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विश्व फिजियोथेरेपी दिवस: रोबोट-एआई से बदल रहा इलाज,MP में सरकारी व्यवस्था अब भी पीछे,कॉलेजों में पढ़ाई का संकट
Tue, 08 Sep 2026 07:35 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Tue, 08 Sep 2026 07:35 AM IST
सार
फिजियोथेरेपी अब रोबोट, आभासी तकनीक और एआई से आधुनिक हो रही है, लेकिन मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेज अभी पीछे हैं। 2023 में सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्नातक फिजियोथेरेपी पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा हुई थी, लेकिन साढ़े तीन साल बाद भी विस्तार नहीं हुआ।
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फिजियोथेरेपी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
फिजियोथेरेपी अब सिर्फ चोट या हड्डियों की सिकाई तक सीमित नहीं रह गई है। रोबोटिक पुनर्वास, आभासी वास्तविकता, पहनने योग्य उपकरण, दूरस्थ फिजियोथेरेपी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी तकनीकें इलाज और पुनर्वास के तरीके बदल रही हैं। दुनिया में फिजियोथेरेपी तेजी से तकनीक आधारित हो रही है, लेकिन मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इसकी पढ़ाई और सुविधाओं का विस्तार अब भी इंतजार में है।
2023 में हुई थी बड़ी घोषणा, साढ़े 3 साल बाद भी सवाल
5 जनवरी 2023 को तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल समेत प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भौतिक चिकित्सा यानी फिजियोथेरेपी में स्नातक पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की थी। घोषणा का उद्देश्य सरकारी चिकित्सा व्यवस्था में प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट तैयार करना और मरीजों को बेहतर पुनर्वास सुविधा देना था। लेकिन अब सितंबर 2026 आ चुका है। घोषणा को साढ़े तीन साल से ज्यादा समय बीत चुका है, फिर भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इस पाठ्यक्रम के विस्तार की तस्वीर में बड़ा बदलाव नजर नहीं आता। दिसंबर 2024 में विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने बताया था कि मेडिकल कॉलेजों से मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के माध्यम से आवेदन प्राप्त होने पर फिजियोथेरेपी पाठ्यक्रम की मान्यता दी जा सकती है। यानी घोषणा के बावजूद पाठ्यक्रम शुरू करने की प्रक्रिया अभी भी आवेदन और मान्यता की व्यवस्था पर निर्भर है।
निजी कॉलेज बढ़े, सरकारी व्यवस्था पीछे
मध्य प्रदेश में फिजियोथेरेपी की पढ़ाई के लिए निजी और स्ववित्त संस्थानों के विकल्प मौजूद हैं। उपलब्ध उच्च शिक्षा आंकड़ों के आधार पर प्रदेश में दर्जनों संस्थानों में स्नातक फिजियोथेरेपी पाठ्यक्रम संचालित हो रहा है। लेकिन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इसे व्यापक स्तर पर शुरू करने का सवाल अब भी बना हुआ है। इंदौर के महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में फिजियोथेरेपी विभाग लंबे समय से संचालित है। वहां से स्नातक के साथ स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई भी होती है।
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इलाज बदल गया, लेकिन सरकारी ढांचा नहीं
आज फिजियोथेरेपी का इस्तेमाल हड्डी और जोड़ की समस्या, रीढ़ की बीमारी, खेल चोट, नसों से जुड़ी परेशानी, लकवा, सर्जरी के बाद पुनर्वास, हृदय और फेफड़ों की बीमारी तथा गहन चिकित्सा इकाई में मरीजों के पुनर्वास तक किया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी पुनर्वास को स्वास्थ्य व्यवस्था का जरूरी हिस्सा मानता है और प्रशिक्षित पुनर्वास कार्यबल को स्वास्थ्य सेवाओं के सभी स्तरों में शामिल करने पर जोर देता है।
अब फिजियोथेरेपी में ये आधुनिक तकनीकें
- रोबोटिक पुनर्वास: विशेषकर लकवे और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याओं में दोहराव वाले अभ्यास के लिए।
