Anuppur News: फर्जी दस्तावेजों से ITI में प्रवेश लेने वाले 20 आरोपियों को 3-3 साल की सजा, अर्थदंड भी लगाया
अनूपपुर की अदालत ने आईटीआई जैतहरी में फर्जी अंकसूचियों से प्रवेश लेने के मामले में 19 दोषियों को 3-3 साल की कठोर कारावास और 5-5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जांच में फर्जी दस्तावेजों का उपयोग साबित हुआ। यह फैसला शिक्षा क्षेत्र में धोखाधड़ी रोकने का संदेश देता है।
विस्तार
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश पंकज जायसवाल की अदालत ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) जैतहरी में फर्जी अंकसूचियों के जरिए प्रवेश लेने के मामले में दोषी पाए गए 20 आरोपियों को 3-3 साल के कठोर कारावास और 5-5 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। मामले में पैरवी जिला लोक अभियोजक पुष्पेंद्र कुमार मिश्रा ने की।
मामले का विवरण
आईटीआई जैतहरी के अधीक्षक ने 17 अप्रैल 2014 को थाना जैतहरी में शिकायत दर्ज कराई थी कि वर्ष 2012-13 के कुछ छात्रों ने फर्जी अंकसूचियों का उपयोग कर षड्यंत्रपूर्वक संस्थान में प्रवेश लिया। जांच के दौरान इन दस्तावेजों को फर्जी पाया गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत मामला दर्ज किया।
जांच और न्यायालय की कार्रवाई
मामले की विस्तृत जांच और अनुसंधान के बाद अभियोग-पत्र अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने साबित किया कि आरोपियों ने फर्जी अंकसूचियों का उपयोग कर धोखाधड़ी की। इसके आधार पर अदालत ने सभी आरोपियों, जिनमें राघवेन्द्र कुमार, सुरेश सिंह राठौर, झल्लू सिंह उर्फ मनोज राठौर, रामखेलावन राठौर, उतेन्द्र सिंह राठौर, रवि सिंह राठौर, संदीप कुमार, जितेन्द्र सिंह, प्रवीण कुमार द्विवेदी, शकुन राठौर, बीना देवी कोल, अमर सिंह राठौर, प्रकाश कुमार केवट, मनोज कुमार राठौर, लीलाधर, अनिल कुमार, संतोष कुमार राठौर, मनोज कुमार सिंह राठौर एवं चरण सिंह राठौर शामिल हैं, को दोषी करार दिया।
सजा और प्रभाव
अदालत ने सभी दोषियों को 3-3 साल के कठोर कारावास और 5-5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष ने इस सजा को न्यायिक प्रक्रिया की सफलता बताया और कहा कि इस फैसले से ऐसे मामलों में सख्ती बरतने का संदेश जाएगा।

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