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Balaghat News: तीन साल बाद मां-बाप से मिली आत्मसमर्पित नक्सली सुनीता, मुस्कान के साथ छलके आंसू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाट
Published by: बालाघाट ब्यूरो
Updated Tue, 04 Nov 2025 10:46 PM IST
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सार
बालाघाट में नक्सली संगठन छोड़ चुकी सुनीता ने तीन साल बाद माता-पिता से मिलकर नई ज़िंदगी की शुरुआत की। नक्सलियों ने उसे जबरन दलम में शामिल किया था। आत्मसमर्पण के बाद पुलिस ने 50 हजार की प्रोत्साहन राशि दी और पुनर्वास की तैयारी शुरू की। एसपी ने नक्सली विचारधारा को खोखला बताया।
बालाघाट में नक्सली संगठन छोड़ चुकी सुनीता परिवार से मिली
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कभी बंदूक थामने को मजबूर हुई सुनीता अब नई ज़िंदगी की शुरुआत कर रही है। मंगलवार को उसने तीन साल बाद अपने माता-पिता को गले लगाया तो आंखों से आंसू छलक पड़े, पर चेहरे पर सुकून की मुस्कान थी। यह भावुक मुलाकात बालाघाट पुलिस ने आयोजित कराई।
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सुनीता ने 1 नवंबर को आत्मसमर्पण किया था। पुलिस ने मंगलवार को उसके माता-पिता को बीजापुर से बुलवाकर आमने-सामने कराया। सरपंच चन्नुलाल पुरियाम भी इस मौके पर मौजूद थे।
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जबरदस्ती उठाकर ले गए थे नक्सली
सरपंच ने छत्तीसगढ़ी गोंडी भाषा का अनुवाद करते हुए बताया कि सुनीता के माता-पिता ने कहा कि नक्सलियों ने बेटी को जबरन घर से उठा लिया था। अगर दलम में नहीं भेजी, तो बाकी दो बेटियों को भी ले जाएंगे, ऐसी धमकी दी गई थी। उन्होंने पुलिस को शुक्रिया कहा कि उनकी बेटी अब सुरक्षित है। सरपंच ने बताया कि गांव से चार लोग नक्सल संगठन में गए थे, जिनमें से सुनीता समेत दो लौट आए हैं, जबकि दो अभी भी जंगल में हैं।
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नई पहचान बनाने की तैयारी
फिलहाल सुनीता बालाघाट पुलिस की सुरक्षा में है। पुलिस उसके पुनर्वास की पूरी तैयारी कर रही है। पिता दसरू ओयाम ने बताया कि सुनीता की पढ़ाई नहीं हुई थी, उसका आधार कार्ड भी नहीं है। अब पुलिस उसकी पहचान और दस्तावेज़ बनवाने में मदद कर रही है। सरेंडर नीति के तहत पुलिस ने सुनीता को 50 हजार रुपए की शुरुआती प्रोत्साहन राशि दी है। आगे उसे नौकरी, कानूनी रियायतें और अन्य सुविधाएं नीति के मुताबिक दी जाएंगी।
एसपी बोले – नक्सली विचारधारा अब खोखली
एसपी आदित्य मिश्रा ने कहा कि सुनीता के माता-पिता की बातें साफ बताती हैं कि नक्सल विचारधारा खोखली हो चुकी है। अब कहीं भी सशस्त्र संघर्ष का औचित्य नहीं बचा है। जो नक्सली हथियार छोड़कर लोकतंत्र की राह चुनना चाहते हैं, उनका स्वागत है। उन्होंने कहा कि पुलिस सुनीता को सुरक्षित माहौल में नई ज़िंदगी शुरू करने में मदद करेगी। जहां वह रहना चाहेगी, वहीं उसका पुनर्वास किया जाएगा।

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