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Explainer: चुनाव आयोग ने भी नहीं मानी मीनाक्षी नटराजन की दलील तो क्या करेगी कांग्रेस? कौन सा रास्ता अब भी बाकी
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सार
MP Rajya Sabha Election Controversy: मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव अलग ही मोड़ पर चला गया है। निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस की प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया है। दिल्ली से भोपाल तक चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया गया है। यदि कांग्रेस को कोई राहत नहीं मिली तो सवाल ये उठता है कि कांग्रेस क्या करेगी? कांग्रेस क्या चुप रहेगी या आगे कोई कदम उठाएगी? समझते हैं इस एक्सप्लेनर में-
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद अब क्या करेगी कांग्रेस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद चुनाव आयोग से उम्मीद है। यदि आयोग ने रिटर्निंग अधिकारी के फैसले को सही माना तो आगे क्या होगा। कांग्रेस के पास क्या विकल्प रहेगा। इसी को लेकर समझाती ये रिपोर्ट-
सबसे पहले ये जानते हैं कि मप्र के राज्यसभा चुनाव में हुआ क्या?
मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए तीन सीटें खाली हुई हैं। दो सीटें भाजपा के पास तो एक सीट कांग्रेस के पास थी। दो सीटों के लिए भाजपा ने रजनीश अग्रवाल और तरुण चुघ को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। वहीं कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन का नाम आगे बढ़ाया। लेकिन चुनावी सरगर्मी तब बढ़ गई, जब भाजपा ने तीसरे प्रत्याशी महेश केवट को भी चुनाव में उतार दिया। उनका नामांकन दाखिल कर दिया और तीसरी सीट जीतने की बयान सामने आने लगे। इधर कांग्रेस को बड़ा झटका तब लगा, जब निर्वाचन आयोग ने नामांकन पत्रों की जांच के बाद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन ही रद्द कर दिया। इसके पीछे वजह बताई गई कि मीनाक्षी का नामांकन अधूरा है। उन्होंने अदालत में दर्ज निजी परिवाद की जानकारी पर्चे में नहीं भरी थी।
ये भी पढ़ें- RajyaSabha Election Controversy: नटराजन मामले में चुनाव आयोग से मिले कांग्रेस नेता, बताया- फैसले पर होगा विचार
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क्या कहा था रिटर्निंग अधिकारी ने?
मीनाक्षी नटराटन के पर्चा निरस्त करने के पीछे बताया गया कि जानबूझकर उन्होंने परिवाद की जानकारी नहीं बताई थी। बताया गया कि तेलंगाना में परिवाद को लेकर 17 सितंबर 2025 को कोर्ट ने समन जारी कर पेश होने का आदेश दिया था। मामला वर्तमान में लंबित है और मीनाक्षी को इसकी जानकारी भी है, ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि मीनाक्षी नटराजन के वकील ने कोर्ट में अपना जवाब भी पेश किया था। इस आधार पर उन्हें नामांकन में जानकारी नहीं देने का हवाला देकर नामांकन निरस्त कर दिया गया।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस में हलचल मच गई। साजिश के तहत पर्चा निरस्त किए जाने, लोकतंत्र की हत्या जैसी बातें कांग्रेसी नेताओं ने कही। मंगलवार को भोपाल में, दिल्ली में धरना दिया गया। बुधवार को चुनाव आयोग से कांग्रेस नेताओं को मिलने का समय मिला। दोपहर में कांग्रेस नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने आयोग से मुलाकात की और नटराजन का नामांकन फिर से बहाल करने की मांग रखी है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक आयोग ने उन्हेंं फैसले पर विचार करने का आश्वासन दिया है।
ये भी पढ़ें- चुनाव आयोग नहीं पहुंची कांग्रेस, RSS की ड्रेस लेकर विरोध करने पहुंची यूथ कांग्रेस
अब कांग्रेस के पास क्या विकल्प?
