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MP News: मध्य प्रदेश में 650 हेक्टेयर आदिवासी जमीन 14 साल में गैर-आदिवासियों ने खरीदी, कलेक्टर ने दी अनुमति!

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Fri, 27 Feb 2026 08:50 AM IST
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सार

मध्य प्रदेश में आदिवासियों के लिए आरक्षित जमीनों की अवैध खरीद‑बिक्री लगातार बढ़ रही है। पिछले 14 साल में 650 हेक्टेयर जमीन गैर‑आदिवासियों को बेची जा चुकी है।

MP News: 650 hectares of tribal land in Madhya Pradesh was purchased by non-tribals in 14 years, the collector
मध्य प्रदेश विधानसभा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्य प्रदेश में आदिवासियों के लिए आरक्षित जमीन का खूब खरीदी ब्रिकी हो रही हैं। 650 हेक्टेयर आदिवासियों की जमीन 14 साल में गैर आदिवासियों को बिकी है। प्रदेश के बुरहानुपर, इंदौर और खंडवा जिले में  2009 से 2023 तक आदिवासी जमीन गैर-आदिवासियों को बेची गई, यह जानकारी प्रदेश सरकार ने कांग्रेस विधायक बाला बच्चन द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। बुरहानपुर जिले में 66 मामलों में 396 हेक्टेयर जमीन बेची गई, जिसमें तत्कालीन कलेक्टर ने 64 मामलों में अनुमति दी थी। हालांकि सरकार ने उन कलेक्टरों के नाम सार्वजनिक नहीं किए।
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नेशनल ट्राइबल कमीशन की शिकायत पर उठे सवाल
कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा ने 4 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली स्थित नेशनल ट्राइबल कमीशन द्वारा प्रस्तुत शिकायत के आधार पर यह प्रश्न विधानसभा में उठाया। आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, डिंडोरी, जबलपुर, सिवनी, कटनी और उमरिया जिलों में 1,153 हेक्टेयर आदिवासी जमीन चार गैर-आदिवासियों को बेची गई। विधायक ने चारों खरीदारों के बैंकिंग लेनदेन की जांच की मांग की, लेकिन राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने बताया कि बैंकिंग लेनदेन की जांच अभी तक नहीं की गई है। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर शिकायत की जांच जारी है।

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यह कहता है कानून
सरकार ने अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि की सुरक्षा के लिए पांचवीं अनुसूची और पैसा एक्ट लागू किया हैं। इसमें बिना ग्रामसभा की अनुमति और सक्षम अधिकारी की सहमति के अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित जमीनों की बिक्री अवैध मानी जाती है।

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पूर्व सीएम ने भी लगाए थे गंभीर आरोप 
बता दें इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी डिंडौरी जिले में एक हजार एकड़ जमीनों की खरीद पर सवाल उठाए थे, यह बॉक्साइड परियोजना क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं। दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया था कि यह जमीन परियोजना से जुड़े फायदे के लिए खरीदी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह करोड़ों रुपए की जमीन जिन रघुराज, राकेश, नत्थू और प्रहलाद नाम के लोगों के नाम पर खरीदी गई, वह गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। उनके पास एक हजार एकड़ जमीन खरीदने के लिए पैसा कहां से आया? उन्होंने इसमें गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। 
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