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Balaghat News: गणतंत्र दिवस पर लालबर्रा में विवादित नारे, राजनीतिक सरगर्मी तेज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाट
Published by: बालाघाट ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jan 2026 10:45 PM IST
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सार
बालाघाट के लालबर्रा में गणतंत्र दिवस पर कथित रूप से नाथूराम गोडसे समर्थन में नारेबाजी का वीडियो सामने आया है। कांग्रेस ने इसे गंभीर बताते हुए पुलिस में शिकायत की। पुलिस वीडियो की जांच कर रही है और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही गई है।
कांग्रेस ने दिया ज्ञापन
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विस्तार
बालाघाट जिले के लालबर्रा क्षेत्र में गणतंत्र दिवस के अवसर पर हुई कथित नारेबाजी ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक बहस छेड़ दी है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के समर्थन में लगाए गए नारों का वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे गंभीर मामला बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। प्रशासन ने जांच की बात कही है।
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कैसे सामने आया मामला
बताया जा रहा है कि 26 जनवरी को ग्राम बघोली गेट के पास कुछ युवक तिरंगा झंडा लेकर दोपहिया वाहनों पर घूम रहे थे। इसी दौरान उनके द्वारा विवादित नारे लगाए जाने का दावा किया जा रहा है। मौके पर मौजूद लोगों ने घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया।
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कांग्रेस ने सौंपा ज्ञापन
घटना के विरोध में 28 जनवरी को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी लालबर्रा और मध्य प्रदेश किसान कांग्रेस के पदाधिकारियों ने बैठक कर कार्रवाई की रणनीति बनाई। इसके बाद लालबर्रा थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया है कि राष्ट्रीय पर्व पर इस प्रकार के नारे लगाना स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत और राष्ट्रपिता के सम्मान के खिलाफ है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मनीराम भोयर ने कहा कि ऐसे कृत्य सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचा सकते हैं और प्रशासन को कड़ी कार्रवाई कर उदाहरण पेश करना चाहिए।
कानून व्यवस्था पर चिंता
स्थानीय लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय पर्वों पर समाज को जोड़ने वाले संदेश जाने चाहिए। इस तरह की घटनाएं अनावश्यक तनाव पैदा कर सकती हैं। कुछ सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर उचित कार्रवाई की जाए।
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पुलिस जांच में जुटी
लालबर्रा थाना पुलिस ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार वायरल वीडियो की जांच की जा रही है, साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि वीडियो कब और किन परिस्थितियों में बनाया गया। वीडियो में दिख रहे युवकों की पहचान करने की प्रक्रिया भी जारी है। प्रशासन का कहना है कि यदि जांच में नारेबाजी की पुष्टि होती है और कानून का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।
सोशल मीडिया की भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में सोशल मीडिया किसी भी स्थानीय घटना को तेजी से व्यापक मुद्दा बना देता है। ऐसे मामलों में तथ्यों की पुष्टि से पहले भावनात्मक प्रतिक्रियाएं भी बढ़ जाती हैं। इसलिए प्रशासनिक जांच और आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी होता है। फिलहाल क्षेत्र में शांति बनी हुई है, लेकिन मामले ने यह जरूर दिखाया है कि राष्ट्रीय प्रतीकों और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों से जुड़े विषय आज भी समाज में गहरी संवेदनशीलता रखते हैं।

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