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Cabinet: उद्योग, कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹54,926 करोड़ की योजनाओं को मंजूरी, जानिए एमएसपी पर क्या फैसला

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Wed, 18 Mar 2026 04:26 PM IST
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सार

बुधवार को पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ₹54,926 करोड़ की चार प्रमुख योजनाओं को मंजूरी दी गई। आइए इन फैसलों के बारे में विस्तार से जानें। 

Union Cabinet Narendra Modi Ashwini Vaishnaw BHAVYA Cotton MSP Infrastructure Hydro Power Scheme NH-927
कैबिनेट के फैसले - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की अहम बैठक में देश की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई बड़े फैसले लिए गए हैं। सरकार ने उद्योग, कृषि, सड़क निर्माण और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों को लक्षित करते हुए कुल 54,926 करोड़ रुपये के भारी-भरकम वित्तीय परिव्यय वाली चार प्रमुख योजनाओं पर मुहर लगाई है।

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यह कदम भारत के समग्र आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। बैठक के संपन्न होने के बाद सूचना व प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन फैसलों की विस्तृत जानकारी मीडिया के साथ साझा की।
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कैबिनेट के अहम फैसले ये रहे?

भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA): केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण योजना को मंजूरी दे दी है। 'भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य)' नामक इस केंद्रीय क्षेत्र की योजना के लिए 33,660 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया है। इस योजना के तहत देशभर में 100 निवेश-तैयार प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य उद्योगों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करना है।


केंद्र सरकार प्रति एकड़ एक करोड़ रुपये तक का वित्तीय सहयोग प्रदान करेगी। यह योजना छह साल की अवधि के लिए है, जो वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2031-32 तक चलेगी। औद्योगिक पार्क के लिए न्यूनतम 100 एकड़ क्षेत्र की आवश्यकता होगी। हालांकि, पूर्वोत्तर और पहाड़ी क्षेत्रों में यह सीमा 25 एकड़ रखी गई है। यह पहल देश में विनिर्माण और रोजगार सृजन को गति देगी।
 

कपास एमएसपी (2023-24):  कैबिनेट ने कपास सीजन 2023-24 के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) संचालन पर हुए 1,718 करोड़ रुपये के खर्च की प्रतिपूर्ति को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय किसानों को समर्थन देने के लिए लिया गया था, क्योंकि अक्तूबर 2023 से सितंबर 2024 तक चले इस सीजन में कपास की कीमतें एमएसपी से नीचे गिर गई थीं। सरकार ने भारतीय कपास निगम (सीसीआई) के माध्यम से किसानों से एमएसपी पर कपास की खरीद की।

इस खरीद से 7.25 लाख किसानों को सीधा लाभ मिला। कुल 33 लाख गांठें कपास खरीदी गईं। इन खरीदों के माध्यम से किसानों को कुल 11,712 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई। कपास सीजन 2023-24 में भारतीय किसानों ने कुल 325 लाख गांठें कपास का उत्पादन किया था।
 

राजमार्ग और इंफ्रास्ट्रक्चर (NH-927): राष्ट्रीय सड़क संपर्क को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, राष्ट्रीय राजमार्ग-927 के बाराबंकी से बहराइच खंड को 4-लेन बनाने के लिए 6,969 करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजना को कैबिनेट की स्वीकृति मिली है।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, 101.515 किलोमीटर की इस परियोजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश भर के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करना है।

आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने 6,969.04 करोड़ रुपये की लागत से हाइब्रिड एन्युटी मोड (एचएम) पर बाराबंकी से बहराइच तक 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे-927 के निर्माण को मंजूरी दे दी है।

इस परियोजना में सिविल कार्य की लागत लगभग 3,485.49 करोड़ रुपये है और भूमि अधिग्रहण के लिए अतिरिक्त 1,574.85 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस परियोजना से 36.54 लाख व्यक्ति-दिवस (प्रत्यक्ष) और 43.04 लाख व्यक्ति-दिवस (अप्रत्यक्ष) के नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
 

लघु पनबिजली विकास योजना: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को 2,585 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली एक लघु जलविद्युत विकास योजना को मंजूरी दी, इसका उद्देश्य 1,500 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विकास को बढ़ावा देना है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पत्रकारों को बताया, "2,585 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ लघु जलविद्युत विकास योजना को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है।"

मंत्री ने कहा कि पर्यावरण की दृष्टि से यह देश के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय है। इन परियोजनाओं को बिना बांध बनाए और लोगों को विस्थापित किए बिना, नदी के प्रवाह पर आधारित परियोजनाओं के रूप में विकसित किया जाएगा।

वैष्णव ने कहा कि देश में 7,133 स्थलों पर कुल 21,000 मेगावाट क्षमता वाली लघु जलविद्युत परियोजनाओं की अपार संभावनाएं हैं। वर्तमान में, देश में 1,196 स्थलों पर 5,100 मेगावाट की लघु जलविद्युत परियोजनाएं कार्यरत हैं।

इन परियोजनाओं की क्षमता 1 मेगावाट से 25 मेगावाट तक है। ये परियोजनाएं 2030-31 तक पांच वर्षों में कार्यान्वित की जाएंगी। इस योजना से लघु जलविद्युत परियोजनाओं में 15,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है।

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