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जबलपुर से इंदौर तक बनेगा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर,100 करोड़ से बनेगी कंपनी; 3 वर्ष में 3 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य

Thu, 15 Oct 2026 01:14 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Thu, 15 Oct 2026 01:14 PM IST
सार

मध्यप्रदेश में जबलपुर से इंदौर तक इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार 100 करोड़ रुपये की शुरुआती पूंजी से नई कंपनी बनाएगी, जिसके जरिए तीन साल में तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश और छह लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य है।

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MP to Build Jabalpur-Indore Industrial Corridor, New Rs 100 Crore Company; Rs 3 Lakh Crore Investment Target
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश में जबलपुर से इंदौर तक औद्योगिक विकास को गति देने के लिए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार एक नई कंपनी बनाएगी, जिसका नाम ‘जबलपुर–इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड’ होगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में इसकी गवर्निंग काउंसिल काम करेगी। कंपनी पूरी तरह राज्य सरकार के स्वामित्व में होगी और इसके लिए 100 करोड़ रुपये की शुरुआती पूंजी दी जाएगी। गुरुवार को सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट ने कॉरिडोर के समेकित विकास के लिए विशेष प्रयोजन कंपनी (एसपीवी) के गठन को मंजूरी दी। सरकार का लक्ष्य इस कॉरिडोर के जरिए प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश लाना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। योजना के तहत सड़क किनारे छोटे-छोटे औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के बजाय चुनिंदा स्थानों पर बड़े और सुविधायुक्त औद्योगिक हब बनाए जाएंगे।
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मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर प्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश को नई गति देगा।  साथ ही महाकौशल को नई ताकत देगा। इसके लिए 100 करोड़ रुपये की लागत से राज्य शासन के स्वामित्व वाली कंपनी गठित की गई है। मार्च 2028 तक एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश और करीब तीन लाख लोगों के लिए प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। हमारा लक्ष्य महाकौशल सहित प्रदेश के सभी क्षेत्रों में उद्योगों का विस्तार कर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
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पहले चरण में 10 हजार एकड़ में बनेंगे 3 से 5 हब
कॉरिडोर के पहले चरण में करीब 10 हजार एकड़ क्षेत्र में तीन से पांच प्राथमिक औद्योगिक हब विकसित करने की योजना है। इन हब में उद्योगों को जमीन के साथ बिजली, पानी, सड़क, सीवरेज और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे कंपनियों को बुनियादी सुविधाएं जुटाने में कम समय लगेगा और वे जल्द उत्पादन शुरू कर सकेंगी। औद्योगिक हब में श्रमिकों के लिए आवास, अस्पताल, स्कूल, कौशल विकास केंद्र और हरित क्षेत्र भी विकसित किए जाएंगे। यानी इन क्षेत्रों को केवल उद्योगों तक सीमित रखने के बजाय औद्योगिक टाउनशिप के रूप में तैयार करने की योजना है। नई कंपनी का काम उद्योगों के लिए जमीन, बुनियादी सुविधाएं और निवेश जुटाना होगा। सड़क निर्माण का काम संबंधित एजेंसियां करेंगी।
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मार्च 2028 तक एक लाख करोड़ निवेश का अनुमान
सरकार के शुरुआती आकलन के मुताबिक, मार्च 2028 तक कॉरिडोर में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आने की संभावना है। इससे करीब एक लाख प्रत्यक्ष और दो लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने का अनुमान है। दीर्घकालीन लक्ष्य के तहत तीन साल में तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश और छह लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा करने की योजना है। हालांकि, ये शुरुआती अनुमान हैं। वास्तविक निवेश और रोजगार के आंकड़े विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार होने और निवेशकों से चर्चा के बाद स्पष्ट होंगे। 

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सात जिलों को जोड़ने की योजना
प्रस्तावित कॉरिडोर से जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, भोपाल, सीहोर, देवास और इंदौर सहित सात जिलों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है। अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरत और उपलब्ध संसाधनों के हिसाब से उद्योग विकसित किए जाएंगे। 

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जबलपुर: इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा और एयरोस्पेस से जुड़ी सहायक इकाइयों तथा लॉजिस्टिक्स पर जोर रहेगा। 
नरसिंहपुर और रायसेन: खाद्य प्रसंस्करण, फूड पार्क और वेयरहाउसिंग को बढ़ावा देने की योजना है। इससे किसानों को अपनी उपज के विपणन और भंडारण की बेहतर सुविधाएं मिल सकती हैं।
भोपाल: आईटी, टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स और नॉलेज सर्विसेज से जुड़े निवेश पर ध्यान दिया जाएगा।
सीहोर और देवास: खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और मैन्युफैक्चरिंग की संभावनाओं पर काम होगा।
इंदौर: आईटी, आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र को बढ़ावा दिया जाएगा। इसे इंदौर-देवास-पीथमपुर के मौजूदा औद्योगिक नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। 

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30 दिन में कंपनी, 12 महीने में मास्टर प्लान
सरकार की प्रस्तावित समय-सीमा के अनुसार, अगले 30 दिन में कंपनी का गठन किया जाएगा। छह महीने में पूरे कॉरिडोर की जीआईएस मैपिंग और लैंड बैंक तैयार करने का लक्ष्य है। इसके बाद 12 महीने में प्राथमिक औद्योगिक हब का मास्टर प्लान और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद बुनियादी सुविधाओं के निर्माण और जमीन आवंटन की प्रक्रिया शुरू करने की योजना है। हब के लिए सटीक स्थानों का चयन जमीन की उपलब्धता, पानी, बिजली, सड़क और अन्य कनेक्टिविटी के साथ निवेशकों की मांग को ध्यान में रखकर किया जाएगा। सरकार के अनुसार, इसके लिए तकनीकी अध्ययन छह से नौ महीने में पूरा करने का लक्ष्य है।
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