कांग्रेस को चुनाव आयोग से राहत नहीं मिलती है तो कांग्रेस कोर्ट का रुख करेगी। सूत्रों की मानें तो मप्र हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर ली गई है। राज्यसभा सांसद और वकील विवेक तन्खा और उनकी टीम, मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन खारिज किए जाने के मामले में हाईकोर्ट का रुख करने की तैयारी कर रही है। उधर, अभिषेक मनु सिंघवी की कानूनी टीम और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी भी इस मामले में कानूनी विकल्पों पर रणनीति बना रही है।
और भी कोई रास्ता है कांग्रेस के पास?
हां, कांग्रेस के पास एक और रास्ता है। कांग्रेस चुनाव होने के बाद महेश केवट के खिलाफ चुनाव याचिका लगाकर चुनौती दे सकती है। लेकिन ये मामला काफी लंबा खिंच सकता है। बहरहाल कांग्रेस चुनाव आयोग के फैसले का इंतजार कर रही है।
सबसे पहले ये जानते हैं कि मप्र के राज्यसभा चुनाव में हुआ क्या?
मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए तीन सीटें खाली हुई हैं। दो सीटें भाजपा के पास तो एक सीट कांग्रेस के पास थी। दो सीटों के लिए भाजपा ने रजनीश अग्रवाल और तरुण चुघ को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। वहीं कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन का नाम आगे बढ़ाया। लेकिन चुनावी सरगर्मी तब बढ़ गई, जब भाजपा ने तीसरे प्रत्याशी महेश केवट को भी चुनाव में उतार दिया। उनका नामांकन दाखिल कर दिया और तीसरी सीट जीतने की बयान सामने आने लगे। इधर कांग्रेस को बड़ा झटका तब लगा, जब निर्वाचन आयोग ने नामांकन पत्रों की जांच के बाद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन ही रद्द कर दिया। इसके पीछे वजह बताई गई कि मीनाक्षी का नामांकन अधूरा है। उन्होंने अदालत में दर्ज निजी परिवाद की जानकारी पर्चे में नहीं भरी थी।
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क्या कहा था रिटर्निंग अधिकारी ने?
मीनाक्षी नटराटन के पर्चा निरस्त करने के पीछे बताया गया कि जानबूझकर उन्होंने परिवाद की जानकारी नहीं बताई थी। बताया गया कि तेलंगाना में परिवाद को लेकर 17 सितंबर 2025 को कोर्ट ने समन जारी कर पेश होने का आदेश दिया था। मामला वर्तमान में लंबित है और मीनाक्षी को इसकी जानकारी भी है, ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि मीनाक्षी नटराजन के वकील ने कोर्ट में अपना जवाब भी पेश किया था। इस आधार पर उन्हें नामांकन में जानकारी नहीं देने का हवाला देकर नामांकन निरस्त कर दिया गया।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस में हलचल मच गई। साजिश के तहत पर्चा निरस्त किए जाने, लोकतंत्र की हत्या जैसी बातें कांग्रेसी नेताओं ने कही। मंगलवार को भोपाल में, दिल्ली में धरना दिया गया। बुधवार को चुनाव आयोग से कांग्रेस नेताओं को मिलने का समय मिला। दोपहर में कांग्रेस नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने आयोग से मुलाकात की और नटराजन का नामांकन फिर से बहाल करने की मांग रखी है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक आयोग ने उन्हेंं फैसले पर विचार करने का आश्वासन दिया है।
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अब कांग्रेस के पास क्या विकल्प?
कांग्रेस को चुनाव आयोग से राहत नहीं मिलती है तो कांग्रेस कोर्ट का रुख करेगी। सूत्रों की मानें तो मप्र हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर ली गई है। राज्यसभा सांसद और वकील विवेक तन्खा और उनकी टीम, मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन खारिज किए जाने के मामले में हाईकोर्ट का रुख करने की तैयारी कर रही है। उधर, अभिषेक मनु सिंघवी की कानूनी टीम और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी भी इस मामले में कानूनी विकल्पों पर रणनीति बना रही है।
और भी कोई रास्ता है कांग्रेस के पास?
हां, कांग्रेस के पास एक और रास्ता है। कांग्रेस चुनाव होने के बाद महेश केवट के खिलाफ चुनाव याचिका लगाकर चुनौती दे सकती है। लेकिन ये मामला काफी लंबा खिंच सकता है। बहरहाल कांग्रेस चुनाव आयोग के फैसले का इंतजार कर रही है।

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