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Damoh News: ढोलक बजाकर नाचे मंत्रीजी, दिवारी नृत्य आयोजन में जमकर गीत गाए, दीपावली से शुरू होता है उत्सव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Sat, 25 Oct 2025 01:17 PM IST
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सार
मंत्री धर्मेंद्र सिंह ने दिवारी गीत गाकर नृत्य किया और ढोलक बजाई। उनके साथ दमोह सांसद राहुल सिंह, भाजपा जिला अध्यक्ष श्याम शिवहरे भी शामिल थे। परंपरा के अनुसार बुंदेलखंड में दीपावली के अगले दिन से ही दिवारी नृत्य शुरू हो जाता है जो एकादशी तक चलता है।
दिवारी नृत्य में झूमे मंत्री
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिले में इस समय दिवारी नृत्य की धूम मची है। जहां ग्वालों की टोलियां मंदिरों में और लोगों के घरों में पहुंचकर दिवारी नृत्य करने के साथ गायन भी कर रहे हैं। इसी रंग में पर्यटन मंत्री भी रंगे नजर आए। जब शुक्रवार को नोहटा में आयोजित दिवाली मिलन समारोह में मंत्री धर्मेंद्र सिंह ने दिवारी नृत्य किया और ढोलक बजाई। उनके साथ दमोह सांसद राहुल सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि गौरव पटेल के साथ भाजपा जिला अध्यक्ष श्याम शिवहरे भी शामिल थे। यह सभी लोग ग्वालो की टोलियां में शामिल होकर नृत्य कर रहे थे और दीवारी गीत गा रहे थे।
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आपको बता दें कि बुंदेलखंड में परंपरा के अनुसार दीपावली के अगले दिन से ही दिवारी नृत्य शुरू हो जाता है, जो एकादशी तक चलता है। यह नृत्य यादव समाज के लोगों के द्वारा किया जाता है जो कि एक अनूठी परंपरा की मिसाल है। नोहटा में आयोजित मिलन समारोह में मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने न केवल कार्यक्रम का उद्घाटन किया, बल्कि स्वयं दिवारी नृत्य एवं गायन में शामिल होकर कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया।
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इस मौके पर मंत्री लोधी ने कहा कि इस प्रकार की सांस्कृतिक गतिविधियां समाज में भाईचारे और उत्साह का प्रतीक हैं। यादव समाज द्वारा ही यह नृत्य किया जाता है आम आदमी इस नृत्य को ना तो कर सकता है और ना ही इस प्रकार के वह गीत गा सकता है। कमर में झांझर और ढोलक बांधकर घर-घर और मंदिरों में जाकर यादव समाज के लोग दिवारी नृत्य करते हैं। इसे शुभता का प्रतीक भी माना जाता है और घर में सुख-समृद्धि आती है। देवउठनी एकादशी तक यह आयोजन चलता है।
इस तरह होती है शुरुआत
परमा के दिन खिरखा बांधा जाता है, जिसे यादव समाज के लोग बांधते हैं। खिरखा बांधने से पहले चुटका पहनकर दीवाली गीत गाते हैं। उसके बाद पूजा-अर्चना कर खिरखा बांधते हैं। यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है। सोनू यादव, बलराम यादव ने बताया कि खिरखा बांधने की परंपरा लगभग 100 वर्ष पहले से चल रही है। गांव के बुजुर्ग गांव में सुख-समृद्धि बनी रहे व मवेशियों को किसी भी प्रकार की बीमारियां न फैलें इसलिए देवी-देवताओं की पूजा कर खिरखा बांधते आ रहे हैं।
दिवारी नृत्य का आयोजन सबसे पहले मंदिरों में शुरू होता है। जहां यादव समाज के लोग भगवान की पूजा करते हैं, उसके बाद नाचते हुए दिवारी गीत गाते हैं।

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