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Bhopal News: आरजीपीवी में गड़बड़ियों के साए के बाद नए कुलपति की तलाश, राजभवन ने शुरू की आवेदन प्रक्रिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Fri, 02 Jan 2026 10:47 AM IST
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सार
आरजीपीवी में प्रशासनिक और अन्य गड़बड़ियों के आरोपों के बाद कुलपति के इस्तीफे से पद खाली हुआ, जिसके बाद अब नए कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है। राजभवन ने ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। नए कुलपति के सामने विश्वविद्यालय में पारदर्शिता बहाल करने, प्रशासनिक सुधार और शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूत करने की बड़ी चुनौती रहेगी।
आरजीपीवी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में लंबे समय से चल रहे विवादों और गड़बड़ियों के आरोपों के बाद अब नए कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है। राजभवन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार कुलपति पद के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 10 फरवरी 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। दरअसल, आरजीपीवी हाल के वर्षों में लगातार विवादों में रहा है। विश्वविद्यालय के प्रशासन, वित्तीय लेनदेन और शैक्षणिक प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इन्हीं आरोपों के बीच हाल ही में कुलपति ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद से विश्वविद्यालय का प्रशासन अस्थायी व्यवस्था के सहारे संचालित हो रहा है।
मूल्यांकन प्रक्रिया और प्रशासनिक फैसलों आपत्तियां आई थीं सामने
दरअसल, कुलपति के खिलाफ विश्वविद्यालय की आंतरिक कार्यप्रणाली, मूल्यांकन प्रक्रिया और प्रशासनिक फैसलों को लेकर गंभीर आपत्तियां सामने आई थीं। छात्र संगठनों ने इन मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया था। बढ़ते दबाव और विवाद की स्थिति को देखते हुए कुलपति ने पद छोड़ना उचित समझा। इसके बाद उच्च स्तर पर यह निर्णय लिया गया कि नए कुलपति की नियुक्ति पारदर्शी प्रक्रिया के तहत की जाए।
सरकार और राजभवन दोनों ही बेहद सतर्क
गौरतलब है कि आरजीपीवी प्रदेश का सबसे बड़ा तकनीकी विश्वविद्यालय है, जिससे सैकड़ों इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थान जुड़े हुए हैं। ऐसे में कुलपति की नियुक्ति को लेकर सरकार और राजभवन दोनों ही बेहद सतर्क नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि नए कुलपति के सामने विश्वविद्यालय की छवि सुधारने, प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने और शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूत करने की बड़ी चुनौती होगी।
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चार वर्ष का होगा कुलपति का कार्यकाल
राजभवन की अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि कुलपति की नियुक्ति राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अधिनियम 1998 के तहत गठित चयन समिति की अनुशंसा पर राज्यपाल द्वारा की जाएगी। नियुक्त कुलपति का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से चार वर्ष का होगा।अधिसूचना के मुताबिक कुलपति विश्वविद्यालय का सर्वोच्च शैक्षणिक और प्रशासनिक अधिकारी होगा। ऐसे में अभ्यर्थी से उच्च कोटि की शैक्षणिक योग्यता, मजबूत प्रशासनिक अनुभव, सत्यनिष्ठा, नैतिकता और संस्थागत प्रतिबद्धता की अपेक्षा की गई है। साथ ही, अभ्यर्थी का प्रौद्योगिक शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिष्ठित और ख्यातिप्राप्त होना अनिवार्य बताया गया है।
यह भी पढ़ें-भोपाल जिले में ग्राम पंचायत कांग्रेस समितियों का गठन शुरू, बूथ चलो, गांव चलो अभियान को रफ्तार
आवेदन प्रक्रिया दो चरणों में होगी पूरी