- आभासी वास्तविकता आधारित अभ्यास: मरीजों को नियंत्रित डिजिटल वातावरण में गतिविधियों का अभ्यास कराया जाता है।
- दूरस्थ फिजियोथेरेपी: मोबाइल और वीडियो माध्यम से घर बैठे अभ्यास और निगरानी की सुविधा।
- पहनने योग्य सेंसर: शरीर की गति और गतिविधियों का आकलन करने में उपयोग।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता: मरीज की गतिविधि का विश्लेषण, व्यायाम की निगरानी और व्यक्तिगत पुनर्वास योजना में इसकी भूमिका बढ़ रही है।
फिजियोथेरेपिस्ट बोले-सरकारी अस्पतालों में अलग व्यवस्था जरूरी
भौतिक चिकित्सा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि फिजियोथेरेपी को अब सहायक उपचार के रूप में देखने की सोच बदलनी होगी। गंभीर सर्जरी के बाद मरीज को दोबारा चलने-फिरने लायक बनाने से लेकर खेल चोट और तंत्रिका तंत्र की बीमारी तक में फिजियोथेरेपिस्ट की भूमिका महत्वपूर्ण है। डॉ. सुनील पाण्डेय के मुताबिक प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फिजियोथेरेपी के पाठ्यक्रम जल्द शुरू होने चाहिए। उनका कहना है कि सिर्फ पाठ्यक्रम शुरू करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इसके साथ आधुनिक प्रयोगशालाएं, उपकरण, प्रशिक्षित शिक्षक और अस्पतालों में मरीजों के लिए पर्याप्त फिजियोथेरेपी इकाइयां भी जरूरी हैं।
सरकार के सामने ये प्रमुख मांगें
- मध्य प्रदेश में स्वतंत्र फिजियोथेरेपी बोर्ड की स्थापना करना।
- सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पाठ्यक्रम प्रारंभ करना।
- सभी जिलों में एक अलग से फिजियोथेरेपी हॉस्पिटल की स्थापना की जाए।
- प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में फिजियोथेरेपी यूनिट।
- वेतन विसंगति दूर की जाए।
- मल्टी रिहैबिलिटेशन पद पर पदस्त फिज़ियोथैरेपिस्ट का पदनाम चेंज किया जाए।
- मेडिकल कॉलेजों के सभी विभागों तथा जिला चिकित्सालयों में विशेषज्ञता विभागवार फिजियोथेरेपी विशेषज्ञों की नियुक्ति।
यह भी पढ़ें-भोपाल में 6 दिन से सीलिंग पर ब्रेक: हाईकोर्ट में 100 से ज्यादा मामलों की सुनवाई जारी, व्यापारियों ने बंद टाला
साढ़े तीन साल बाद भी वही सवाल
फिजियोथेरेपी का दायरा लगातार बढ़ रहा है और दुनिया में इसका इलाज तकनीक के साथ आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में मध्य प्रदेश में 2023 की घोषणा के बावजूद सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इसका विस्तार नहीं होना स्वास्थ्य शिक्षा और पुनर्वास व्यवस्था दोनों के लिए बड़ा सवाल है। अब जरूरत घोषणा दोहराने की नहीं, बल्कि समयबद्ध तरीके से पाठ्यक्रम, शिक्षक, उपकरण और अस्पतालों में पद स्वीकृत कर व्यवस्था जमीन पर उतारने की है।
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2023 में हुई थी बड़ी घोषणा, साढ़े 3 साल बाद भी सवाल
5 जनवरी 2023 को तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल समेत प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भौतिक चिकित्सा यानी फिजियोथेरेपी में स्नातक पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की थी। घोषणा का उद्देश्य सरकारी चिकित्सा व्यवस्था में प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट तैयार करना और मरीजों को बेहतर पुनर्वास सुविधा देना था। लेकिन अब सितंबर 2026 आ चुका है। घोषणा को साढ़े तीन साल से ज्यादा समय बीत चुका है, फिर भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इस पाठ्यक्रम के विस्तार की तस्वीर में बड़ा बदलाव नजर नहीं आता। दिसंबर 2024 में विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने बताया था कि मेडिकल कॉलेजों से मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के माध्यम से आवेदन प्राप्त होने पर फिजियोथेरेपी पाठ्यक्रम की मान्यता दी जा सकती है। यानी घोषणा के बावजूद पाठ्यक्रम शुरू करने की प्रक्रिया अभी भी आवेदन और मान्यता की व्यवस्था पर निर्भर है।
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निजी कॉलेज बढ़े, सरकारी व्यवस्था पीछे
