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Chhatarpur News: आस्था से शिक्षा तक... बागेश्वर धाम में होगी सनातन ज्ञान की नई शुरुआत, खुलेगा गुरुकुल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,छतरपुर
Published by: छतरपुर ब्यूरो
Updated Thu, 15 Jan 2026 04:28 PM IST
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सार
बागेश्वर धाम अब केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सनातन शिक्षा का नया केंद्र बनने जा रहा है। फरवरी में होने वाले सातवें कन्या विवाह महोत्सव के साथ यहां गुरुकुलम की शुरुआत होगी।
बागेश्वर महाराज
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सिद्ध पीठ बागेश्वर धाम अब केवल श्रद्धा और आस्था का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि सनातन शिक्षा का भी बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। इसी साल फरवरी में होने वाले सातवें कन्या विवाह महोत्सव के साथ बागेश्वर धाम में वेद विद्यालय (गुरुकुलम) की शुरुआत की जाएगी। इसके लिए बनारस (काशी) से आए विद्वान शिक्षक बच्चों को शिक्षा देंगे।
एक प्रसिद्ध उक्ति है, 'विदेशेषु धनं विद्या', यानी यदि कोई व्यक्ति घर से दूर है और उसके पास धन नहीं है, लेकिन विद्या है, तो वही विद्या हर परिस्थिति में उसका सहारा बनती है। इसी सोच के साथ बागेश्वर धाम पीठाधीश पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने घोषणा की है कि इस वर्ष से बागेश्वर धाम में वेद, पुराण, रामायण, महाभारत और गीता जैसे ग्रंथों की शिक्षा दी जाएगी। गुरुकुलम के माध्यम से बटुक ब्राह्मणों द्वारा वेद मंत्रों का पाठ किया जाएगा और धाम परिसर वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजेगा। बागेश्वर महाराज का कहना है कि भोजन, पानी और धन का सहारा सीमित समय तक ही मिलता है, लेकिन विद्या जीवन भर साथ देती है। यदि किसी को विद्या का दान दिया जाए, तो वह उसके पूरे जीवन में काम आती है।
भावी पीढ़ी को संस्कारवान और ज्ञानवान बनाना लक्ष्य
बागेश्वर महाराज ने बताया कि तिलक धारण करना, शिखा बांधना, माता-पिता, गुरु और भगवान को प्रणाम करना जैसे संस्कार सनातन शिक्षा से ही आते हैं। अक्सर लोगों के मन में सवाल होते हैं कि यज्ञ क्यों किया जाए, मंत्रों का जप क्यों जरूरी है और धर्म के कार्यों में क्यों जुड़ना चाहिए। इन सभी सवालों के उत्तर गुरुकुलम की शिक्षा से सहज रूप में मिल सकेंगे। गुरुकुलम के माध्यम से तिलक का महत्व, यज्ञ की विधि और सनातन परंपराओं की जानकारी बच्चों तक आसानी से पहुंचेगी। उद्देश्य है कि आने वाली पीढ़ी न सिर्फ पढ़ी-लिखी बने, बल्कि संस्कारों से भी जुड़ी रहे।
पढ़ें- Bhopal News: भोपाल में गौमांस विवाद पर सड़क पर उतरा जय मां भवानी संगठन, स्लॉटर हाउस के डॉक्टर पर गिरी गाज
काशी के विद्वान पढ़ाएंगे गुरुकुल में
गुरुकुलम की स्थापना को लेकर बागेश्वर महाराज ने बताया कि शुरुआत में तीन-चार कमरों में वेद विद्यालय का संचालन किया जाएगा। धीरे-धीरे इसका विस्तार किया जाएगा। इसके लिए शिक्षकों का चयन कर लिया गया है और काशी के अनुभवी व विद्वान पंडित बच्चों को वैदिक विषयों की शिक्षा देंगे। गुरुकुलम में वैदिक शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक शिक्षा भी दी जाएगी, ताकि समाज में फैल रही कुरीतियों पर रोक लगाई जा सके और एक संस्कारयुक्त समाज का निर्माण हो सके।
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एक प्रसिद्ध उक्ति है, 'विदेशेषु धनं विद्या', यानी यदि कोई व्यक्ति घर से दूर है और उसके पास धन नहीं है, लेकिन विद्या है, तो वही विद्या हर परिस्थिति में उसका सहारा बनती है। इसी सोच के साथ बागेश्वर धाम पीठाधीश पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने घोषणा की है कि इस वर्ष से बागेश्वर धाम में वेद, पुराण, रामायण, महाभारत और गीता जैसे ग्रंथों की शिक्षा दी जाएगी। गुरुकुलम के माध्यम से बटुक ब्राह्मणों द्वारा वेद मंत्रों का पाठ किया जाएगा और धाम परिसर वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजेगा। बागेश्वर महाराज का कहना है कि भोजन, पानी और धन का सहारा सीमित समय तक ही मिलता है, लेकिन विद्या जीवन भर साथ देती है। यदि किसी को विद्या का दान दिया जाए, तो वह उसके पूरे जीवन में काम आती है।
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भावी पीढ़ी को संस्कारवान और ज्ञानवान बनाना लक्ष्य
बागेश्वर महाराज ने बताया कि तिलक धारण करना, शिखा बांधना, माता-पिता, गुरु और भगवान को प्रणाम करना जैसे संस्कार सनातन शिक्षा से ही आते हैं। अक्सर लोगों के मन में सवाल होते हैं कि यज्ञ क्यों किया जाए, मंत्रों का जप क्यों जरूरी है और धर्म के कार्यों में क्यों जुड़ना चाहिए। इन सभी सवालों के उत्तर गुरुकुलम की शिक्षा से सहज रूप में मिल सकेंगे। गुरुकुलम के माध्यम से तिलक का महत्व, यज्ञ की विधि और सनातन परंपराओं की जानकारी बच्चों तक आसानी से पहुंचेगी। उद्देश्य है कि आने वाली पीढ़ी न सिर्फ पढ़ी-लिखी बने, बल्कि संस्कारों से भी जुड़ी रहे।
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काशी के विद्वान पढ़ाएंगे गुरुकुल में
गुरुकुलम की स्थापना को लेकर बागेश्वर महाराज ने बताया कि शुरुआत में तीन-चार कमरों में वेद विद्यालय का संचालन किया जाएगा। धीरे-धीरे इसका विस्तार किया जाएगा। इसके लिए शिक्षकों का चयन कर लिया गया है और काशी के अनुभवी व विद्वान पंडित बच्चों को वैदिक विषयों की शिक्षा देंगे। गुरुकुलम में वैदिक शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक शिक्षा भी दी जाएगी, ताकि समाज में फैल रही कुरीतियों पर रोक लगाई जा सके और एक संस्कारयुक्त समाज का निर्माण हो सके।

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