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Damoh News: बाघिन कजरी ने गुलजार किया जंगल, वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में फिर गूंजी नन्ही दहाड़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: दमोह ब्यूरो
Updated Sun, 26 Oct 2025 11:29 AM IST
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सार
मार्च 2023 में बांधवगढ़ से लाई गई बाघिन कजरी और बाघ शंभू ने डोंगरगांव रेंज में अपना स्थायी रहवास बना लिया है। बाघों की बढ़ती संख्या अब टाइगर रिजर्व के दूसरे मार्गों, विशेषकर महाराजपुर क्षेत्र तक विस्तार का संकेत दे रही है। रिजर्व तीन जिलों में फैला है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा दमोह जिले में आता है।
जंगल में घूमती बाघिन कजरी। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दमोह जिले के वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व से एक खुशखबरी आई है। यहां बाघिन कजरी ने शावकों को जन्म दिया है। उनकी संख्या तीन बताई जा रही है। इसके बाद यहां बाघों की संख्या 26 से अधिक हो गई है। डोंगरगांव रेंज के अंतर्गत आज भी बाघ शंभू और बाघिन कजरी दोनों अपना रहवास बनाए हैं। दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लाक के एक मार्ग पर सागर रोड पड़ता है और दूसरी ओर महाराजपुर मार्ग। पूर्व तक सागर मार्ग के जंगली क्षेत्र में बाघों का बसेरा था, अब महाराजपुर मार्ग पर भी बाघों की संख्या में बढ़ोतरी होने लगी है।
दो साल पहले लाई गई थी बाघिन
मार्च 2023 में बांधवगढ़ से एक बाघिन और बाघ को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व की रेंज डोगरगांव के जंगलों में छोड़ा गया था। शुरुआत में बाघिन की हरकत देख ऐसा लग रहा था जैसे वह टाइगर रिजर्व के जंगल में नहीं ठहरेगी। क्योंकि उसने पहले अधिकांश समय अपना रहवास तारादेही और तेंदूखेड़ा के जंगलों में बना रखा था, लेकिन बाद में वह अपने मूल स्थान पर पहुंच गई और शंभू नामक बाघ का साथ मिलने के बाद उसने शावकों को जन्म भी दिया है।
एक साथ हैं बाघ-बाघिन
डोंगरगांव रेंज के अंतर्गत आज भी बाघ, बाघिन दोनों अपना रहवास बनाए हैं। बाघिन कजरी अपने शावकों के साथ रह रही है। जानकारी के अनुसार कजरी ने तीन शावको को जन्म दिया है और अब वह तीन माह के होने को हैं। बाघिन से जन्मे शावकों के बाद अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के दूसरे मार्ग पर बसे जंगल में भी बाघों का बसेरा बन गया है। बाघों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और अनुमान यह लगाया जा रहा है जिस तरह राधा, किशन नामक बाघ, बाघिन ने नौरादेही अभ्यारण को बाघों की पहचान दी थी। अब कजरी और शंभू भी वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में अपने परिवार से जंगल को गुलजार करेंगे।
ये भी पढ़ें- कोतमा में पदस्थ मजिस्ट्रेट के आवास पर हमला, बदमाशों ने पथराव कर दी जान से मारने की धमकी
तीन जिलों में फैला है जंगल
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व तीन जिले में फैला हुआ है। सबसे अधिक क्षेत्रफल दमोह जिले का है और अधिकांश बाघों का बसेरा दमोह जिले की सीमा में रहता है। कजरी और शंभू को जिस जगह छोड़ा गया था वह क्षेत्र नरसिंहपुर और दमोह जिले की सीमा से लगा है। बाघ, बाघिन के अलावा महाराजपुर मार्ग पर अन्य सभी जानवर बड़ी संख्या में हैं। इनमें नीलगाय, चीतल, सियार, बंदर, भालू, तेंदुआ सहित अन्य प्रजाति के जानवर देखने मिल जाते हैं। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के डिप्टी डाक्टरेक्टर डॉक्टर अब्दुल अंसारी ने बताया बाघिन कजरी ने शावकों को जन्म दिया है, इसकी जानकारी उन्हें भी मिली है। शावकों की संख्या कितनी है अभी स्पष्ट जानकारी नहीं है।
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दो साल पहले लाई गई थी बाघिन
मार्च 2023 में बांधवगढ़ से एक बाघिन और बाघ को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व की रेंज डोगरगांव के जंगलों में छोड़ा गया था। शुरुआत में बाघिन की हरकत देख ऐसा लग रहा था जैसे वह टाइगर रिजर्व के जंगल में नहीं ठहरेगी। क्योंकि उसने पहले अधिकांश समय अपना रहवास तारादेही और तेंदूखेड़ा के जंगलों में बना रखा था, लेकिन बाद में वह अपने मूल स्थान पर पहुंच गई और शंभू नामक बाघ का साथ मिलने के बाद उसने शावकों को जन्म भी दिया है।
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एक साथ हैं बाघ-बाघिन
डोंगरगांव रेंज के अंतर्गत आज भी बाघ, बाघिन दोनों अपना रहवास बनाए हैं। बाघिन कजरी अपने शावकों के साथ रह रही है। जानकारी के अनुसार कजरी ने तीन शावको को जन्म दिया है और अब वह तीन माह के होने को हैं। बाघिन से जन्मे शावकों के बाद अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के दूसरे मार्ग पर बसे जंगल में भी बाघों का बसेरा बन गया है। बाघों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और अनुमान यह लगाया जा रहा है जिस तरह राधा, किशन नामक बाघ, बाघिन ने नौरादेही अभ्यारण को बाघों की पहचान दी थी। अब कजरी और शंभू भी वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में अपने परिवार से जंगल को गुलजार करेंगे।
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तीन जिलों में फैला है जंगल
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व तीन जिले में फैला हुआ है। सबसे अधिक क्षेत्रफल दमोह जिले का है और अधिकांश बाघों का बसेरा दमोह जिले की सीमा में रहता है। कजरी और शंभू को जिस जगह छोड़ा गया था वह क्षेत्र नरसिंहपुर और दमोह जिले की सीमा से लगा है। बाघ, बाघिन के अलावा महाराजपुर मार्ग पर अन्य सभी जानवर बड़ी संख्या में हैं। इनमें नीलगाय, चीतल, सियार, बंदर, भालू, तेंदुआ सहित अन्य प्रजाति के जानवर देखने मिल जाते हैं। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के डिप्टी डाक्टरेक्टर डॉक्टर अब्दुल अंसारी ने बताया बाघिन कजरी ने शावकों को जन्म दिया है, इसकी जानकारी उन्हें भी मिली है। शावकों की संख्या कितनी है अभी स्पष्ट जानकारी नहीं है।

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