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Burhanpur: भ्रष्टाचार के दोषी बाबू को बनाया चपरासी, कर दिया डिमोशन; महिला कलेक्टर की हो रही तारीफ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बुरहानपुर
Published by: बुरहानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jan 2025 06:34 PM IST
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सार
MP: कलेक्टर के बाबू पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, जिसमें उन्हें दोषी भी पाया गया था। जिसके बाद जिला कलेक्टर ने ऐसा कर भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों को खुले रूप से चेता दिया है कि अगर किसी ने भ्रष्टाचार किया तो अब उसकी खैर नहीं है।
जिला कलेक्टर ने भ्र्ष्टाचार के दोषी बाबू को बनाया चपरासी
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विस्तार
बीते दिनों मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में वहां के प्रभारी मंत्री विजय शाह ने एक महिला से अभद्र व्यवहार के चलते तहसीलदार का डिमोशन कर उसे बाबू बना दिया था। जिसके बाद अब एक बार फिर से मध्य प्रदेश के ही बुरहानपुर जिले में इसी तरह का एक और मामला सामने आया है। यहां बुरहानपुर कलेक्टर भाव्या मित्तल ने महिला बाल विकास विभाग के एक बाबू को अपने पद से निलंबित कर भृत्य के पद पर पदस्थ कर दिया है। दरअसल बुरहानपुर कलेक्टर ने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि, कलेक्टर के बाबू पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, जिसमें उन्हें दोषी भी पाया गया था। जिसके बाद जिला कलेक्टर ने ऐसा कर, भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों को खुले रूप से चेता दिया है कि अगर किसी ने भ्रष्टाचार किया तो अब उसकी खैर नहीं है।
बुरहानपुर कलेक्टर भाव्या मित्तल ने भ्रष्टाचार के मामले में निलंबित चल रहे महिला बाल विकास विभाग के एक बाबू को जांच में भ्रष्टाचार का दोषी पाए जाने के बाद उसका निलंबन समाप्त करते हुए, उस बाबू का डिमोशन कर उसे विभाग में ही रिक्त पड़े चपरासी के पद पर पदस्थ करने का आदेश दिया है। कलेक्टर के इस फैसले से जिले के सभी सरकारी महकमों में हड़कंप मच गया है। दरअसल अपने इस फैसले के बहाने कलेक्टर भाव्या मित्तल ने सभी सरकारी अफसर और कर्मचारियों को अपना काम ईमानदारी से करने का कड़ा संदेश दिया है।
यह था डिमोशन से जुड़ा पूरा मामला
जुलाई 2024 में कलेक्टर दफ्तर में आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर भाव्या मित्तल को शिकायत मिली थी कि महिला बाल विकास परियोजना कार्यालय खकनार में सहायक ग्रेड 03 के पद पर पदस्थ बाबू सुभाष काकडे ने आंगनवाड़ी सहायिका के पद पर भर्ती के लिए रिश्वत की मांग की थी। इस शिकायत को कलेक्टर भव्या मित्तल ने गंभीरता से लेते हुए, पहले सहायक ग्रेड 03 सुभाष काकडे को निलंबित किया।
इसके बाद पूरे मामले की जांच अपर कलेक्टर और महिला बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी को सौंपी। हालांकि, जांच के दौरान आरोपित सहायक ग्रेड 03 सुभाष काकडे को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था, लेकिन सुभाष काकडे का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं रहा। वहीं जांच अधिकारियों ने अपनी जांच में सहायक ग्रेड 03 सुभाष काकडे के द्वारा अपने पद का दुरूपयोग करते हुए मप्र सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 13 और 14 का उल्लंघन किया जाना पाया। जिस पर जांच अधिकारी का मानना था कि उसका कृत्य स्पष्ट रूप से वित्तीय लाभ अर्जित करने की श्रेणी में आता है।
