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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   'Conscious relations with married woman for 4 years cannot be considered misdeed', High Court orders-quash FIR

MP: 'विवाहिता से चार साल तक स्वेच्छा से संबंध को दुष्कर्म नहीं मान सकते', हाईकोर्ट का आदेश- FIR निरस्त करें

Sun, 26 Jul 2026 10:39 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Sun, 26 Jul 2026 10:39 PM IST
सार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल के केंद्रीय कर्मचारी के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म की एफआईआर और लंबित आपराधिक प्रकरण निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि दोनों बालिग थे, महिला विवाहित और शिक्षित थी तथा चार वर्षों तक संबंध सहमति से रहे। ऐसे में बिना प्रलोभन बने संबंधों को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। 

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'Conscious relations with married woman for 4 years cannot be considered misdeed', High Court orders-quash FIR
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विवाहित महिला सहकर्मी द्वारा दुष्कर्म की एफआईआर तथा न्यायालय में लंबित प्रकरण को निरस्त किए जाने की मांग करते हुए एक केंद्रीय कर्मचारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि महिला शिक्षित और विवाहित थी और दोनों पिछले चार साल से संबंध में थे। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि बालिग अपनी स्वेच्छा से बिना प्रलोभन संबंध स्थापित करते हैं तो उसे दुष्कर्म नहीं माना जा सकता।
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भोपाल निवासी केंद्रीय कर्मचारी की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि विवाहित महिला सहकर्मी का आरोप है कि 10 अक्तूबर 2020 को घर बुलाकर याचिकाकर्ता ने जूस में नशीला पदार्थ मिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी उसे शादी का प्रलोभन देकर चार साल तक दुष्कर्म करता रहा। महिला ने शादी का प्रलोभन देकर उसका चार साल तक दैहिक शोषण करने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ भोपाल के छोला थाने में एफआईआर दर्ज करवा दी। वर्तमान में प्रकरण न्यायालय में लंबित है।
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एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई के दौरान पाया कि शिकायतकर्ता के बयान के अनुसार दोनों के बीच रिश्ते की शुरुआत के दौरान शिकायतकर्ता के शादीशुदा होने तथा उसका नौ साल का बच्चा होने की जानकारी याचिकाकर्ता को नहीं थी। वह खुद जानती थी कि जब तक वह अपने पति से तलाक नहीं ले लेती, तब तक वह आरोपी से शादी नहीं कर सकती। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता और शिकायतकर्ता के बीच शादी का सवाल ही नहीं उठता था। शिकायतकर्ता के बयानों और उसके लिखित जवाब से साफ पता चलता है कि उसने अपनी मर्जी से काफी समय तक याचिकाकर्ता के साथ रिश्ता बनाए रखा। याचिकाकर्ता ने कभी उसके साथ दुर्व्यवहार नहीं किया। उसे कभी ब्लैकमेल या तस्वीरें व वीडियो वायरल करने की धमकी भी नहीं दी। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज एफआईआर तथा न्यायालय में लंबित प्रकरण को निरस्त करने के आदेश जारी किए हैं।
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