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MP News: बालाघाट में नक्सलियों की साजिश नाकाम, सीआरपीएफ ने जंगल से विस्फोटक डंप बरामद किया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाट
Published by: बालाघाट ब्यूरो
Updated Sat, 03 Jan 2026 04:53 PM IST
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सार
बालाघाट जिले के रूपझर थाना क्षेत्र में सीआरपीएफ की 123 बटालियन ने नक्सलियों का विस्फोटक डंप बरामद किया है। समर्पित नक्सलियों की सूचना पर जंगल में सघन तलाशी अभियान चला। हाई एक्सप्लोसिव समेत खतरनाक सामग्री जब्त की गई। यह नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मानी जा रही है।
जब्त किया गया डंप।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के अंतिम चरण में बालाघाट जिले में सुरक्षाबलों को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। समर्पित नक्सलियों से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर सीआरपीएफ की 123 बटालियन ने शनिवार को रूपझर थाना क्षेत्र अंतर्गत दुगलई आमानाला के घने जंगलों में सघन तलाशी अभियान चलाकर नक्सलियों का एक विस्फोटक डंप बरामद किया। नक्सलियों ने इस डंप को प्लास्टिक केन में छिपाकर रखा था, जिसका इस्तेमाल सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने की साजिश के तहत किया जाना था।
हाई एक्सप्लोसिव समेत खतरनाक सामग्री जब्त
सुरक्षाबलों को मौके से हाई एक्सप्लोसिव, विस्फोटक सामग्री और नक्सली गतिविधियों में प्रयुक्त होने वाला अन्य सामान मिला है। बरामद सामग्री को अत्यंत सावधानी के साथ कब्जे में लिया गया। क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद बम निरोधक दस्ते की मदद से जांच की गई, ताकि आसपास के ग्रामीण इलाकों को किसी भी प्रकार का खतरा न हो।
समर्पण के बाद खुल रहे नक्सल नेटवर्क के राज
पुलिस अधिकारियों के अनुसार हाल के महीनों में कई नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनके जरिए नक्सलियों द्वारा वर्षों पहले जंगलों में छिपाकर रखे गए हथियारों और विस्फोटक डंपों की अहम जानकारियां सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में दुगलई आमानाला से यह डंप बरामद हुआ है। अब बालाघाट पुलिस और सुरक्षाबल समर्पित नक्सलियों से लगातार पूछताछ कर अन्य संभावित ठिकानों की जानकारी जुटा रहे हैं।
तय समय से पहले नक्सल मुक्त हुआ बालाघाट
भारत सरकार ने बालाघाट जिले को 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन पुलिस और सुरक्षाबलों की संयुक्त रणनीति, बेहतर खुफिया तंत्र और ग्रामीणों के सहयोग से दिसंबर 2025 में ही बालाघाट को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया। इसके साथ ही प्रदेश में नक्सलियों की गतिविधियां लगभग समाप्त हो चुकी हैं।
पहले भी हो चुकी है बड़ी बरामदगियां
आईजी संजय कुमार के नेतृत्व में चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान इससे पहले भी कई बड़ी सफलताएं मिली हैं। आत्मसमर्पित नक्सलियों और उनके सहयोगियों की निशानदेही पर हथियार, विस्फोटक, बड़ी मात्रा में नकदी और दैनिक उपभोग की सामग्री बरामद की जा चुकी है। इन कार्रवाइयों से नक्सलियों की आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है।
ये भी पढ़ें- Indore Diarrhea Outbreak: भागीरथपुरा में कांग्रेस-भाजपा कार्यकर्ता भिड़े, तीन थानों की पुलिस ने संभाली स्थिति
जंगलों में अब भी जारी सघन सर्च अभियान
हालांकि बालाघाट को नक्सल मुक्त घोषित किया जा चुका है, लेकिन सुरक्षाबल किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरत रहे हैं। दुर्गम और संवेदनशील जंगल क्षेत्रों में लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं, ताकि नक्सलियों के पुराने ठिकानों, छिपे डंपों और विस्फोटक अवशेषों को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
सुरक्षा बलों की सतर्कता से ग्रामीणों में भरोसा
सुरक्षाबलों की सक्रियता से ग्रामीणों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब जंगल और ग्रामीण इलाकों में पहले जैसी दहशत नहीं रही। प्रशासन और पुलिस की इस सख्ती से यह साफ हो गया है कि बालाघाट ही नहीं, पूरा मध्य प्रदेश अब नक्सलवाद के साये से मुक्त हो चुका है।
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हाई एक्सप्लोसिव समेत खतरनाक सामग्री जब्त
सुरक्षाबलों को मौके से हाई एक्सप्लोसिव, विस्फोटक सामग्री और नक्सली गतिविधियों में प्रयुक्त होने वाला अन्य सामान मिला है। बरामद सामग्री को अत्यंत सावधानी के साथ कब्जे में लिया गया। क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद बम निरोधक दस्ते की मदद से जांच की गई, ताकि आसपास के ग्रामीण इलाकों को किसी भी प्रकार का खतरा न हो।
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समर्पण के बाद खुल रहे नक्सल नेटवर्क के राज
पुलिस अधिकारियों के अनुसार हाल के महीनों में कई नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनके जरिए नक्सलियों द्वारा वर्षों पहले जंगलों में छिपाकर रखे गए हथियारों और विस्फोटक डंपों की अहम जानकारियां सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में दुगलई आमानाला से यह डंप बरामद हुआ है। अब बालाघाट पुलिस और सुरक्षाबल समर्पित नक्सलियों से लगातार पूछताछ कर अन्य संभावित ठिकानों की जानकारी जुटा रहे हैं।
तय समय से पहले नक्सल मुक्त हुआ बालाघाट
भारत सरकार ने बालाघाट जिले को 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन पुलिस और सुरक्षाबलों की संयुक्त रणनीति, बेहतर खुफिया तंत्र और ग्रामीणों के सहयोग से दिसंबर 2025 में ही बालाघाट को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया। इसके साथ ही प्रदेश में नक्सलियों की गतिविधियां लगभग समाप्त हो चुकी हैं।
पहले भी हो चुकी है बड़ी बरामदगियां
आईजी संजय कुमार के नेतृत्व में चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान इससे पहले भी कई बड़ी सफलताएं मिली हैं। आत्मसमर्पित नक्सलियों और उनके सहयोगियों की निशानदेही पर हथियार, विस्फोटक, बड़ी मात्रा में नकदी और दैनिक उपभोग की सामग्री बरामद की जा चुकी है। इन कार्रवाइयों से नक्सलियों की आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है।
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जंगलों में अब भी जारी सघन सर्च अभियान
हालांकि बालाघाट को नक्सल मुक्त घोषित किया जा चुका है, लेकिन सुरक्षाबल किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरत रहे हैं। दुर्गम और संवेदनशील जंगल क्षेत्रों में लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं, ताकि नक्सलियों के पुराने ठिकानों, छिपे डंपों और विस्फोटक अवशेषों को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
सुरक्षा बलों की सतर्कता से ग्रामीणों में भरोसा
सुरक्षाबलों की सक्रियता से ग्रामीणों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब जंगल और ग्रामीण इलाकों में पहले जैसी दहशत नहीं रही। प्रशासन और पुलिस की इस सख्ती से यह साफ हो गया है कि बालाघाट ही नहीं, पूरा मध्य प्रदेश अब नक्सलवाद के साये से मुक्त हो चुका है।
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