आदेश से सरकारी कर्मचारियों में मचा हड़कंप
इधर, बुरहानपुर कलेक्टर भाव्या मित्तल ने जांच प्रतिवेदन के आधार पर सुभाष काकडे का डिमोशन करते हुए परियोजना अधिकारी कार्यालय नेपानगर में रिक्त भृत्य के पद पर नियुक्त करने का आदेश दिया। साथ ही उनकी निलंबन अवधि को अकार्य दिवस घोषित किया। बता दें कि, बुरहानपुर कलेक्टर भाव्या मित्तल ने इस आदेश के बहाने यह भी स्पष्ट किया है कि, भ्रष्टाचार या किसी भी प्रकार के पद के दुरूपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई शासन की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की प्रतिबध्दता को तो दर्शाती ही है, साथ ही कलेक्टर भाव्या मित्तल के इस सख्त कदम के बाद जिले के अधिकारी और कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
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बुरहानपुर कलेक्टर भाव्या मित्तल ने भ्रष्टाचार के मामले में निलंबित चल रहे महिला बाल विकास विभाग के एक बाबू को जांच में भ्रष्टाचार का दोषी पाए जाने के बाद उसका निलंबन समाप्त करते हुए, उस बाबू का डिमोशन कर उसे विभाग में ही रिक्त पड़े चपरासी के पद पर पदस्थ करने का आदेश दिया है। कलेक्टर के इस फैसले से जिले के सभी सरकारी महकमों में हड़कंप मच गया है। दरअसल अपने इस फैसले के बहाने कलेक्टर भाव्या मित्तल ने सभी सरकारी अफसर और कर्मचारियों को अपना काम ईमानदारी से करने का कड़ा संदेश दिया है।
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यह था डिमोशन से जुड़ा पूरा मामला
जुलाई 2024 में कलेक्टर दफ्तर में आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर भाव्या मित्तल को शिकायत मिली थी कि महिला बाल विकास परियोजना कार्यालय खकनार में सहायक ग्रेड 03 के पद पर पदस्थ बाबू सुभाष काकडे ने आंगनवाड़ी सहायिका के पद पर भर्ती के लिए रिश्वत की मांग की थी। इस शिकायत को कलेक्टर भव्या मित्तल ने गंभीरता से लेते हुए, पहले सहायक ग्रेड 03 सुभाष काकडे को निलंबित किया।
इसके बाद पूरे मामले की जांच अपर कलेक्टर और महिला बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी को सौंपी। हालांकि, जांच के दौरान आरोपित सहायक ग्रेड 03 सुभाष काकडे को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था, लेकिन सुभाष काकडे का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं रहा। वहीं जांच अधिकारियों ने अपनी जांच में सहायक ग्रेड 03 सुभाष काकडे के द्वारा अपने पद का दुरूपयोग करते हुए मप्र सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 13 और 14 का उल्लंघन किया जाना पाया। जिस पर जांच अधिकारी का मानना था कि उसका कृत्य स्पष्ट रूप से वित्तीय लाभ अर्जित करने की श्रेणी में आता है।
आदेश से सरकारी कर्मचारियों में मचा हड़कंप
इधर, बुरहानपुर कलेक्टर भाव्या मित्तल ने जांच प्रतिवेदन के आधार पर सुभाष काकडे का डिमोशन करते हुए परियोजना अधिकारी कार्यालय नेपानगर में रिक्त भृत्य के पद पर नियुक्त करने का आदेश दिया। साथ ही उनकी निलंबन अवधि को अकार्य दिवस घोषित किया। बता दें कि, बुरहानपुर कलेक्टर भाव्या मित्तल ने इस आदेश के बहाने यह भी स्पष्ट किया है कि, भ्रष्टाचार या किसी भी प्रकार के पद के दुरूपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई शासन की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की प्रतिबध्दता को तो दर्शाती ही है, साथ ही कलेक्टर भाव्या मित्तल के इस सख्त कदम के बाद जिले के अधिकारी और कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है।

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