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‘हम जिंदा हैं, सिस्टम ने मार दिया’: जीवित ग्रामीण दस्तावेजों में मृत घोषित, पीड़ितों के पंचायत पर गंभीर आरोप

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर Published by: छतरपुर ब्यूरो Updated Sat, 25 Apr 2026 04:19 PM IST
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सार

Living People Declared Dead on Paper: छतरपुर के चंद्रपुरा गांव में जिंदा लोगों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित करने का आरोप लगा है। इससे पेंशन, राशन और वेतन बंद हुए। ग्रामीणों ने चुनावी रंजिश बताया। प्रशासन ने जांच के आदेश जारी किए हैं।

Chhatarpur News: Villagers Declared Dead on Paper Alive Residents Lose Pension Ration Probe Ordered
पंचायत ने पीड़ित गिरिजा विश्वकर्मा, रामबाई रैकवार और कल्लू अहिरवार के साथ किया बड़ा खेल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

छतरपुर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां जिंदा लोगों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिए जाने का आरोप लगा है। मामला गौरिहार विकासखंड की ग्राम पंचायत चंद्रपुरा का है। आरोप है कि चुनावी रंजिश के चलते सरपंच पुत्र और सचिव ने मिलकर कई ग्रामीणों के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिए। इसके कारण पीड़ितों की पेंशन और राशन जैसी जरूरी योजनाएं अचानक बंद हो गईं।

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पेंशन और राशन बंद होने पर खुला मामला
गांव की बुजुर्ग गिरजा विश्वकर्मा, जो लंबे समय से पेंशन और राशन का लाभ ले रही थीं, एक दिन अचानक सुविधाओं से वंचित हो गईं। जब उन्होंने इसकी वजह जानने की कोशिश की, तब पता चला कि सरकारी दस्तावेजों में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है। गिरजा विश्वकर्मा ने कहा कि साहब हम जिंदा हैं, लेकिन कागजों में हमें मार दिया गया।
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दूसरे ग्रामीण भी बताए जा रहे पीड़ित
इसी तरह रामबाई रैकवार को भी रिकॉर्ड में मृत दर्शाए जाने का आरोप है। बताया गया कि उन्हें भी योजनाओं से बाहर कर दिया गया। इससे ग्रामीणों में नाराजगी और चिंता बढ़ गई है।
 
वेतन रुकने का भी आरोप
पंचायत में कार्यरत कल्लू अहिरवार का मामला भी सामने आया है। आरोप है कि उन्हें मृत दिखाकर उनका वेतन रोक दिया गया। कल्लू अहिरवार ने जिला पंचायत सीईओ को शिकायत देते हुए कहा कि मैं जिंदा हूं, लेकिन कागजों में मर चुका हूं, अब मुझे न्याय चाहिए।



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चुनावी रंजिश का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा मामला चुनावी दुश्मनी के चलते जानबूझकर किया गया, ताकि कुछ लोगों को सरकारी लाभ से वंचित किया जा सके। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
 
प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
मामला सामने आने के बाद जिला पंचायत सीईओ ने इसे गंभीरता से लेते हुए जनपद सीईओ को जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रिकॉर्ड में नाम दर्ज करने में लापरवाही हुई या किसी स्तर पर जानबूझकर गड़बड़ी की गई।


 
जांच पर टिकीं सबकी निगाहें
अब बड़ा सवाल यह है कि बिना जांच के किसी व्यक्ति को सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित करना केवल त्रुटि है या फिर सुनियोजित साजिश। फिलहाल पीड़ित न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं और प्रशासन की जांच पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

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