आवेदन के साथ उम्मीदवार को अपने शैक्षणिक, प्रशासनिक और शोध करियर का विस्तृत विवरण देना होगा। इसके अलावा यह घोषणा भी अनिवार्य होगी कि अभ्यर्थी के विरुद्ध लोकायुक्त, आर्थिक अपराध शाखा या किसी अन्य एजेंसी में किसी प्रकार की जांच या आपराधिक मामला लंबित नहीं है। वर्तमान में सेवा में कार्यरत अभ्यर्थियों को अपने नियुक्तिकर्ता से यह प्रमाण पत्र भी देना होगा कि उनके खिलाफ कोई विभागीय जांच लंबित नहीं है। आवेदन प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य होगा, जबकि दूसरे चरण में ऑनलाइन आवेदन की प्रति, जीवनवृत्त और सभी आवश्यक दस्तावेज पंजीकृत या स्पीड पोस्ट के माध्यम से राजभवन भेजने होंगे। बिना ऑनलाइन आवेदन के प्राप्त किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किए जाने की बात अधिसूचना में साफ तौर पर कही गई है।
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मूल्यांकन प्रक्रिया और प्रशासनिक फैसलों आपत्तियां आई थीं सामने
दरअसल, कुलपति के खिलाफ विश्वविद्यालय की आंतरिक कार्यप्रणाली, मूल्यांकन प्रक्रिया और प्रशासनिक फैसलों को लेकर गंभीर आपत्तियां सामने आई थीं। छात्र संगठनों ने इन मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया था। बढ़ते दबाव और विवाद की स्थिति को देखते हुए कुलपति ने पद छोड़ना उचित समझा। इसके बाद उच्च स्तर पर यह निर्णय लिया गया कि नए कुलपति की नियुक्ति पारदर्शी प्रक्रिया के तहत की जाए।
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सरकार और राजभवन दोनों ही बेहद सतर्क
गौरतलब है कि आरजीपीवी प्रदेश का सबसे बड़ा तकनीकी विश्वविद्यालय है, जिससे सैकड़ों इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थान जुड़े हुए हैं। ऐसे में कुलपति की नियुक्ति को लेकर सरकार और राजभवन दोनों ही बेहद सतर्क नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि नए कुलपति के सामने विश्वविद्यालय की छवि सुधारने, प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने और शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूत करने की बड़ी चुनौती होगी।
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चार वर्ष का होगा कुलपति का कार्यकाल
राजभवन की अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि कुलपति की नियुक्ति राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अधिनियम 1998 के तहत गठित चयन समिति की अनुशंसा पर राज्यपाल द्वारा की जाएगी। नियुक्त कुलपति का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से चार वर्ष का होगा।अधिसूचना के मुताबिक कुलपति विश्वविद्यालय का सर्वोच्च शैक्षणिक और प्रशासनिक अधिकारी होगा। ऐसे में अभ्यर्थी से उच्च कोटि की शैक्षणिक योग्यता, मजबूत प्रशासनिक अनुभव, सत्यनिष्ठा, नैतिकता और संस्थागत प्रतिबद्धता की अपेक्षा की गई है। साथ ही, अभ्यर्थी का प्रौद्योगिक शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिष्ठित और ख्यातिप्राप्त होना अनिवार्य बताया गया है।
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आवेदन प्रक्रिया दो चरणों में होगी पूरी
आवेदन के साथ उम्मीदवार को अपने शैक्षणिक, प्रशासनिक और शोध करियर का विस्तृत विवरण देना होगा। इसके अलावा यह घोषणा भी अनिवार्य होगी कि अभ्यर्थी के विरुद्ध लोकायुक्त, आर्थिक अपराध शाखा या किसी अन्य एजेंसी में किसी प्रकार की जांच या आपराधिक मामला लंबित नहीं है। वर्तमान में सेवा में कार्यरत अभ्यर्थियों को अपने नियुक्तिकर्ता से यह प्रमाण पत्र भी देना होगा कि उनके खिलाफ कोई विभागीय जांच लंबित नहीं है। आवेदन प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य होगा, जबकि दूसरे चरण में ऑनलाइन आवेदन की प्रति, जीवनवृत्त और सभी आवश्यक दस्तावेज पंजीकृत या स्पीड पोस्ट के माध्यम से राजभवन भेजने होंगे। बिना ऑनलाइन आवेदन के प्राप्त किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किए जाने की बात अधिसूचना में साफ तौर पर कही गई है।

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