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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Balaghat rice case: No 1160 crore scam but major revelation of a breach in the supply chain 50 people question

बालाघाट चावल मामला: 1160 करोड़ का घोटाला नहीं, सप्लाई चेन में सेंध का बड़ा खुलासा; 50 लोगों से की गई पूछताछ

Tue, 14 Jul 2026 09:39 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाट Published by: शबाहत हुसैन Updated Tue, 14 Jul 2026 09:39 PM IST
सार

बालाघाट चावल मामले में 1160 करोड़ रुपये के घोटाले का दावा जांच में पुष्ट नहीं हुआ। जांच का फोकस सरकारी चावल के कथित डायवर्जन, सप्लाई चेन की खामियों और ट्रांसपोर्टर, राइस मिल संचालकों व वेयरहाउस कर्मचारियों के संभावित नेटवर्क पर है।

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Balaghat rice case: No 1160 crore scam but major revelation of a breach in the supply chain 50 people question
बालाघाट मामले में डायवर्जन और सिंडिकेट की जांच तेज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बहुचर्चित चावल मामले को केवल 'चोरी' या 'गबन' के नजरिए से देखना इस पूरे तंत्र की गंभीर खामियों को नजरअंदाज करना होगा। पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा और भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अधिकारियों के बयानों से स्पष्ट है कि मीडिया में प्रचारित 1160 करोड़ रुपये के घोटाले का दावा तथ्यों से परे है। असली मामला किसी एक बड़ी रकम का नहीं, बल्कि सरकारी सप्लाई चेन में सेंध, अवैध डायवर्जन और निगरानी व्यवस्था की कमजोरियों का है।

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सप्लाई चेन में सेंध, रूट डायवर्जन का खेल
पूरे मामले की जड़ सरकारी चावल के कथित डायवर्जन में दिखाई देती है। 3 जून को वारासिवनी स्थित संचेती राइस मिल के पास पकड़ा गया ट्रक इसकी अहम कड़ी बना। यह फोर्टिफाइड चावल बालाघाट स्थित एफसीआई गोदाम से छिंदवाड़ा के एथेनॉल प्लांट के लिए रवाना हुआ था। नियमानुसार ट्रक को सीधे प्लांट पहुंचना था, लेकिन वह राइस मिल परिसर में मिला। इससे आशंका मजबूत हुई कि परिवहन के दौरान सरकारी अनाज का रूट बदलकर उसे दूसरे स्थान पर खपाने या री-साइकिल करने का प्रयास किया जा रहा था।
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जांच का दायरा बढ़ा, 17 ट्रक और 50 से अधिक लोगों से पूछताछ
एक ट्रक से शुरू हुई जांच अब बड़े नेटवर्क तक पहुंच चुकी है। अब तक 17 ट्रक जब्त किए जा चुके हैं, जबकि 50 से अधिक लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में ट्रांसपोर्टर, राइस मिल संचालक, वेयरहाउस कर्मचारी और बिचौलियों की भूमिका की जांच की जा रही है। 13 से अधिक लोगों के खिलाफ नामजद कार्रवाई भी की गई है। इससे संकेत मिलते हैं कि सरकारी अनाज के परिवहन और भंडारण प्रक्रिया में कई स्तरों पर अनियमितताएं हुई हैं।

प्रशासनिक लापरवाही भी जांच के घेरे में
भले ही 1160 करोड़ रुपये की चोरी का दावा सही न हो, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर गंभीर खामियों से इनकार नहीं किया जा सकता। वेयरहाउसों को नोटिस जारी किए गए हैं और स्टॉक प्रबंधन से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक की जांच की जा रही है। जिला प्रशासन, पुलिस और संबंधित एजेंसियां अब डिजिटल रूट ट्रैकिंग, जीपीएस मॉनिटरिंग और स्टॉक ऑडिट के जरिए पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

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