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MP News: विशेष जेल लोक अदालत में 7 बंदी रिहा, 2016 के मामले में शिकायतकर्ता खुद जेल पहुंचा समझौते के लिए
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Sun, 26 Apr 2026 08:40 PM IST
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सार
मध्यप्रदेश की विशेष जेल लोक अदालत में 7 बंदियों की रिहाई के आदेश जारी किए गए। एक 10 साल पुराने मामले में शिकायतकर्ता खुद जेल पहुंचा और समझौते के बाद आरोपी को राहत मिली। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा ने बंदियों से सकारात्मक सोच अपनाकर नई शुरुआत करने की अपील की।
मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा संबोधित करते हुए
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश की जेलों में आयोजित विशेष जेल लोक अदालत में 7 बंदियों की रिहाई के आदेश जारी किए गए। इस प्रदेशव्यापी आयोजन का शुभारंभ मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने केंद्रीय जेल ग्वालियर से ऑनलाइन किया। लोक अदालत का आयोजन मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर द्वारा किया गया। एक मामले में खुद शिकायकर्ता जुले पहुंचा और आरोपी से समझौता किया। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा ने बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें सकारात्मक सोच के साथ अपने व्यक्तित्व विकास पर काम करना चाहिए, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में फिर से सम्मान के साथ जुड़ सकें। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के प्रशासनिक न्यायाधीश न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने कहा कि इस पहल के जरिए न्याय व्यवस्था खुद बंदियों तक पहुंची है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत का उद्देश्य सिर्फ मामलों का निपटारा करना नहीं, बल्कि विवादों की जड़ तक पहुंचकर समाधान निकालना है।
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18 मामलों का निराकरण किया गया
केंद्रीय जेल ग्वालियर में लोक अदालत के लिए कुल 60 मामलों को चिन्हित किया गया था। इनके निराकरण के लिए तीन खंडपीठ गठित की गईं। सुनवाई के दौरान 6 मामलों में का प्ली-बारगेनिंग (अपराध स्वीकारोक्ति के आधार पर) और 12 मामलों में आपसी समझौते के आधार पर कुल 18 मामलों का निराकरण किया गया। इनमें 7 बंदियों की रिहाई के आदेश दिए गए। इस दौरान एक दिलचस्प मामला भी सामने आया, जिसमें वर्ष 2016 से लंबित केस के शिकायतकर्ता खुद जेल पहुंचे और आरोपी के साथ समझौता किया। इसके बाद अदालत ने आरोपी की तत्काल रिहाई का आदेश दिया। एक अन्य मामले में आरोपी और शिकायतकर्ता दोनों जेल में बंद थे। दोनों पक्षों के बीच समझौता होने के बाद आरोपी को बरी कर दिया गया। कार्यक्रम में न्यायाधीशों, जेल विभाग के अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी रही।
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18 मामलों का निराकरण किया गया
केंद्रीय जेल ग्वालियर में लोक अदालत के लिए कुल 60 मामलों को चिन्हित किया गया था। इनके निराकरण के लिए तीन खंडपीठ गठित की गईं। सुनवाई के दौरान 6 मामलों में का प्ली-बारगेनिंग (अपराध स्वीकारोक्ति के आधार पर) और 12 मामलों में आपसी समझौते के आधार पर कुल 18 मामलों का निराकरण किया गया। इनमें 7 बंदियों की रिहाई के आदेश दिए गए। इस दौरान एक दिलचस्प मामला भी सामने आया, जिसमें वर्ष 2016 से लंबित केस के शिकायतकर्ता खुद जेल पहुंचे और आरोपी के साथ समझौता किया। इसके बाद अदालत ने आरोपी की तत्काल रिहाई का आदेश दिया। एक अन्य मामले में आरोपी और शिकायतकर्ता दोनों जेल में बंद थे। दोनों पक्षों के बीच समझौता होने के बाद आरोपी को बरी कर दिया गया। कार्यक्रम में न्यायाधीशों, जेल विभाग के अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी रही।
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