मध्य प्रदेश में फिजियोथेरेपी की पढ़ाई के लिए निजी और स्ववित्त संस्थानों के विकल्प मौजूद हैं। उपलब्ध उच्च शिक्षा आंकड़ों के आधार पर प्रदेश में दर्जनों संस्थानों में स्नातक फिजियोथेरेपी पाठ्यक्रम संचालित हो रहा है। लेकिन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इसे व्यापक स्तर पर शुरू करने का सवाल अब भी बना हुआ है। इंदौर के महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में फिजियोथेरेपी विभाग लंबे समय से संचालित है। वहां से स्नातक के साथ स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई भी होती है।
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इलाज बदल गया, लेकिन सरकारी ढांचा नहीं
आज फिजियोथेरेपी का इस्तेमाल हड्डी और जोड़ की समस्या, रीढ़ की बीमारी, खेल चोट, नसों से जुड़ी परेशानी, लकवा, सर्जरी के बाद पुनर्वास, हृदय और फेफड़ों की बीमारी तथा गहन चिकित्सा इकाई में मरीजों के पुनर्वास तक किया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी पुनर्वास को स्वास्थ्य व्यवस्था का जरूरी हिस्सा मानता है और प्रशिक्षित पुनर्वास कार्यबल को स्वास्थ्य सेवाओं के सभी स्तरों में शामिल करने पर जोर देता है।
अब फिजियोथेरेपी में ये आधुनिक तकनीकें
- रोबोटिक पुनर्वास: विशेषकर लकवे और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याओं में दोहराव वाले अभ्यास के लिए।
- आभासी वास्तविकता आधारित अभ्यास: मरीजों को नियंत्रित डिजिटल वातावरण में गतिविधियों का अभ्यास कराया जाता है।
- दूरस्थ फिजियोथेरेपी: मोबाइल और वीडियो माध्यम से घर बैठे अभ्यास और निगरानी की सुविधा।
- पहनने योग्य सेंसर: शरीर की गति और गतिविधियों का आकलन करने में उपयोग।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता: मरीज की गतिविधि का विश्लेषण, व्यायाम की निगरानी और व्यक्तिगत पुनर्वास योजना में इसकी भूमिका बढ़ रही है।
फिजियोथेरेपिस्ट बोले-सरकारी अस्पतालों में अलग व्यवस्था जरूरी
भौतिक चिकित्सा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि फिजियोथेरेपी को अब सहायक उपचार के रूप में देखने की सोच बदलनी होगी। गंभीर सर्जरी के बाद मरीज को दोबारा चलने-फिरने लायक बनाने से लेकर खेल चोट और तंत्रिका तंत्र की बीमारी तक में फिजियोथेरेपिस्ट की भूमिका महत्वपूर्ण है। डॉ. सुनील पाण्डेय के मुताबिक प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फिजियोथेरेपी के पाठ्यक्रम जल्द शुरू होने चाहिए। उनका कहना है कि सिर्फ पाठ्यक्रम शुरू करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इसके साथ आधुनिक प्रयोगशालाएं, उपकरण, प्रशिक्षित शिक्षक और अस्पतालों में मरीजों के लिए पर्याप्त फिजियोथेरेपी इकाइयां भी जरूरी हैं।
सरकार के सामने ये प्रमुख मांगें
- मध्य प्रदेश में स्वतंत्र फिजियोथेरेपी बोर्ड की स्थापना करना।
- सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पाठ्यक्रम प्रारंभ करना।
- सभी जिलों में एक अलग से फिजियोथेरेपी हॉस्पिटल की स्थापना की जाए।
- प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में फिजियोथेरेपी यूनिट।
- वेतन विसंगति दूर की जाए।
- मल्टी रिहैबिलिटेशन पद पर पदस्त फिज़ियोथैरेपिस्ट का पदनाम चेंज किया जाए।
- मेडिकल कॉलेजों के सभी विभागों तथा जिला चिकित्सालयों में विशेषज्ञता विभागवार फिजियोथेरेपी विशेषज्ञों की नियुक्ति।
यह भी पढ़ें-भोपाल में 6 दिन से सीलिंग पर ब्रेक: हाईकोर्ट में 100 से ज्यादा मामलों की सुनवाई जारी, व्यापारियों ने बंद टाला
साढ़े तीन साल बाद भी वही सवाल
फिजियोथेरेपी का दायरा लगातार बढ़ रहा है और दुनिया में इसका इलाज तकनीक के साथ आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में मध्य प्रदेश में 2023 की घोषणा के बावजूद सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इसका विस्तार नहीं होना स्वास्थ्य शिक्षा और पुनर्वास व्यवस्था दोनों के लिए बड़ा सवाल है। अब जरूरत घोषणा दोहराने की नहीं, बल्कि समयबद्ध तरीके से पाठ्यक्रम, शिक्षक, उपकरण और अस्पतालों में पद स्वीकृत कर व्यवस्था जमीन पर उतारने की है।
