरा दिन
नवरात्रि के पहले दिन भक्तों ने कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की। वहीं, कल 12 अक्तूबर को नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी। इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 29 मिनट से दोपहर 12 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से तप, संयम और धैर्य का आशीर्वाद मिलता है।
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02:30 PM, 11-Oct-2026
शारदीय नवरात्र का महत्व
शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है। जिनमें प्रथम दिन शैलपुत्री: पर्वतराज हिमालय की पुत्री। वृषभ पर सवार। स्थिरता और मन की दृढ़ता प्रदान करती हैं। द्वितीय ब्रह्मचारिणी: कठोर तपस्या का प्रतीक। ज्ञान, वैराग्य और संयम की अधिष्ठात्री हैं। तृतीय चंद्रघंटा: मस्तक पर अर्धचंद्र से सुशोभित। इनकी आराधना से भय का नाश और शत्रु बाधा दूर होती है। चतुर्थ कूष्मांडा: अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की उत्पत्ति करने वाली। आयु, यश और आरोग्य देने वाली हैं।पंचम स्कंदमाता: भगवान कार्तिकेय की माता। संतान सुख और वात्सल्य की प्रदायिनी हैं। षष्ठम कात्यायनी: महर्षि कात्यायन की पुत्री के रूप में अवतरित। दांपत्य जीवन में सुख और शत्रुओं पर विजय दिलाती हैं। सप्तम देवी दुर्गा कालरात्रि अंधकार का नाश करने वाली हैं। भक्तों को अभय प्रदान कर ग्रह बाधा को दूर करती हैं।अष्टम महागौरी: गौर वर्ण, श्वेत वस्त्र धारिणी। पापों का क्षय कर शुद्धता और समृद्धि देती हैं। नवम सिद्धिदात्री: सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। इनकी कृपा से साधक को मोक्ष और ज्ञान की प्राप्ति होती है।02:12 PM, 11-Oct-2026
नवरात्रि में इन बातों का रखें ध्यान
- नवरात्रि के दौरान पूजा स्थल की साफ-सफाई रखें और श्रद्धापूर्वक मां दुर्गा की आराधना करें।
- यदि कलश स्थापना कर रहे हैं, तो उसकी देखभाल और पूजा नियमित रूप से करें।
- व्रत रखने वाले लोग अपनी सेहत और क्षमता के अनुसार व्रत का पालन करें।
- पूजा-पाठ में परिवार की परंपराओं और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं का ध्यान रखें।
- इस तरह शारदीय नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा की भक्ति, पूजा और साधना के लिए विशेष माने जाते हैं।
- घटस्थापना से लेकर महानवमी और फिर विजयादशमी तक पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ यह पर्व मनाया जाएगा।
01:56 PM, 11-Oct-2026
दुर्गा अष्टमी और महानवमी पर होंगे विशेष अनुष्ठान
नवरात्रि के आठवें दिन दुर्गा अष्टमी और नौवें दिन महानवमी का विशेष महत्व होता है। इन दिनों कई घरों में कन्या पूजन किया जाता है। छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें भोजन कराया जाता है। इसके साथ ही श्रद्धा के अनुसार उपहार और दक्षिणा दी जाती है। महानवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। कई श्रद्धालु इस दिन हवन और कन्या पूजन के साथ अपने नवरात्रि व्रत का समापन करते हैं। हालांकि, अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन और व्रत पारण की परंपरा परिवार की मान्यता के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
01:33 PM, 11-Oct-2026
नवरात्रि में सात्विक भोजन करने का क्या महत्व है?
नवरात्रि के दौरान सात्विक भोजन का उद्देश्य पूजा-पाठ के साथ-साथ संयम और अनुशासन बनाए रखना माना जाता है। आमतौर पर इस दौरान हल्का, ताजा और कम मसाले वाला भोजन पसंद किया जाता है। फल, दूध, दही, मेवे और कुछ विशेष अनाज या कंद का सेवन व्रत के नियमों के अनुसार किया जाता है। संतुलित और आसानी से पचने वाला भोजन रोजमर्रा की दिनचर्या में भी उपयोगी हो सकता है। हालांकि, सात्विक भोजन का मतलब केवल सादा खाना नहीं है, बल्कि भोजन की गुणवत्ता, मात्रा, ताजगी और शरीर की जरूरतों का ध्यान रखना भी जरूरी है। नवरात्रि में कुछ लोग नौ दिन तक व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग पहले और अंतिम दिन या केवल अष्टमी-नवमी पर उपवास करते हैं। ऐसे में हर व्यक्ति के लिए एक जैसा खानपान जरूरी नहीं है। व्रत की अवधि और भोजन का चुनाव अपनी दिनचर्या, स्वास्थ्य और पारिवारिक परंपराओं को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
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01:13 PM, 11-Oct-2026
नवरात्रि में प्याज और लहसुन क्यों नहीं खाते?
हिंदू धर्म में भोजन को केवल शरीर की जरूरत नहीं, बल्कि मन और व्यवहार से भी जोड़कर देखा जाता है। पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं में नवरात्रि के दौरान सात्विक भोजन करने पर जोर दिया जाता है, ताकि साधक पूजा-पाठ और ध्यान में मन लगा सके। इसी कारण अनेक परिवारों में इन नौ दिनों तक प्याज और लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता। पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब भगवान विष्णु मोहिनी रूप में देवताओं को अमृत बांट रहे थे, तब स्वर्भानु नामक असुर देवता का रूप धारण करके देवताओं की पंक्ति में बैठ गया। उसने अमृत पी लिया, लेकिन सूर्य और चंद्रमा ने उसकी पहचान उजागर कर दी। इसके बाद भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। मान्यता है कि अमृत की कुछ बूंदें धरती पर गिरने से प्याज और लहसुन उत्पन्न हुए। इस कथा की अलग-अलग धार्मिक व्याख्याएं मिलती हैं। कुछ परंपराओं में प्याज और लहसुन को इसी कारण पूजा और सात्विक आहार से दूर रखा जाता है। हालांकि, यह एक पौराणिक मान्यता है, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उत्पत्ति की कहानी नहीं।01:05 PM, 11-Oct-2026
किस दिन कौन सा रंग पहनना होगा शुभ?
शारदीय नवरात्रि 2026
- फोटो : अमर उजाला AI
12 अक्तूबर 2026 - नवरात्रि का दूसरा दिन, मां ब्रह्मचारिणी पूजा, शुभ रंग: सफेद
13 अक्तूबर 2026 - नवरात्रि का तीसरा दिन, मां चंद्रघंटा पूजा, शुभ रंग: लाल
14 अक्तूबर 2026 - नवरात्रि का चौथा दिन, मां कूष्मांडा पूजा, शुभ रंग: नीला
15 अक्तूबर 2026- नवरात्रि का पांचवां दिन, मां स्कंदमाता पूजा, शुभ रंग: पीला
16 अक्तूबर 2026 - नवरात्रि का छठा दिन, षष्ठी पूजा और मां कात्यायनी पूजा, शुभ रंग: हरा
17 अक्तूबर 2026- नवरात्रि का सातवां दिन, सप्तमी पूजा और मां कालरात्रि पूजा, शुभ रंग: काला
18 अक्तूबर 2026 - नवरात्रि का आठवां दिन, अष्टमी पूजा, शुभ रंग: बैंगनी
19 अक्तूबर 2026 - नवरात्रि का नौवां दिन, नवमी पूजा, शुभ रंग: मोरपंखी हरा
12:51 PM, 11-Oct-2026
दुर्गा अष्टमी और महानवमी पर होंगे विशेष अनुष्ठान
नवरात्रि के आठवें दिन दुर्गा अष्टमी और नौवें दिन महानवमी का विशेष महत्व होता है। इन दिनों कई घरों में कन्या पूजन किया जाता है। छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें भोजन कराया जाता है। इसके साथ ही श्रद्धा के अनुसार उपहार और दक्षिणा दी जाती है। महानवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। कई श्रद्धालु इस दिन हवन और कन्या पूजन के साथ अपने नवरात्रि व्रत का समापन करते हैं। हालांकि, अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन और व्रत पारण की परंपरा परिवार की मान्यता के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
12:35 PM, 11-Oct-2026